IAS आरती डोगरा पर ACB जांच के आदेश: हाईकोर्ट सख्त, कहा– जानबूझकर रोकी गई कार्रवाई, भ्रष्टाचार की आशंका
राजस्थान हाईकोर्ट ने डिस्कॉम चेयरपर्सन और आईएएस अधिकारी आरती डोगरा के खिलाफ ACB जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने याचिकाकर्ता के मामले में जांच को जानबूझकर लंबित रखा, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका बनती है। अदालत ने तीन महीने में जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामला प्रमोशन विवाद और रोस्टर रजिस्टर संधारण से जुड़ा है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने डिस्कॉम की चेयरपर्सन और आईएएस अधिकारी आरती डोगरा के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से जांच कराने के आदेश दिए हैं। अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया ऐसे हालात सामने आते हैं, जिनसे भ्रष्टाचार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह आदेश राजस्थान हाईकोर्ट की जस्टिस रवि चिरानिया की बेंच ने सुपरिटेंडेंट इंजीनियर आरके मीणा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने ACB को निर्देश दिया है कि वह पूरे मामले की जांच कर तीन महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करे।सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि डिस्कॉम चेयरपर्सन ने याचिकाकर्ता के खिलाफ जांच को लेकर निर्णय जानबूझकर लंबित रखा। अदालत ने कहा कि यह आचरण कर्तव्यों के निर्वहन में विफलता को दर्शाता है और इससे संदेह पैदा होता है कि कहीं न कहीं प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है।
प्रमोशन विवाद से जुड़ा मामला
याचिकाकर्ता आरके मीणा की ओर से पेश अधिवक्ताओं अजातशत्रु मीणा और मोविल जीनवाल ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने वर्ष 2022-23 की विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) को चुनौती देते हुए दिसंबर 2023 में रिट याचिका दायर की थी।याचिका में आरोप लगाया गया कि विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और डीओपी के सर्कुलर के बावजूद रोस्टर रजिस्टर का सही तरीके से संधारण नहीं किया। इसके चलते उन्हें एक्सईएन से सुपरिटेंडेंट इंजीनियर पद पर प्रमोशन नहीं मिल सका।
याचिका के बाद मिलीं तीन चार्जशीट
याचिकाकर्ता का आरोप है कि कोर्ट में याचिका दायर करने के बाद उन्हें अलग-अलग कारणों से तीन चार्जशीट थमा दी गईं। इसे उन्होंने प्रताड़ना और दबाव बनाने की कार्रवाई बताया।
कोर्ट ने मांगा था रोस्टर रजिस्टर
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चेयरपर्सन को निर्देश दिया था कि वे अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट करें कि विभाग में रोस्टर रजिस्टर का संधारण किया जा रहा है या नहीं।हालांकि, उनकी ओर से जो हलफनामा पेश किया गया, उसमें रोस्टर रजिस्टर नहीं बल्कि केवल सारणीबद्ध डेटा ही दिया गया। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए दोबारा स्पष्ट निर्देश दिए कि रोस्टर रजिस्टर सहित पूरी जानकारी प्रस्तुत की जाए।
इसके बावजूद अगली सुनवाई में भी संबंधित रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए सख्त रुख अपनाया और ACB जांच के आदेश जारी कर दिए।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध परिस्थितियां इस ओर संकेत करती हैं कि मामले में पारदर्शिता नहीं बरती गई। अदालत ने यह भी माना कि चेयरपर्सन अपने कर्तव्यों के निर्वहन में विफल रही हैं।