राजस्थान में हेल्थ सिस्टम की बड़ी लापरवाही: गलत रिपोर्ट से मरीजों में दहशत, प्रेग्नेंट से लेकर हैपेटाइटिस तक गलत निकले नतीजे

राजस्थान में मदर-हब और स्पोक मॉडल के तहत हो रही जांचों में भारी लापरवाही सामने आई है। गलत रिपोर्ट्स ने मरीजों को परेशान कर दिया, स्वास्थ्य विभाग ने भी खामियां मानी।

Apr 30, 2026 - 10:51
राजस्थान में हेल्थ सिस्टम की बड़ी लापरवाही: गलत रिपोर्ट से मरीजों में दहशत, प्रेग्नेंट से लेकर हैपेटाइटिस तक गलत निकले नतीजे

राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लागू किया गया मदर-हब और स्पोक मॉडल अब सवालों के घेरे में आ गया है। मरीजों को घर के पास ही जांच सुविधा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया यह सिस्टम अब गंभीर लापरवाहियों के कारण विवादों में है। कई मामलों में गलत रिपोर्ट्स मिलने से मरीजों और उनके परिजनों में दहशत का माहौल बन गया है।

अलवर, टोंक और उदयपुर जैसे जिलों से सामने आए ताजा मामलों ने इस व्यवस्था की पोल खोल दी है। स्वास्थ्य विभाग ने भी जांच में लापरवाही स्वीकार की है और संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसी गंभीर गलतियां हो क्यों रही हैं।

अलवर केस: अविवाहित युवती को बताया प्रेग्नेंट

अलवर के काला कुआं सैटेलाइट अस्पताल में एक अविवाहित युवती खांसी के इलाज के लिए पहुंची थी। डॉक्टर द्वारा लिखी गई जांच के बाद जब रिपोर्ट आई, तो उसमें उसे प्रेग्नेंट बताया गया। इस रिपोर्ट ने युवती और उसके परिवार को झकझोर कर रख दिया।

बाद में जांच में सामने आया कि अस्पताल में एक ही नाम की तीन युवतियां मौजूद थीं और रिपोर्ट आपस में बदल गई। लैब ने सफाई दी कि भीड़ ज्यादा थी और युवती ने ओपीडी पर्ची या जीरो बिल नहीं दिखाया। हालांकि हंगामे के बाद रिपोर्ट सही की गई और संबंधित स्टाफ पर कार्रवाई हुई।

टोंक केस: निगेटिव को बना दिया पॉजिटिव

टोंक के लाम्बा हरिसिंह सीएचसी में एक युवक की हैपेटाइटिस सी जांच में बड़ी गलती सामने आई। प्रारंभिक रिपोर्ट में उसे पॉजिटिव बताया गया, जिससे वह और उसका परिवार तनाव में आ गया।

बाद में जांच में पता चला कि लैब टेक्नीशियन ने कंप्यूटर में डेटा एंट्री के दौरान गलती कर दी थी। दोबारा जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई। इस मामले में संबंधित टेक्नीशियन को नोटिस जारी किया गया।

उदयपुर केस: एक दिन में दो अलग रिपोर्ट

उदयपुर के बड़गांव सैटेलाइट अस्पताल में एक ही मरीज की एक दिन में दो बार जांच की गई, लेकिन दोनों रिपोर्ट अलग-अलग आईं। जांच में पाया गया कि अस्पताल में स्टाफ की भारी कमी थी और एक ही कर्मचारी कई जिम्मेदारियां संभाल रहा था।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि स्टाफ पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं था। अब यहां अतिरिक्त स्टाफ लगाया गया है।

फर्म ने आरोपों से किया इनकार

जांच का जिम्मा संभाल रही कृष्णा डायग्नोस्टिक लैब प्राइवेट लिमिटेड ने सभी आरोपों को नकार दिया है। फर्म के जोन हेड विपिन दीक्षित के अनुसार, सभी लैब टेक्नीशियन राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल से रजिस्टर्ड हैं और गाइडलाइन के तहत काम कर रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने मानी खामियां

स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. रविप्रकाश शर्मा ने स्वीकार किया कि कुछ मामलों में शिकायतें मिली हैं और संबंधित संस्थानों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। कई जगह सेवा प्रदाता फर्म को नोटिस भी जारी किए गए हैं।

लापरवाही के पीछे कारण

स्वास्थ्य विभाग की जांच में स्टाफ की कमी, कार्यभार बढ़ना और कर्मचारियों की लापरवाही मुख्य कारण सामने आए हैं। पहले जहां सीमित जांचें होती थीं, अब जांचों का दायरा बढ़ गया है, जिससे सिस्टम पर दबाव बढ़ गया है।

कुछ अधिकारियों का यह भी मानना है कि निजी लैब से काम कम होने के कारण इस मॉडल को फेल करने की कोशिशें भी हो सकती हैं।

क्या है मदर-हब और स्पोक मॉडल

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत लागू इस मॉडल का उद्देश्य मरीजों को उनके नजदीकी अस्पतालों में मुफ्त जांच सुविधा देना है। इसमें कैंसर मार्कर, थायराइड, ब्लड टेस्ट, विटामिन्स और अन्य कई जांचें शामिल हैं।

इस योजना के तहत जिला अस्पतालों, सैटेलाइट अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी में जांचों की संख्या कई गुना बढ़ाई गई है और इसके लिए एक ही निजी फर्म को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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