हमारी सेनाओं के ‘त्रिशूल’ प्रहार से पस्त हुआ दुश्मन: थार में चला स्ट्राइक कोर का ‘सुदर्शन चक्र’, जांबाजों ने दिखाई अपार ताकत
थार में 'त्रिशूल' अभ्यास के तहत 21 स्ट्राइक कोर के 'सुदर्शन चक्र' ने एयर कैवलरी और भीष्म टैंकों के साथ दुश्मन पर ताबड़तोड़ प्रहार कर युद्ध ताकत दिखाई
भारतीय सेना ने एक बार फिर अपनी युद्धकुशलता और एकीकृत ताकत का लोहा मनवाते हुए संयुक्त सैन्य अभ्यास 'त्रिशूल' का सफल आयोजन किया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुश्मन की नापाक चालों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तीनों सेनाओं – थल सेना, वायु सेना और नौसेना – ने थार के रेगिस्तानी इलाके में 'त्रिशूल' अभ्यास के दौरान जबरदस्त प्रहार किया। इस अभ्यास में थल सेना की 21 स्ट्राइक कोर के 'सुदर्शन चक्र' ने दुश्मन के इलाके को ध्वस्त करने में अहम भूमिका निभाई। सुदर्शन चक्र के 40 जांबाज सैनिकों ने एयर कैवलरी की सहायता से बख्तरबंद वाहनों और मुख्य युद्धक टैंक 'भीष्म' के साथ ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिससे दुश्मन की रक्षापंक्ति चूर-चूर हो गई। यह अभ्यास न केवल हमारी सेनाओं की तालमेल की मिसाल है, बल्कि सीमा पर सतत सतर्कता का प्रतीक भी है।
ऑपरेशन सिंदूर: दुश्मन को सबक सिखाने वाली कार्रवाई पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को करारा झटका दिया था। इस ऑपरेशन में भारतीय सेनाओं ने दुश्मन के लॉन्च पैड्स को नष्ट कर आतंकी गतिविधियों पर लगाम कसी थी। उसके बाद, दुश्मन की बौखलाहट बढ़ती जा रही है। इसी कड़ी में 'त्रिशूल' अभ्यास को आयोजित किया गया, जो ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को मजबूत करने और भविष्य की किसी भी आकस्मिकता के लिए तैयार रहने का संदेश देता है। ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि भारत की सेनाएं किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार हैं। 'त्रिशूल' इसी दृढ़ संकल्प का विस्तार है, जहां तीनों सेनाएं एक साथ मिलकर दुश्मन को पस्त करने का अभ्यास कर रही हैं।"
थार के रेगिस्तान में 'सुदर्शन चक्र' का प्रचंड हमला; थार के विस्तारित रेगिस्तानी क्षेत्र में आयोजित इस अभ्यास का केंद्र बिंदु थल सेना की 21 स्ट्राइक कोर का 'सुदर्शन चक्र' रहा। सुदर्शन चक्र, जो भारतीय सेना की सबसे घातक और तेज गति वाली यूनिट्स में से एक है, ने 40 चुनिंदा जांबाज सैनिकों के साथ दुश्मन के काल्पनिक ठिकानों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसा प्रहार किया। इन सैनिकों ने रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियों में अपनी सहनशक्ति का परिचय दिया, जहां तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।अभ्यास के दौरान, सुदर्शन चक्र की टुकड़ियों ने एयर कैवलरी यूनिट्स के साथ समन्वय स्थापित किया। एयर कैवलरी के हेलीकॉप्टरों ने ऊंचाई से दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखी और सटीक हवाई सहायता प्रदान की। इसके साथ ही, बख्तरबंद वाहनों की काफिला ने रेगिस्तानी इलाके को पार करते हुए दुश्मन की रक्षावायर को तोड़ा। लेकिन सबसे घातक हथियार साबित हुए मुख्य युद्धक टैंक 'भीष्म'। ये आधुनिक टैंक, जो रूसी टी-90 की उन्नत तकनीक पर आधारित हैं, ने 125 एमएम की तोपों से ताबड़तोड़ फायरिंग की। एक ही गोलीबारी में दुश्मन के काल्पनिक बंकरों और वाहनों को ध्वस्त कर दिया गया। "भीष्म टैंक ने रेगिस्तान की रेत पर जैसे आग उगल ली। इसकी फायरिंग क्षमता और गतिशीलता ने दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।"तीनों सेनाओं का तालमेल: युद्ध की नई परिभाषा'त्रिशूल' अभ्यास की खासियत यह रही कि इसमें थल, वायु और नौसेना की यूनिट्स ने एक साथ काम किया। वायु सेना के लड़ाकू विमान, जैसे राफेल और सुखोई-30 एमकेआई, ने हवाई हमलों का सिमुलेशन किया, जबकि नौसेना की तटीय यूनिट्स ने थार के निकटवर्ती समुद्री क्षेत्र से सहायता प्रदान की। यह अभ्यास पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान की ओर केंद्रित था, जहां हाल के वर्षों में घुसपैठ की घटनाएं बढ़ी हैं। अभ्यास में 10,000 से अधिक सैनिकों ने भाग लिया, जिनमें विशेष बलों के जवान भी शामिल थे।सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि 'त्रिशूल' न केवल रक्षात्मक क्षमता बढ़ाता है, बल्कि आक्रामक रणनीति को भी मजबूत करता है। "सुदर्शन चक्र का यह प्रहार दुश्मन के लिए चेतावनी है कि भारत की सेनाएं अब पारंपरिक युद्ध से कहीं आगे हैं। ड्रोन, साइबर वारफेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का समावेश इसे और घातक बनाता है।" अभ्यास के दौरान ड्रोन स्वार्म्स का उपयोग कर दुश्मन की निगरानी की गई, जो आधुनिक युद्ध की झलक पेश करता है।
जांबाजों की कहानियां: रेत पर लिखी वीरता रेगिस्तान में रात के अंधेरे में हम सुदर्शन चक्र की तरह घूमते रहे। एयर कैवलरी का समर्थन मिलते ही हमने टैंक भीष्म को आगे बढ़ाया। दुश्मन के इलाके पर पहली ही फायरिंग से सब कुछ राख हो गया। यह हमारी तैयारी का प्रमाण है।" इसी तरह, एक एयर कैवलरी पायलट ने कहा, "हेलीकॉप्टर से नीचे देखते ही दुश्मन की हर चाल साफ दिख रही थी। हमारा तालमेल परफेक्ट था।"भविष्य की चुनौतियां और सेना की तैयारीयह अभ्यास न केवल दुश्मन को सबक सिखाने का माध्यम बना, बल्कि सेना की आंतरिक क्षमता को परखने का अवसर भी प्रदान किया। रक्षा मंत्री ने अभ्यास का निरीक्षण करते हुए कहा, "त्रिशूल जैसे अभ्यास हमारी सेनाओं को स्टील की तरह मजबूत बनाते हैं। हम किसी भी आक्रमण का जवाब दोगुनी ताकत से देंगे।" आने वाले दिनों में ऐसे और अभ्यास आयोजित किए जाएंगे, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अंतरिक्ष आधारित हथियारों का अधिक उपयोग होगा।