सरहदों ने रोका, किस्मत ने जोड़ा… 15 साल बाद आखिरकार पूरा हुआ वो रिश्ता जिसने सबको रुला दिया

जोधपुर के एक परिवार की 15 साल लंबी प्रेम कहानी, जो भारत-पाकिस्तान की सरहदों के बावजूद नेपाल में शादी और 10 महीने बाद दुल्हन के भारत आने के साथ पूरी हुई।

Apr 19, 2026 - 12:49
सरहदों ने रोका, किस्मत ने जोड़ा… 15 साल बाद आखिरकार पूरा हुआ वो रिश्ता जिसने सबको रुला दिया

राजस्थान के जोधपुर से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो यह साबित करती है कि सच्चा प्यार किसी सरहद का मोहताज नहीं होता। यह कहानी है एक ऐसे रिश्ते की, जिसने 15 साल तक इंतजार, संघर्ष और अनगिनत मुश्किलों के बाद आखिरकार अपनी मंज़िल पा ली।

इंतजार जो खत्म ही नहीं हो रहा था

यह कहानी अमित सुथार और रक्षा सुथार की है। वर्षों पहले दोनों की सगाई पाकिस्तान में परिवार द्वारा तय की गई थी। लेकिन 2011 में अमित का परिवार भारत आकर बस गया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच वीजा संबंधी जटिलताओं ने इस रिश्ते को अधूरा छोड़ दिया।

हर बार वीजा के लिए कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। समय बीतता गया, लेकिन उम्मीद कभी खत्म नहीं हुई।

नेपाल बना मिलन की धरती

आखिरकार एक अनोखा रास्ता निकाला गया। भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे शादी संभव नहीं थी, इसलिए दोनों परिवार काठमांडू पहुंचे।

2 जून 2025 को नेपाल की धरती पर दोनों ने सात फेरे लेकर अपने रिश्ते को नया नाम दिया। लेकिन शादी के बाद भी दूरी खत्म नहीं हुई—अमित वापस जोधपुर लौट आए, जबकि रक्षा को फिर पाकिस्तान जाना पड़ा।

10 महीने का और इंतजार

शादी के बाद असली संघर्ष शुरू हुआ। दुल्हन को भारत लाने के लिए परिवार ने हर संभव प्रयास किया। लंबी कानूनी प्रक्रिया, दस्तावेज़ और सरकारी औपचारिकताओं के बीच आखिरकार उम्मीद की किरण नजर आई।

अमित शाह और गजेंद्र सिंह शेखावत के सहयोग से वीजा प्रक्रिया में राहत मिली और रक्षा को 45 दिन का विजिटर वीजा प्राप्त हुआ।

जब दुल्हन ने रखा ससुराल में कदम

जैसे ही रक्षा सुथार ने जोधपुर के पाल क्षेत्र में अपने ससुराल में गृह प्रवेश किया, पूरे परिवार में खुशी का माहौल छा गया। वर्षों का इंतजार, दूरी और संघर्ष आखिरकार खत्म हुआ।

यह सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि उम्मीद, धैर्य और प्रेम की जीत की कहानी है—जहां सरहदें हार गईं और रिश्ते जीत गए।

Kashish Sain Bringing truth from the ground