महाराणा प्रताप पर बयान विवाद पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने मांगी माफी, कहा—भावना आहत हुई तो क्षमा चाहता हूं.

पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने उदयपुर में महाराणा प्रताप को लेकर दिए गए बयान पर हुए विवाद के बाद माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों को गलत संदर्भ में लिया गया और यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे क्षमा चाहते हैं। बयान के बाद उन्हें धमकियां भी मिलने की जानकारी सामने आई, जिस पर सुरक्षा बढ़ाई गई।

Dec 29, 2025 - 19:28
महाराणा प्रताप पर बयान विवाद  पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने मांगी माफी, कहा—भावना आहत हुई तो क्षमा चाहता हूं.

उदयपुर:- पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया द्वारा महाराणा प्रताप को लेकर दिए गए एक बयान के बाद शुरू हुआ विवाद अब माफी तक पहुंच गया है। बढ़ते विरोध और तीखी प्रतिक्रियाओं के बीच राज्यपाल कटारिया ने सार्वजनिक रूप से खेद प्रकट करते हुए कहा कि यदि उनके शब्दों से किसी की भावना आहत हुई है तो वे उसके लिए क्षमा चाहते हैं।

दरअसल, उदयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए भाषण में महाराणा प्रताप को लेकर इस्तेमाल किए गए एक वाक्यांश को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस बयान को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजपूत समाज में नाराजगी देखी गई। मामला इतना बढ़ा कि राज्यपाल को जान से मारने की धमकियां तक मिलने की खबर सामने आई।

विवाद बढ़ने के बाद राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने सफाई देते हुए कहा कि उनके पूरे भाषण को संदर्भ से अलग करके देखा गया है। उन्होंने अपील की कि लोग उनके भाषण को शुरू से अंत तक सुनें और उसके भाव को समझें। कटारिया ने स्पष्ट किया कि महाराणा प्रताप उनके लिए सदैव राष्ट्र गौरव और स्वाभिमान के प्रतीक रहे हैं और उनका अपमान करने का कोई इरादा नहीं था।

कटारिया ने कहा कि भाषण के दौरान बोले गए शब्दों को यदि किसी ने गलत अर्थ में लिया है या उससे किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वह इसके लिए दिल से क्षमा चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महाराणा प्रताप जैसे महान योद्धा के प्रति उनके मन में अपार सम्मान है और वे उनके आदर्शों से प्रेरणा लेते हैं।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल देखी गई। विपक्षी दलों ने बयान को लेकर आलोचना की, वहीं समर्थकों का कहना है कि बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। प्रशासन ने राज्यपाल को मिली धमकियों को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है।

फिलहाल, राज्यपाल की माफी के बाद मामला शांत होने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि कुछ संगठनों ने अभी भी औपचारिक स्पष्टीकरण की मांग की है। यह विवाद एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि ऐतिहासिक और संवेदनशील विषयों पर सार्वजनिक मंच से बोलते समय शब्दों के चयन को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है।