बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन तेज, कलश यात्रा शुरू, संत मुख्यमंत्री से मिलकर लौटे, कटाई के मामले जारी

बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन तेज हो गया है। कलश यात्रा निकाली गई जिसमें बुजुर्ग महिलाएं शामिल हुईं, एक महिला ने 52 लाख की ज्वेलरी पहनकर भाग लिया। संत समाज मुख्यमंत्री से मिलकर लौटे, आगे की रणनीति तय होगी। क्रमिक आमरण अनशन जारी, कई गांवों में खेजड़ी कटाई के मामले सामने आए। आंदोलनकारियों ने 17 फरवरी को 5 लाख लोगों के अनशन की चेतावनी दी है।

Feb 9, 2026 - 17:07
बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन तेज, कलश यात्रा शुरू, संत मुख्यमंत्री से मिलकर लौटे, कटाई के मामले जारी

बीकानेर में राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण को लेकर चल रहा खेजड़ी बचाओ आंदोलन इन दिनों जोरों पर है। पर्यावरण प्रेमी, बिश्नोई समाज और संत समाज की ओर से महापड़ाव स्थल पर लगातार प्रदर्शन हो रहा है, जिसमें क्रमिक अनशन, धरना और अब कलश यात्रा जैसी गतिविधियां शामिल हो गई हैं। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग खेजड़ी पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए विशेष कानून बनाना है, खासकर सोलर प्रोजेक्ट्स और अन्य विकास कार्यों के नाम पर हो रही अवैध कटाई को रोकना।

कलश यात्रा में महिलाओं का जोश, बुजुर्ग भी शामिल

सोमवार को बीकानेर शहर में विशाल कलश यात्रा निकाली गई। महापड़ाव स्थल से शुरू होकर केईएम रोड होते हुए कोटगेट तक पहुंचने वाली इस यात्रा में हजारों पर्यावरण प्रेमी शामिल हुए। विशेष रूप से महिलाएं कलश लेकर आगे-आगे चल रही थीं और मंगल गीत गाते हुए खेजड़ी संरक्षण का संदेश दे रही थीं। यात्रा में बुजुर्ग महिलाओं की भागीदारी भी देखने लायक थी।एक महिला ने 35 तोला सोना (लगभग 52 लाख रुपये कीमत की ज्वेलरी) पहनकर यात्रा में हिस्सा लिया और कहा, "समाज हमारे साथ है तो हमें किस बात का डर है।" यह बयान आंदोलन में समाज के मजबूत समर्थन को दर्शाता है। यात्रा के दौरान खेजड़ी बचाओ के नारे लगाए गए और कठोर कानून बनाने की मांग दोहराई गई।

संतों की जयपुर यात्रा और आगे की रणनीति

आंदोलन के संयोजक परसराम बिश्नोई ने बताया कि संत समाज की एक टीम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात के लिए जयपुर गई थी। वे सोमवार को महापड़ाव स्थल पर पहुंचे। संतों के साथ विचार-विमर्श के बाद ही आंदोलन की आगे की रूपरेखा तय की जाएगी।

परसराम बिश्नोई ने कहा कि क्रमिक आमरण अनशन लगातार जारी है। सोमवार को भी डेढ़ सौ से अधिक पर्यावरण प्रेमी क्रमिक अनशन पर बैठे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो 17 फरवरी को मुकाम मेले के दिन बीकानेर में 5 लाख से अधिक लोग क्रमिक अनशन पर बैठेंगे।

लगातार कटाई के मामले, प्रशासन पर सवाल

आंदोलन के बीच ही बीकानेर जिले के कई गांवों में खेजड़ी काटने के मामले सामने आ रहे हैं। परसराम बिश्नोई ने आरोप लगाया कि प्रशासन कुछ नहीं कर पा रहा है। हाल के दिनों में भी कई जगहों पर रात के समय खेजड़ी काटकर छिपाने या जला देने की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि सोलर प्लांट्स और अन्य परियोजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर कटाई हो रही है, जो पर्यावरण और थार मरुस्थल की पारिस्थितिकी के लिए खतरा है।खेजड़ी को राजस्थान का राज्य वृक्ष होने के साथ-साथ "कल्पवृक्ष" माना जाता है, जो रेगिस्तान में जीवनदायी भूमिका निभाता है। आंदोलन अब पूरे राजस्थान में फैल रहा है और विभिन्न जिलों में समर्थन मिल रहा है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.