जंतर-मंतर से CJP का ऐलान: शिक्षा मंत्री नहीं हटे तो अगले शनिवार फिर होगा बड़ा प्रदर्शन
NEET पेपर लीक विवाद को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया।
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े कथित पेपर लीक मामले को लेकर शनिवार को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रहा। पार्टी ने सरकार को पांच दिन का समय देते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो 13 जून को फिर से बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
जंतर-मंतर पर जुटे कार्यकर्ता
शनिवार सुबह से ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा शुरू हो गया था। विरोध प्रदर्शन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
कार्यक्रम के लिए प्रशासन की ओर से शाम 5 बजे तक अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रदर्शन निर्धारित समय से पहले ही समाप्त हो गया। दोपहर करीब 3 बजे प्रमुख चेहरों के रवाना होने के बाद कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा कर दी गई।
अमेरिका से सीधे पहुंचे अभिजीत दीपके
प्रदर्शन में शामिल होने के लिए अभिजीत दीपके शनिवार सुबह अमेरिका से सीधे दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट से निकलने के बाद वह बिना किसी अन्य कार्यक्रम के सीधे जंतर-मंतर पहुंचे और आंदोलन में शामिल हुए।
धरनास्थल पर उनके हाथ में भारतीय संविधान की प्रति और डॉ. भीमराव अंबेडकर की आत्मकथा देखी गई। हालांकि कार्यक्रम के दौरान उनकी तबीयत कुछ खराब हो गई, जिसके बाद उन्हें विश्राम करना पड़ा।
‘युवाओं के मुद्दे चर्चा से बाहर’
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि देश में रोजगार, शिक्षा और युवाओं के भविष्य जैसे गंभीर मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है।
उन्होंने कहा कि अक्सर राजनीतिक बहसें ऐसे विषयों की ओर मोड़ दी जाती हैं, जिनसे युवाओं की वास्तविक समस्याएं पीछे छूट जाती हैं। दीपके ने सवाल उठाया कि समाज को लगातार धार्मिक और सामुदायिक बहसों में उलझाने से युवाओं को रोजगार या बेहतर शिक्षा के कितने अवसर मिले हैं।
उन्होंने कहा कि कई लोग धरना-प्रदर्शन को बेअसर मानते हैं, लेकिन ऐसे आंदोलन लोकतंत्र में जनता की भागीदारी और जागरूकता का प्रतीक होते हैं।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
अभिजीत दीपके ने कहा कि NEET जैसे महत्वपूर्ण परीक्षा विवादों ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर किया है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का विरोध नहीं, बल्कि शिक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा है।
सोनम वांगचुक ने उठाए शिक्षा सुधार के मुद्दे
प्रदर्शन में प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि केवल पेपर लीक या परीक्षा विवादों तक चर्चा सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है।
वांगचुक ने सुझाव दिया कि जनप्रतिनिधियों और सरकारी वेतन पाने वाले अधिकारियों के बच्चों के लिए सरकारी स्कूलों में पढ़ाई अनिवार्य की जानी चाहिए। उनके अनुसार, इससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में वास्तविक सुधार देखने को मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि जहां भी व्यवस्था में कमियां हों, वहां नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठानी चाहिए।
13 जून को फिर हो सकता है प्रदर्शन
प्रदर्शन के अंत में CJP नेताओं ने घोषणा की कि यदि अगले पांच दिनों में उनकी मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलती है तो 13 जून को जंतर-मंतर या किसी अन्य स्थान पर बड़ा आंदोलन आयोजित किया जाएगा।
पार्टी का कहना है कि उनका संघर्ष निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली के लिए जारी रहेगा।