खेजड़ी बचाने के लिए कानून बनाएगी राजस्थान सरकार: जोगाराम पटेल की अध्यक्षता में कमेटी गठित, एक महीने में ड्राफ्ट सौंपेगी
राजस्थान सरकार ने राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण के लिए विशेष कानून लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कानून मंत्री जोगाराम पटेल की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय कमेटी गठित की गई है, जिसमें राजस्व मंत्री हेमंत मीणा, वन मंत्री संजय शर्मा सहित विधि विशेषज्ञ शामिल हैं। कमेटी अन्य राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर स्टेकहोल्डर्स की राय लेगी और एक महीने में ड्राफ्ट सौंपेगी। यह कदम सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए खेजड़ी कटाई के विरोध और पर्यावरण प्रेमियों के आंदोलन के बाद उठाया गया है। वर्तमान में केवल कृषि भूमि पर कटाई नियमित है, नया कानून सभी भूमियों पर कठोर प्रावधान लाएगा।
राजस्थान सरकार राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए अब एक समर्पित कानून लाने की तैयारी में जुट गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा विधानसभा में दिए गए आश्वासन के बाद, सरकार ने 'वृक्ष संरक्षण अधिनियम' (या खेजड़ी संरक्षण अधिनियम) का प्रारूप तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय 6 सदस्यीय समिति का गठन किया है।
समिति का गठन और सदस्य
मंत्रिमंडल सचिवालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस समिति की अध्यक्षता कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल कर रहे हैं। समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल हैं: राजस्व मंत्री हेमंत मीणा,वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा। प्रमुख शासन सचिव (विधि) राघवेंद्र काछवाल (जो समिति के सदस्य-सचिव भी होंगे, क्योंकि प्रशासनिक विभाग राजस्व विभाग है),अतिरिक्त महाधिवक्ता महावीर विश्नोई,राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता कुणाल विश्नोई,समिति का मुख्य कार्य खेजड़ी सहित महत्वपूर्ण वृक्षों के संरक्षण के लिए एक मजबूत और प्रभावी कानून का ड्राफ्ट तैयार करना है।
समिति के कार्य और समयसीमा
समिति निम्नलिखित बिंदुओं पर काम करेगी: अन्य राज्यों में लागू वृक्ष संरक्षण कानूनों का तुलनात्मक अध्ययन।विभिन्न स्टेकहोल्डर्स (पर्यावरण प्रेमी, किसान, विश्नोई समाज, सौर ऊर्जा कंपनियां आदि) की राय लेना।वृक्ष संरक्षण से संबंधित न्यायिक निर्णयों और मौजूदा प्रावधानों का विश्लेषण।एक महीने के अंदर ड्राफ्ट तैयार कर सरकार को सौंपना।ड्राफ्ट सौंपे जाने के बाद, सरकार इसे विधि विशेषज्ञों की राय लेकर आगे बढ़ाएगी और विधानसभा में पेश करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।समिति गठन के साथ ही सोमवार (9 मार्च 2026 से पहले की बैठक) को मंत्री जोगाराम पटेल के निवास पर इसकी पहली बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें अन्य राज्यों के कानूनों पर विस्तृत चर्चा हुई।
मौजूदा स्थिति और नए कानून की आवश्यकता
वर्तमान में राजस्थान में केवल कृषि भूमि पर पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति की जरूरत होती है, और अवैध कटाई पर काश्तकारी कानून में जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन गैर-कृषि भूमियों (आवंटित, रूपांतरित, अधिग्रहीत, आबादी वाली आदि) पर कोई सख्त नियम नहीं हैं।नया कानून इन सभी प्रकार की भूमियों पर लागू होगा। इसमें:प्राधिकृत अधिकारी से पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।केवल न्यूनतम आवश्यक पेड़ ही हटाए जा सकेंगे।खासतौर पर खेजड़ी के पेड़ों की कटाई पर कठोर रोक और सजा के प्रावधान होंगे।
आंदोलन और पृष्ठभूमि
यह कदम मुख्य रूप से बीकानेर, फलोदी, जोधपुर और अन्य मरुस्थलीय जिलों में सौर ऊर्जा संयंत्रों (सोलर प्लांट्स) की स्थापना के लिए हजारों खेजड़ी पेड़ों की कटाई के विरोध में हुआ। पर्यावरण प्रेमियों और विश्नोई समाज के संतों ने 11 दिनों तक महापड़ाव और अनशन किया था।12 फरवरी 2026 को सरकार और संतों के बीच वार्ता के बाद राजस्व विभाग ने पूरे राजस्थान में खेजड़ी की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में खेजड़ी को "राजस्थान का कल्पवृक्ष" बताते हुए विशेष कानून लाने का वादा किया था।
खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है, जो मरुस्थल में जीवनदायिनी मानी जाती है। यह न केवल पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ी हुई है। सरकार का यह प्रयास पर्यावरण संरक्षण, सौर ऊर्जा विकास और जनभावनाओं के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।