भजन गाकर लौट रहे थे… रास्ते में ऐसा क्या हुआ कि हमेशा के लिए खामोश हो गए धनराज जोशी?

रात को मंच पर गूंज रही थी आवाज… सुबह हादसे की खबर ने सबको चौंका दिया—क्या हुआ रास्ते में?

May 1, 2026 - 15:31
भजन गाकर लौट रहे थे… रास्ते में ऐसा क्या हुआ कि हमेशा के लिए खामोश हो गए धनराज जोशी?

राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र से एक दुखद खबर सामने आई है। प्रसिद्ध भजन गायक धनराज जोशी का शुक्रवार सुबह एक भीषण सड़क हादसे में निधन हो गया। इस हादसे ने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे संगीत जगत और उनके लाखों प्रशंसकों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

 कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना दरोली के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 48 (NH-48) पर हुई। धनराज जोशी जिस कार में सवार थे, वह अचानक अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ गई और फिर पलट गई। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही उनकी हालत गंभीर हो गई।

कार में उनके साथ मौजूद चालक राजेंद्र सोनेरी भी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है।

 भजन संध्या से लौटते समय हादसा

डबोक थाना पुलिस के अनुसार, धनराज जोशी गुरुवार रात हल्दीघाटी के पास सेमल गांव में आयोजित एक भजन संध्या में प्रस्तुति देने गए थे। कार्यक्रम खत्म होने के बाद वे अपने बेटे और अन्य साथियों के साथ कार से अपने गांव बड़वाई लौट रहे थे।

रास्ते में उनके बेटे और अन्य साथी किसी काम के चलते उदयपुर में ही उतर गए। इसके बाद जोशी अपने चालक के साथ बड़वाई के लिए रवाना हुए। सुबह करीब 5 बजे, घर लौटते समय दरोली के पास यह हादसा हो गया।

अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

हादसे की सूचना मिलते ही डबोक पुलिस और हाईवे पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची। दोनों घायलों को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल ले जाया गया।

डॉक्टरों ने जांच के बाद धनराज जोशी को मृत घोषित कर दिया, जबकि घायल चालक को बेहतर इलाज के लिए एमबी अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

 संगीत जगत में शोक की लहर

धनराज जोशी के निधन की खबर फैलते ही उनके प्रशंसकों और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर हजारों लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

साधारण शुरुआत, असाधारण पहचान

धनराज जोशी ने बहुत साधारण जीवन से अपनी यात्रा शुरू की थी। उनकी पढ़ाई केवल 8वीं कक्षा तक ही हुई थी, लेकिन बचपन से ही उन्हें संगीत का शौक था।

स्कूल में पहली बार स्टेज पर गाने का मौका मिला, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

उनके परिवार में भी संगीत की परंपरा थी—उनकी मां भोली बाई और नाना-नानी भी भजन गायक थे। चार बहनों के बीच वे इकलौते भाई थे और उन्होंने अपने हुनर से अलग पहचान बनाई।

 सोशल मीडिया पर भी बड़ी पहचान

आज के दौर में भी धनराज जोशी की लोकप्रियता कम नहीं थी। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 3.79 लाख फॉलोअर्स थे। उनकी भजन गायकी के साथ-साथ उनकी कॉमिक शैली भी लोगों को खूब पसंद आती थी।

 परिवार पीछे छोड़ गए

धनराज जोशी अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं—उनके दो बेटे गणपत और सोनू, और एक बेटी किरण है।

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