चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए FDI नियमों में ढील: कैबिनेट ने 8.8 लाख करोड़ की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने चीन समेत भारत से जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों के लिए एफडीआई नियमों में ढील देने का बड़ा फैसला लिया है। साथ ही कैबिनेट ने 8.8 लाख करोड़ रुपये की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और जल जीवन मिशन के विस्तार को भी मंजूरी दी है।

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
March 10, 2026 • 5:27 PM  12
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चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए FDI नियमों में ढील: कैबिनेट ने 8.8 लाख करोड़ की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को दी मंजूरी
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चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए FDI नियमों में ढील: कैबिनेट ने 8.8 लाख करोड़ की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने चीन सहित भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में ढील देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत और चीन के बीच बढ़ता व्यापार घाटा और वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव लगातार चर्चा में हैं।

2020 के ‘प्रेस नोट-3’ में दी गई राहत

सरकार ने 2020 में जारी ‘प्रेस नोट-3’ के प्रावधानों को आसान बनाया है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने के लिए यह नियम लागू किया गया था। इसके तहत भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों—चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान—से आने वाले किसी भी निवेश के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी।

यह नियम जून 2020 में Galwan Valley में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद और भी सख्ती से लागू किया गया था। उसी दौर में भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए TikTok, WeChat और UC Browser सहित 200 से अधिक चीनी मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था।

8.8 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी

एफडीआई नियमों में ढील के साथ ही केंद्र सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए भी बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने जानकारी दी कि ‘स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर एंड कनेक्टिविटी इन्वेस्टमेंट एजेंडा 2024’ के तहत कैबिनेट ने कुल 8.8 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

इन परियोजनाओं में रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, विमानन और ग्रामीण जल आपूर्ति जैसे प्रमुख सेक्टर शामिल हैं, जिनसे देश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

जल जीवन मिशन को 2028 तक बढ़ाया गया

कैबिनेट ने ‘Jal Jeevan Mission’ को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है। इसके लिए 8.7 लाख करोड़ रुपये के बड़े बजट का प्रावधान किया गया है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार आएगा।

कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए बड़े फैसले

सरकार ने परिवहन और कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कई अहम परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

एविएशन सेक्टर:
Madurai Airport को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित करने का फैसला लिया गया है, जिससे दक्षिण भारत में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

रोड इंफ्रास्ट्रक्चर:
Noida International Airport और फरीदाबाद सेक्शन को जोड़ने वाले एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए 3,631 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके अलावा बदनावर–थांदला–टिमरवानी (NH-752D) राजमार्ग को चार लेन बनाने के लिए 3,839 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

रेलवे परियोजनाएं:
रेल यातायात की भीड़ कम करने और माल ढुलाई को तेज करने के लिए संतरागाछी–खड़गपुर के बीच चौथी रेल लाइन के लिए 2,905 करोड़ रुपये और सैंथिया–पाकुड़ के बीच चौथी रेल लाइन के लिए 1,569 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।

भारत-चीन व्यापार के आंकड़े

भले ही निवेश में चीन की हिस्सेदारी कम रही हो, लेकिन दोनों देशों के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है।

  • अप्रैल 2000 से दिसंबर 2021 के बीच भारत में कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में चीन की हिस्सेदारी केवल 0.43% (2.45 अरब डॉलर) रही।

  • वर्ष 2024-25 में चीन से भारत का आयात 11.52% बढ़कर 113.45 अरब डॉलर हो गया।

  • इसी अवधि में भारत का निर्यात 14.5% घटकर 14.25 अरब डॉलर रहा।

  • चालू वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल–जनवरी) के दौरान भारत का चीन को निर्यात 38.37% बढ़कर 15.88 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 13.82% बढ़कर 108.18 अरब डॉलर पहुंच गया।

  • इस दौरान भारत का व्यापार घाटा 92.3 अरब डॉलर दर्ज किया गया।

कॉरपोरेट सेक्टर से जुड़े अन्य फैसले

कैबिनेट ने कॉरपोरेट सेक्टर को राहत देने के लिए दो महत्वपूर्ण विधेयकों को भी मंजूरी दी है। इसमें इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) बिल 2025 में संशोधन शामिल है, जिससे दिवाला प्रक्रिया को अधिक तेज और पारदर्शी बनाया जाएगा। इसके अलावा कंपनियों के कामकाज को आसान बनाने के लिए कॉरपोरेट कानून संशोधन विधेयक को भी मंजूरी दी गई है।

आगे क्या असर होगा

एफडीआई नियमों में ढील को सरकार का बड़ा आर्थिक कदम माना जा रहा है। इससे भारत में विदेशी निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है और तकनीकी व पूंजीगत क्षेत्रों में निवेश बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सरकार की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें वह भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच आर्थिक विकास, सप्लाई चेन मजबूती और घरेलू उद्योगों के विस्तार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

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