कोटा में युवती ने फंदा लगाकर की आत्महत्या: सुसाइड नोट में लिखा- "मेरी सोच ही खराब हो गई, रोज-रोज हिम्मत टूट जाती है"
कोटा के रानपुर इलाके में 27 वर्षीय टीना राठौर ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा कि उनकी खराब सोच और ओवरथिंकिंग उन्हें जीने नहीं दे रही थी, 2 महीने से परेशान थीं, नींद नहीं आ रही थी। पति और ससुराल की कोई गलती नहीं बताई, लेकिन भाई ने ससुराल में छोटी-मोटी झगड़ों और दूसरी बेटी के जन्म के बाद परेशानी का जिक्र किया। छोटी बेटी 2 महीने की थी। पुलिस जांच जारी।
कोटा, राजस्थान: शिक्षा नगरी के नाम से मशहूर कोटा में एक बार फिर एक दर्दनाक घटना ने सबको झकझोर दिया है। रानपुर थाना क्षेत्र में रहने वाली 27 वर्षीय टीना राठौर ने गुरुवार शाम करीब 6 बजे घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटनास्थल पर एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें टीना ने अपनी मानसिक स्थिति का विस्तार से जिक्र किया है। नोट में उन्होंने स्पष्ट लिखा कि उनकी खराब सोच उन्हें जीने नहीं दे रही थी, और किसी की कोई गलती नहीं है।
घटना का विवरण
रानपुर थाना के एसआई भीम सिंह के अनुसार, टीना राठौर रानपुर की निवासी थीं। गुरुवार शाम उन्होंने आत्महत्या की। पोस्टमॉर्टम शुक्रवार को न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल की मोर्चरी में करवाया गया। सुसाइड नोट में उन्होंने निजी कारणों से परेशान होने और मौत को गले लगाने की बात कही है।
टीना के पति जॉनी राठौर ने बताया कि उनकी एक छोटी-सी खल-चूरी की दुकान है। गुरुवार दोपहर 2 बजे टीना ने उन्हें चाय बनाकर पिलाई। उसके बाद उन्होंने बड़ी बेटी को तैयार किया, क्योंकि पिता कनवास जा रहे थे। जॉनी दुकान पर चले गए। घर पर टीना और उनकी 2 महीने की छोटी बेटी ही थीं। शाम करीब 6 बजे जब जॉनी घर लौटे, तो चाची ने बताया कि टीना गेट नहीं खोल रही। जॉनी ने आवाज लगाई, तब छोटी बेटी रोने लगी। उनके चचेरे भाई मनीष ने पड़ोस के मकान की छत से सीढ़ियां लगाकर घर में प्रवेश किया। वहां टीना फंदे से लटकी मिलीं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। जॉनी ने कहा कि घर में कोई तनाव वाली बात नहीं थी।
सुसाइड नोट का पूरा विवरण
टीना ने सुसाइड नोट में लिखा:"मुझे माफ कर देना सब लोग, मैं अपनी मर्जी से मर रही हूं। किसी की कोई गलती नहीं है। मेरी सोच ही खराब हो गई। मेरी सोच मुझे जीने नहीं दे रही। मरने का कभी सोचा नहीं था। 8 दिन से नींद भी नहीं आ रही। 2 महीने से खुद से ही परेशान हो गई हूं। हर चीज में ज्यादा सोचने लग गई। मरने की सोच-सोच कर इतना परेशान हो गई कि नींद में हाथ-पैर धूजने लग गए। मेरे पति और ससुराल वालों की कोई गलती नहीं है। मेरे पति तो इतने अच्छे हैं कि मेरा और बच्चों का बहुत ध्यान रखा, पर मेरी सोच मुझे जीने नहीं दे रही। मैंने बहुत हिम्मत की, जीने पर रोज-रोज हिम्मत टूट जाती है।"
यह नोट मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या की ओर इशारा करता है, जहां ओवरथिंकिंग और अनिद्रा ने उन्हें इतना परेशान कर दिया कि उन्होंने यह कदम उठाया।
पीहर पक्ष के आरोप और भाई का बयान
टीना के बड़े भाई मनीष ने बताया कि टीना की शादी 5 साल पहले हुई थी। उनकी बड़ी बेटी 4 साल की और छोटी बेटी सिर्फ 2 महीने की है। कुछ महीनों से टीना परेशान लग रही थीं, लेकिन उन्होंने कोई खास बात नहीं बताई। दूसरी बेटी के जन्म के बाद से वह ज्यादा परेशान थीं। भाई ने कहा कि ससुराल में छोटी-मोटी बातों पर झगड़ा होता रहता था। उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है। सुसाइड नोट में इच्छा से मरने की बात लिखी है, लेकिन इससे लगता है कि उन्हें किसी तरह की प्रताड़ना मिल रही थी। टीना 3-4 दिन में फोन पर बात करती थीं।
मानसिक स्वास्थ्य का संकट
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि पोस्टपार्टम डिप्रेशन या अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं कितनी गंभीर हो सकती हैं, खासकर बेटी के जन्म के बाद समाज में बेटों की चाहत या अन्य दबावों के कारण। टीना ने खुद को दोषी ठहराया, लेकिन उनके नोट से साफ है कि वे अंदर से बहुत टूट चुकी थीं।