खैरथल-तिजारा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: फॉर्च्यूनर से बरामद हुए डेढ़ करोड़ रुपये कैश, दिल्ली निवासी आरोपी हिरासत में
खैरथल-तिजारा जिले की ततारपुर पुलिस ने दिल्ली नंबर की फॉर्च्यूनर गाड़ी से करीब डेढ़ करोड़ रुपये कैश बरामद किया। दिल्ली निवासी शील जैन को हिरासत में लिया गया, जिसने जमीन खरीदने के लिए पैसे लाने का दावा किया। IPS नेहा मीना और थानाधिकारी महावीर सिंह शेखावत की टीम ने छापेमारी की। सात पुलिसकर्मियों ने साढ़े चार घंटे तक हाथ से नोट गिने। पुलिस कैश के स्रोत की जांच कर रही है।
राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले में पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। ततारपुर थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर दिल्ली नंबर की एक फॉर्च्यूनर गाड़ी से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की नकदी बरामद की है। इस कार्रवाई में दिल्ली निवासी शील जैन को हिरासत में लिया गया है।
घटना का विवरण
पुलिस को विश्वसनीय सूचना मिली थी कि दिल्ली रजिस्ट्रेशन नंबर वाली एक लग्जरी गाड़ी (फॉर्च्यूनर) में भारी मात्रा में कैश लेकर कोई व्यक्ति जिले में आ रहा है। इस सूचना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए IPS नेहा मीना (जो संभवतः जिले में उच्च पद पर तैनात हैं) और ततारपुर थानाधिकारी महावीर सिंह शेखावत के नेतृत्व में पुलिस टीम ने छापेमारी की।टीम ने गाड़ी को रोका और गहन तलाशी ली। जांच में गाड़ी से कुल लगभग 1.5 करोड़ रुपये (डेढ़ करोड़) नकद बरामद हुए। ये नोट विभिन्न डिनॉमिनेशन के थे और बैगों में भरे हुए थे।
आरोपी का बयान
शुरुआती पूछताछ में आरोपी शील जैन (दिल्ली निवासी) ने दावा किया कि वह जमीन का सौदा करने के लिए इतनी बड़ी राशि लेकर आया था। उसने कहा कि यह रकम जमीन खरीदने के लिए वैध तरीके से लाई गई है। हालांकि, पुलिस इस दावे की गहन जांच कर रही है और कैश के स्रोत, लेन-देन के दस्तावेज तथा मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य किसी गैरकानूनी गतिविधि से जुड़ाव की पड़ताल जारी है।
नोट गिनने में पुलिस की मेहनत
बरामद राशि इतनी बड़ी थी कि नोट गिनने की कोई मशीन उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में पुलिस की टीम ने हाथ से ही नोट गिनने का काम किया। सात पुलिसकर्मियों ने लगातार साढ़े चार घंटे तक एक-एक नोट गिनकर पूरी रकम का हिसाब लगाया। यह मेहनत और समर्पण पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
पुलिस ने आरोपी शील जैन को हिरासत में ले लिया है और फॉर्च्यूनर गाड़ी को भी जब्त कर लिया है। मामले में आगे की जांच जारी है, जिसमें कैश के स्रोत, टैक्स संबंधी अनुपालन, और संभावित अवैध लेन-देन की जांच शामिल है। यदि आवश्यक हुआ तो आयकर विभाग या प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी एजेंसियों को भी शामिल किया जा सकता है।