अजमेरः डीएवी सेंटेनरी पब्लिक कॉलेज (दयानंद कॉलेज) के कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान किया, नियमितीकरण की मांग जोरों पर
अजमेर के डीएवी सेंटेनरी (दयानंद) कॉलेज के शैक्षणिक-अशैक्षणिक कर्मचारियों ने नियमित नियुक्ति की मांग को लेकर कॉलेज परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया; नारेबाजी के बीच पूरा कॉलेज काम ठप, लेकिन MDS यूनिवर्सिटी की परीक्षाएं जारी रहेंगी।
अजमेर, 5 दिसंबर 2025। अजमेर के प्रसिद्ध डीएवी सेंटेनरी पब्लिक कॉलेज (जिसे आमतौर पर दयानंद कॉलेज के नाम से जाना जाता है) में कार्यरत शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक कर्मचारियों ने शुक्रवार को कॉलेज परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग है कि उन्हें स्थायी/नियमित नियुक्ति दी जाए। लंबे समय से संविदा या अस्थायी आधार पर काम कर रहे ये कर्मचारी अब थक चुके हैं और उन्होंने अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का ऐलान कर दिया है।
धरना शुरू, नारेबाजी तेज शुक्रवार सुबह से ही दर्जनों शिक्षक, लाइब्रेरियन, लैब असिस्टेंट, क्लर्क, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सहित अन्य स्टाफ कॉलेज के मुख्य गेट के सामने एकत्र हुए। हाथों में बैनर-पोस्टर और तख्तियां लिए कर्मचारियों ने “नियमित करो-नियमित करो”, “हमारा हक चाहिए”, “संविदा नहीं, स्थायी नियुक्ति चाहिए” जैसे जोरदार नारे लगाए। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने कॉलेज के मुख्य प्रवेश द्वार पर ही धरना स्थल बना लिया और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए।
कॉलेज का सारा काम ठप, परीक्षाएं जारी रहेंगी धरने के कारण कॉलेज में पढ़ाई से लेकर प्रशासनिक कामकाज तक सब कुछ पूरी तरह ठप हो गया है। क्लासें नहीं लग रही हैं, दफ्तर बंद हैं, लाइब्रेरी-लैब सब बंद पड़े हैं। हालांकि कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं करेंगे। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (MDSU) की पहले से निर्धारित चल रही परीक्षाओं पर धरने का कोई असर नहीं पड़ेगा और वे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही जारी रहेंगी।
लंबे समय से चली आ रही मांग कर्मचारियों का कहना है कि कई लोग पिछले 10-15 सालों से भी ज्यादा समय से संविदा या दैनिक वेतन भोगी के रूप में काम कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें नियमित करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि उन्होंने कुलपति, प्राचार्य और डीएवी कॉलेज मैनेजिंग कमेटी को कई बार ज्ञापन सौंपे, लेकिन कोई हल नहीं निकला। आखिरकार मजबूर होकर उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।