Ajmer : दिल की धड़कनें बंद, शरीर का सारा खून बह गया फिर भी मौत को मात देकर वापस आ गया युवक...

दिल थम गया था… सांसें रुक चुकी थीं… फिर भी 18 साल का रेहान मौत को हराकर लौट आया—अजमेर में हुआ चमत्कार।

May 1, 2026 - 14:37
Ajmer : दिल की धड़कनें बंद, शरीर का सारा खून बह गया फिर भी मौत को मात देकर वापस आ गया युवक...

राजस्थान के अजमेर से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसे सुनकर किसी को भी यकीन करना मुश्किल हो सकता है। यह कहानी है जिंदगी और मौत के बीच लड़ी गई एक जंग की—जहां डॉक्टरों की सूझबूझ, हिम्मत और मेहनत ने एक युवक को मौत के मुंह से वापस खींच लाया।

 11 अप्रैल की खौफनाक रात

11 अप्रैल की रात किशनगढ़ के खतौली गांव का 18 वर्षीय युवक रेहान एक हादसे का शिकार हो गया। खेत में जंगली सूअर से बचने की कोशिश के दौरान एक बंदूक गिर गई, जिससे अचानक फायर हुआ और उसके पैर में 12 छर्रे जा धंसे।

घटना इतनी गंभीर थी कि उसकी नसें फट गईं, शरीर से तेजी से खून बहने लगा और हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

 अस्पताल पहुंचते ही ‘डेथ जोन’

रेहान को तुरंत जेएलएन अस्पताल लाया गया, लेकिन तब तक उसकी हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी।

ब्लड प्रेशर लगभग खत्म

हीमोग्लोबिन बेहद कम

शरीर ठंडा

और सबसे खतरनाक… दिल की धड़कन बंद

डॉक्टरों के अनुसार, वह पूरी तरह “डेथ जोन” में पहुंच चुका था।

डॉक्टरों की जंग शुरू

यहीं से शुरू होती है जिंदगी बचाने की असली लड़ाई। सर्जन डॉ. तेजकरण सैनी और उनकी टीम ने हार नहीं मानी।

तुरंत सीपीआर (CPR) देकर बंद हो चुके दिल को दोबारा धड़काया गया। यह पल बेहद अहम था—क्योंकि यही वह समय था जब रेहान जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था।

9 घंटे का लंबा ऑपरेशन

इसके बाद ऑपरेशन थिएटर में करीब 9 घंटे तक लगातार सर्जरी चली।

पैर की तीन फटी हुई नसों को जोड़ा गया

एक-एक करके शरीर से 12 छर्रे निकाले गए

भारी ब्लड लॉस को कंट्रोल किया गया

डॉक्टरों के मुताबिक, अगर इलाज में 24 घंटे की भी देरी होती, तो रेहान का पैर काटना पड़ सकता था।

 

मौत को हराकर लौटी जिंदगी

लंबे इलाज और देखभाल के बाद आखिरकार रेहान की हालत में सुधार हुआ। आज वह न सिर्फ अपने पैरों पर खड़ा है, बल्कि उसे अस्पताल से छुट्टी भी मिल चुकी है।

यह सिर्फ एक मरीज के बचने की कहानी नहीं, बल्कि डॉक्टरों की मेहनत, मेडिकल साइंस और इंसानी जज्बे की जीत है।

 इंसानियत की मिसाल

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि डॉक्टरों को धरती पर भगवान क्यों कहा जाता है।

“जाको राखे साइयां, मार सके न कोय”—यह कहावत यहां पूरी तरह सच साबित होती नजर आई।

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