सवाई माधोपुर में दिल दहला देने वाला हादसा: शॉर्ट सर्किट से लगी आग में दो मासूम बहनें जिंदा जल गईं, पैर पिघले, जीभ बाहर लटक गई
सवाई माधोपुर के पीपलवाड़ा गांव में शॉर्ट सर्किट से लगी आग में रमेश नायक की दो नाबालिग बेटियाँ प्रिया (14) और पूजा (8) जिंदा जल गईं। माता-पिता धार्मिक कार्यक्रम में बाहर गए थे, दोनों बहनें घर में अकेली थीं। आग की भयंकर गर्मी से पैर पिघल गए और जीभ बाहर निकल आई। 90% तक झुलसने से दोनों की अस्पताल पहुँचते ही मौत हो गई। हादसे में 15 बकरियाँ भी जल गईं।
राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ है। मलारना डूंगर थाना क्षेत्र के पीपलवाड़ा गांव में मंगलवार देर रात करीब 12 बजे एक छप्पर वाले मकान में अचानक शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई। इस आग ने देखते-ही-देखते पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया और घर में अकेली सो रही दो नाबालिग बहनें जिंदा जल गईं।मृतक बच्चियों की पहचान प्रिया नायक (14 वर्ष) और पूजा नायक (8 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों रमेश नायक की बेटियाँ थीं। रमेश नायक पेशे से भगवान देवनारायण की फड़ (धार्मिक कथा) पढ़ने का काम करते हैं। हादसे के वक्त रमेश अपनी पत्नी के साथ गंगापुर सिटी में एक धार्मिक कार्यक्रम में गए हुए थे। घर पर सिर्फ दोनों बच्चियाँ थीं। उनके दादा रामजीलाल नायक और दादी रामेश्वरी देवी घर के बाहर आंगन में सो रहे थे।
आग कैसे लगी और इतनी तेजी से फैली? मलारना डूंगर थानाधिकारी राजेश कुमार मीणा के अनुसार, घर में बिजली के तारों में शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे छप्पर में रखे सामान में आग लगी। चूंकि घर कच्चा और छप्पर वाला था, इसलिए आग कुछ ही मिनटों में पूरे मकान में फैल गई। लकड़ी और घास-फूस का छप्पर होने से आग की लपटें आसमान छूने लगीं।
बच्चियों की चीखें सुनकर परिवार में मची खलबली आग लगते ही दोनों बहनें जोर-जोर से चीखने-चिल्लाने लगीं और मदद के लिए पुकारने लगीं। उनकी चीखें सुनकर दादा-दादी नींद से जागे, लेकिन तब तक आग इतनी भयंकर हो चुकी थी कि घर के अंदर घुसना नामुमकिन था। पास में ही (लगभग 30 फीट दूर) अलग मकान में रहने वाले बच्चियों के चाचा कमलेश नायक और छोटिया नायक भी दौड़े आए। उन्होंने और ग्रामीणों ने बाल्टी-बाल्टी पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। दोनों बच्चियाँ आग की लपटों में पूरी तरह घिर चुकी थीं।
डॉक्टरों ने बताया – 90% तक झुलस चुकी थीं दोनों ग्रामीणों ने किसी तरह दोनों बच्चियों को बाहर निकाला और तुरंत मलारना डूंगर के सरकारी अस्पताल पहुँचाया, लेकिन अस्पताल पहुँचते-पहुँचते दोनों की मौत हो चुकी थी। पोस्टमॉर्टम करने वाले चिकित्सक डॉ. अमन ने बताया कि दोनों बच्चियाँ 90 प्रतिशत से अधिक जल चुकी थीं। आग की भयंकर गर्मी के कारण उनके पैर पिघलकर विकृत हो गए थे और जीभ का मांस पककर मुंह से बाहर निकल आया था। यह दृश्य इतना भयावह था कि पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर और स्टाफ भी सन्न रह गए।
परिवार पर टूटा दुःख का पहाड़ रमेश नायक के कुल छह संतानें हैं – चार बेटियाँ और दो बेटे। प्रिया तीसरे नंबर की और पूजा पांचवें नंबर की बेटी थी। हादसे में घर में बंधी 15 बकरियाँ भी जिंदा जल गईं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। माँ-बाप जब गंगापुर सिटी से सुबह गांव लौटे तो उनकी चीखें पूरे गांव में गूंज उठीं।