सऊदी अरब में फंसे रमेश मेघवाल का शव: एक माह से अधिक का इंतजार, परिवार की टूटती उम्मीदें और कानूनी लड़ाई

राजस्थान के बालोतरा निवासी 19 वर्षीय रमेश कुमार मेघवाल की सऊदी अरब में 13 नवंबर 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। रोजगार के लिए गए रमेश का शव एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी भारत नहीं लाया जा सका, जिससे परिवार गहरे सदमे में है। मां की याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सऊदी दूतावास, केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। मामला प्रवासी युवाओं के शोषण और दलालों के जाल को उजागर करता है।

Dec 14, 2025 - 19:14
सऊदी अरब में फंसे रमेश मेघवाल का शव: एक माह से अधिक का इंतजार, परिवार की टूटती उम्मीदें और कानूनी लड़ाई

बालोतरा/जोधपुर/रियाद।

राजस्थान के बालोतरा जिले के गिड़ा तहसील के सोहड़ा गांव (मेघवालों की ढाणी) के 19 वर्षीय होनहार युवक रमेश कुमार मेघवाल की सऊदी अरब में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत को एक माह से अधिक समय बीत चुका है। 13 नवंबर 2025 को हुई इस मौत की सूचना परिवार को 17 नवंबर को मिली, लेकिन आज तक (14 दिसंबर 2025) उनका शव भारत नहीं लाया जा सका। परिवार का घर मातम में डूबा हुआ है। मां टीजू बाई की आंखें बेटे की अंतिम झलक की राह देखते-देखते पत्थर हो चुकी हैं।

 

पिता खम्माराम मेघवाल, बहनें और भाई रोजाना एक ही सवाल पूछते हैं—"आज शव आएगा क्या?" लेकिन जवाब केवल सन्नाटा है।रमेश कोई साधारण युवक नहीं था। हायर सेकेंडरी साइंस में लगभग 90 प्रतिशत अंक लाने वाला यह पढ़ा-लिखा और मेहनती लड़का परिवार की उम्मीद था। घरवाले चाहते थे कि वह आगे पढ़कर कुछ बड़ा बने। लेकिन आर्थिक तंगी ने सपनों पर ग्रहण लगा दिया। दलालों के चमकदार झूठे वादों—"मोटी कमाई, बेहतर भविष्य"—में फंसकर रमेश 11 अक्टूबर 2025 को स्थानीय एजेंटों के जरिए कतर (या सऊदी क्षेत्र) के वीजा पर विदेश रवाना हुआ। वहां पहुंचते ही हकीकत सामने आई—कठिन कामकाजी हालात, शोषण, अकेलापन और मानसिक तनाव। रमेश ने कई बार घर फोन कर अपनी परेशानियां बताईं, लेकिन वापसी का रास्ता मुश्किल था।

 दलालों का जाल इतना मजबूत था कि लौटना आसान नहीं रहा।फिर आया वह काला दिन—13 नवंबर को परिवार से आखिरी बातचीत हुई, उसके बाद फोन बंद। चार दिन बाद मौत की खबर मिली। नियोक्ता की ओर से सूचना आई, लेकिन मौत का स्पष्ट कारण आज तक नहीं बताया गया। परिवार और गांव वाले इसे संदिग्ध मानते हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट्स में आत्महत्या का जिक्र है, लेकिन सऊदी पुलिस की जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट अभी लंबित है, जिसके कारण शव की रिहाई रुकी हुई है। भारतीय दूतावास ने 3 दिसंबर को डेथ सर्टिफिकेट जारी किया, लेकिन शव सौंपने में देरी जारी है।मौत के बाद परिवार का संघर्ष और बढ़ गया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार शव लाने का खर्च भी नहीं उठा सकता। शुरू में स्थानीय सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखा। पूर्व मंत्री कैलाश चौधरी और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी हस्तक्षेप की मांग की। दूतावास से संपर्क हुआ, लेकिन प्रक्रिया अधर में लटकी रही।

आखिरकार, मां टीजू बाई ने राजस्थान हाईकोर्ट की शरण ली। जस्टिस नूपुर भाटी की सिंगल बेंच ने मामले को मानवीय और गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार, राजस्थान सरकार, भारतीय दूतावास और दिल्ली स्थित सऊदी अरब दूतावास को नोटिस जारी किए। कोर्ट ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। यह एक दुर्लभ कदम है, जहां विदेशी दूतावास को सीधे नोटिस भेजा गया। अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होनी है।परिवार की स्थिति दयनीय है। मां बार-बार कहती हैं—"बस एक बार बेटे का चेहरा देख लूं, अंतिम संस्कार कर लूं।" पिता सदमे में हैं, भाई ने रोजगार छोड़ दिया है। आस-पड़ोस और रिश्तेदार ढांढस बंधाते हैं, लेकिन कुछ कर नहीं पाते। गांव में शोक की लहर है। रमेश के साथ गए दो साथी भी वहां फंसे बताए जा रहे हैं, जिन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

यह घटना केवल रमेश मेघवाल की नहीं, बल्कि हजारों भारतीय युवाओं की कहानी है, जो बेहतर जिंदगी की तलाश में गल्फ देशों का रुख करते हैं। दलालों का जाल, अवैध वीजा, शोषण और मानसिक दबाव अक्सर ऐसी त्रासदियों को जन्म देते हैं। कई मामलों में शव लाने में महीनों लग जाते हैं, क्योंकि जांच, फोरेंसिक और कागजी प्रक्रियाएं लंबी होती हैं। सरकार से गुहार है कि ऐसे मामलों में तेजी लाई जाए, दलालों पर सख्ती हो और प्रवासी मजदूरों के लिए बेहतर सुरक्षा व्यवस्था बने।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.