मंत्री विश्नोई बोले- लंबित मामलों का होगा समाधान, भाटी ने कहा- जनता के लिए संघर्ष जारी... 55 दिन बाद खत्म हुआ गिरल मजदूरों का धरना
बाड़मेर के गिरल गांव में 55 दिनों से जारी मजदूरों का आंदोलन शुक्रवार देर रात खत्म हो गया। मंत्री के.के. विश्नोई, विधायक रविंद्र सिंह भाटी और श्रमिक प्रतिनिधियों के बीच हुई वार्ता में विभिन्न मांगों पर सहमति बनी।
बाड़मेर जिले के गिरल गांव में पिछले 55 दिनों से जारी मजदूरों का आंदोलन आखिरकार शुक्रवार देर रात समाप्त हो गया। सर्किट हाउस में आयोजित अहम बैठक में राजस्थान सरकार के मंत्री के.के. विश्नोई, पूर्व मंत्री एवं किसान प्रदेशाध्यक्ष सहित जनप्रतिनिधियों और मजदूर प्रतिनिधियों के बीच करीब एक घंटे तक चली वार्ता के बाद विभिन्न मांगों पर सहमति बन गई। इसके साथ ही लंबे समय से जारी धरना खत्म करने की घोषणा कर दी गई और शनिवार से मजदूरों के काम पर लौटने का रास्ता साफ हो गया।
यह आंदोलन स्थानीय रोजगार, मजदूरों के अधिकारों और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा था। समझौते के बाद क्षेत्र में राहत और संतोष का माहौल देखने को मिला।
55 दिन बाद बनी सहमति
गिरल लिग्नाइट माइंस क्षेत्र में स्थानीय श्रमिक, ड्राइवर और ग्रामीण 9 अप्रैल से धरने पर बैठे हुए थे। उनका आरोप था कि जमीन अधिग्रहण के समय स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन समय के साथ स्थानीय युवाओं की अनदेखी की जाने लगी। इसी को लेकर मजदूरों और ग्रामीणों ने आंदोलन शुरू किया था।
शुक्रवार रात हुई वार्ता में श्रमिकों की विभिन्न मांगों पर सकारात्मक चर्चा हुई और समाधान का भरोसा मिलने के बाद आंदोलन समाप्त करने पर सहमति बनी।
मंत्री के.के. विश्नोई ने दिया आश्वासन
बैठक के बाद मंत्री के.के. विश्नोई ने कहा कि मजदूरों की कई मांगें उचित हैं और वर्षों से लंबित पड़े मामलों का चरणबद्ध तरीके से समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कई मुद्दे पिछले तीन दशकों से लंबित थे, जिन्हें अब प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और विकास कार्यों को बढ़ावा देने के लिए 34 हजार पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही सीएसआर फंड के माध्यम से स्कूलों और अन्य स्थानीय विकास कार्यों को भी गति दी जाएगी।
मजदूर यूनियन ने खत्म की हड़ताल
धरने से जुड़े पूर्व नगर परिषद चेयरमैन बलराम प्रजापत ने बताया कि मजदूर यूनियन और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर सरकार और भाजपा पदाधिकारियों के साथ सकारात्मक चर्चा हुई। सभी प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनने के बाद धरना समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने कहा कि अब किसी प्रकार का विवाद नहीं है और शनिवार से सभी श्रमिक, ड्राइवर और कर्मचारी अपने-अपने कार्यस्थलों पर लौट जाएंगे।
विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने जताया संतोष
शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि मजदूरों के अधिकारों और हितों की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई चर्चा सकारात्मक रही और श्रमिकों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी है।
भाटी ने कहा कि जनता के हितों के लिए उनका संघर्ष भविष्य में भी जारी रहेगा और किसी भी समस्या को अनदेखा नहीं किया जाएगा।
संवाद की कमी बनी थी विवाद की वजह
मंत्री के.के. विश्नोई ने कहा कि कई छोटी-छोटी समस्याएं समय के साथ बढ़ती गईं और अंततः आंदोलन का रूप ले लिया। उन्होंने माना कि संवाद की कमी के कारण समाधान में देरी हुई, लेकिन अब सभी पक्षों ने मिलकर रास्ता निकाल लिया है।
उन्होंने बताया कि करीब डेढ़ महीने बाद फिर से समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी और यदि कोई मुद्दा शेष रह जाता है तो उसका भी समाधान किया जाएगा।
मजदूरों की प्रमुख मांगें
- 8 घंटे की ड्यूटी लागू की जाए।
- स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए।
- मजदूरों को उचित वेतन दिया जाए।
- धरने के दौरान रुका हुआ बकाया वेतन जारी किया जाए।
- बोनस एक्ट 1965 के तहत बोनस दिया जाए।
- श्रमिकों के लिए चाय-नाश्ते एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जाए।
क्यों शुरू हुआ था आंदोलन?
गिरल और थुम्बली क्षेत्र में राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) द्वारा लिग्नाइट खनन का कार्य किया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप था कि भूमि अधिग्रहण के समय रोजगार देने के वादे किए गए थे, लेकिन बाद में स्थानीय लोगों को पर्याप्त अवसर नहीं मिले।
इसी मुद्दे को लेकर किसान, मजदूर, ड्राइवर और ग्रामीण लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। आंदोलन के चलते क्षेत्र में उत्पादन और संचालन पर भी असर पड़ा था।
क्या है RSMML?
राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (RSMML) राजस्थान सरकार का एक सार्वजनिक उपक्रम (PSU) है, जो राज्य में रॉक फॉस्फेट, लिग्नाइट, जिप्सम और लाइमस्टोन के खनन का कार्य करती है।
गिरल लिग्नाइट माइंस बाड़मेर जिले के गिरल और थुम्बली गांव में स्थित है। वर्ष 1994 में शुरू हुई यह खदान राजस्थान की पहली आधुनिक ओपनकास्ट लिग्नाइट खदान मानी जाती है। यहां से निकाला गया लिग्नाइट गिरल लिग्नाइट पावर प्लांट को ईंधन के रूप में उपलब्ध कराया जाता है।