फिर टूटेगी कांग्रेस? राज्यसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी की करीबी पर उठे सवाल, बीजेपी ने बढ़ाई सक्रियता
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब पूरी तरह से राजनीतिक सियासत का केंद्र बन चुका है। 18 जून को होने वाले मतदान से पहले बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों में हलचल तेज हो गई है।
इस चुनाव में बीजेपी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, जबकि कांग्रेस अपने भीतर चल रहे असंतोष और संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर चिंतित दिखाई दे रही है। यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने विधायकों की बैठक तक बुलानी पड़ रही है ताकि पार्टी एकजुट रह सके।
बीजेपी की मजबूत रणनीति और तीसरे उम्मीदवार की चर्चा
बीजेपी के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल है, जिससे उसकी दो सीटें लगभग सुरक्षित मानी जा रही हैं। इसके अलावा पार्टी तीसरे उम्मीदवार को उतारने पर भी विचार कर रही है। पार्टी नेताओं के अनुसार, अगर रणनीति सही बैठती है तो तीसरी सीट पर भी जीत हासिल की जा सकती है।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि पार्टी का संगठन और विधायकों की एकजुटता उन्हें इस चुनाव में मजबूत स्थिति में रखती है।
कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष से बढ़ी मुश्किलें
कांग्रेस के पास संख्या बल के आधार पर एक सीट सुरक्षित मानी जा रही है, लेकिन दूसरी सीट को लेकर पार्टी के भीतर चिंता साफ नजर आ रही है। पार्टी के कुछ विधायक और नेता उम्मीदवार चयन से खुश नहीं हैं।
पूर्व लोकसभा सांसद मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि उनका स्थानीय नेताओं से संपर्क कमजोर रहा है, जिससे चुनाव में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ सकता है।
क्रॉस वोटिंग का पुराना डर फिर आया सामने
मध्य प्रदेश की राजनीति में क्रॉस वोटिंग और बगावत कोई नई बात नहीं है। साल 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत के बाद कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था और सरकार गिर गई थी। इसके बाद भी कई मौकों पर कांग्रेस को अपने ही विधायकों से झटका लग चुका है।
इन्हीं पुराने अनुभवों की वजह से इस बार भी कांग्रेस नेतृत्व सतर्क है और हर विधायक पर नजर बनाए हुए है।
राजनीतिक समीकरण और आगे की चुनौती
राज्यसभा चुनाव में कुल 230 विधानसभा सीटों के आधार पर वोटिंग होगी, जहां जीत के लिए जरूरी आंकड़ा 58 वोट का है। बीजेपी इस गणित में मजबूत स्थिति में है, जबकि कांग्रेस सीमित वोटों के साथ रणनीति पर निर्भर है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ सीट जीतने का नहीं बल्कि पार्टी की अंदरूनी एकता की भी परीक्षा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कांग्रेस अपनी एकजुटता बचा पाती है या नहीं।