"व्यक्ति, जाति या धर्म के नाम पर राजस्व गांव का नामकरण नहीं हो सकता": राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला, जोधपुर के मोडसिंह नगर मामले में नियमों का पालन अनिवार्य
राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा की अगुवाई में) ने जोधपुर की शेरगढ़ तहसील के मोडसिंह नगर राजस्व ग्राम मामले में अहम फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी राजस्व गांव का नाम व्यक्ति, जाति या धर्म के नाम पर नहीं रखा जा सकता। याचिका में आरोप था कि सरपंच के रिश्तेदार के नाम पर ही नामकरण किया गया, जो नियमों का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा नामकरण राज्य के दिशानिर्देशों और संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है, इसलिए असंभव है। यह आदेश राज्य में नए राजस्व गांवों के नामकरण पर सख्ती बरतने का संकेत देता है।
जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राजस्व ग्राम (रेवेन्यू विलेज) का नाम किसी व्यक्ति, जाति या धर्म के आधार पर नहीं रखा जा सकता। यह फैसला जोधपुर जिले की शेरगढ़ तहसील के मोडसिंह नगर राजस्व ग्राम से जुड़े विवाद पर आया है।याचिका भूरू राम एवं अन्य की ओर से दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सरपंच के रिश्तेदार के नाम पर ही इस नए राजस्व ग्राम का नामकरण कर दिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने इसे नियमों का स्पष्ट उल्लंघन बताया और अदालत से हस्तक्षेप की मांग की।अदालत की डिवीजन बेंच, जिसमें एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा शामिल थे, ने मामले की गहन जांच के बाद कहा कि गांव के नामकरण में राज्य सरकार के नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है। अदालत ने जोर दिया कि ऐसा नामकरण नियमों के विपरीत नहीं हो सकता, क्योंकि यह समानता के सिद्धांत (संविधान के अनुच्छेद 14) का उल्लंघन करता है और पक्षपात को बढ़ावा दे सकता है।इस मामले में अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राजस्व ग्राम का नाम तटस्थ, भौगोलिक या ऐतिहासिक आधार पर ही रखा जाए, न कि किसी व्यक्तिगत, जातिगत या धार्मिक संदर्भ में।
यह आदेश न केवल इस विशेष मामले में लागू होगा, बल्कि राज्य स्तर पर ऐसे अन्य विवादों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में काम करेगा।यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में कई स्थानों पर नए राजस्व ग्राम बनाए जा रहे हैं और उनके नामकरण को लेकर विवाद उठ रहे हैं। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने इसी तरह के मामलों में सख्त राय व्यक्त की है, जैसे बाड़मेर के अमरगढ़ और सगतसर गांवों के नामकरण को असंवैधानिक करार देते हुए।
यह निर्णय ग्रामीण क्षेत्रों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और कानूनी प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। याचिकाकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने अदालत के इस फैसले का स्वागत किया है, जबकि संबंधित विभागों को अब नियमों के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।