अजमेर में पुलिस ने भरा अनाथ बेटी का मायरा: दुल्हन की आंखें भर आईं, नानी-मामा ने दिया सहारा

अजमेर की पीसांगन पुलिस ने अनाथ सुमित्रा का मायरा भरा, 51,751 रुपये नकद व 20,000 की ज्वेलरी दी; बचपन में मां-बाप खोने वाली दुल्हन की आंखें भर आईं, नानी-मामा ने पाला।

Nov 14, 2025 - 16:05
अजमेर में पुलिस ने भरा अनाथ बेटी का मायरा: दुल्हन की आंखें भर आईं, नानी-मामा ने दिया सहारा

अजमेर (राजस्थान)।

राजस्थान के अजमेर जिले में एक हृदयस्पर्शी घटना ने इंसानियत की मिसाल पेश की है। पीसांगन थाना पुलिस ने एक अनाथ युवती की शादी में 'मायरा' भरकर न केवल आर्थिक मदद की, बल्कि उसे परिवार का एहसास भी कराया। दुल्हन सुमित्रा की आंखें तब भर आईं, जब पुलिसकर्मियों ने 51,751 रुपये नकद और 20,000 रुपये की ज्वेलरी भेंट की। यह राशि पुलिसकर्मियों की स्वैच्छिक सहायता से जुटाई गई थी। यह घटना सामाजिक संवेदनशीलता और पुलिस की मानवीय छवि को उजागर करती है।

बचपन में ही छिन गया मां-बाप का साया;  सुमित्रा की जिंदगी की कहानी दर्द और संघर्ष से भरी हुई है। महज तीन साल की उम्र में उनकी मां का देहांत हो गया, जिससे उनका ममता भरा आंचल छिन गया। इसके तीन साल बाद, जब सुमित्रा सिर्फ छह साल की थीं, तब उनके पिता भी इस दुनिया से चल बसे। दोनों माता-पिता की असामयिक मौत ने सुमित्रा को अनाथ बना दिया। ऐसे में उनकी नानी और मामा ने उन्हें गोद लिया और अपना समझकर पाला-पोसा।मामा का परिवार पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर था, लेकिन फिर भी उन्होंने सुमित्रा की परवरिश में कोई कसर नहीं छोड़ी। नानी ने मां की कमी को पूरा करने की कोशिश की, जबकि मामा ने पिता की जिम्मेदारी निभाई। स्कूल की पढ़ाई से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक, सब कुछ उन्होंने अपनी सीमित आय से जुटाया। सुमित्रा ने भी मेहनत की और जीवन में आगे बढ़ने की ठानी। अब उनकी शादी की बारी आई, लेकिन परिवार की आर्थिक तंगी के कारण 'मायरा' (शादी में रिश्तेदारों या समाज द्वारा दी जाने वाली मदद) भरना मुश्किल हो रहा था।

पुलिस को पता चला, तो तुरंत की मदद;  पीसांगन थाने के पुलिसकर्मियों को जब सुमित्रा की कहानी का पता चला, तो वे चुप नहीं बैठ सके। थाना प्रभारी और अन्य कर्मचारियों ने आपस में विचार-विमर्श किया और फैसला लिया कि वे इस अनाथ बेटी की शादी में मायरा भरेंगे। पुलिसकर्मियों ने अपनी जेब से पैसे इकट्ठा किए। कुल 51,751 रुपये नकद और 20,000 रुपये मूल्य की ज्वेलरी जुटाई गई।जब पुलिस की टीम सुमित्रा के घर पहुंची और यह भेंट सौंपी, तो पूरा परिवार भावुक हो गया। सुमित्रा की आंखें आंसुओं से भर आईं। उन्होंने कहा, "पुलिस को हमेशा सख्ती के लिए जाना जाता है, लेकिन आज उन्होंने मां-बाप का फर्ज निभाया।" नानी और मामा ने भी पुलिस का आभार जताया। थाना प्रभारी ने बताया कि यह मदद स्वैच्छिक थी और पुलिस का कर्तव्य है कि समाज के कमजोर वर्ग की मदद की जाए।

सामाजिक संदेश और प्रेरणा;  यह घटना न केवल सुमित्रा के लिए वरदान साबित हुई, बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है। अजमेर जिले में पुलिस की यह पहल सराहनीय है, जो दिखाती है कि वर्दीधारी सिर्फ कानून व्यवस्था नहीं संभालते, बल्कि इंसानियत भी निभाते हैं। स्थानीय लोग इस घटना की तारीफ कर रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि ऐसे उदाहरण दूसरों को भी प्रेरित करेंगे।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.