करौली के सरसों के खेत में कागज के डिब्बे में फेंका गया नवजात शिशु मिला, रोने की आवाज सुनकर किसान ने बचाया
राजस्थान के करौली जिले के टोडाभीम थाना क्षेत्र के डोरावली गांव में सरसों के खेत में एक नवजात शिशु को कागज के सिरिंज कार्टन में कपड़े लपेटकर फेंक दिया गया था। किसान कृष्णगोपाल मीना को बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद उन्होंने ग्रामीणों और पुलिस को सूचित किया। बच्चे का जन्म करीब 12 घंटे पहले हुआ था, सिर पर चोट और हाथ पर खरोंच के निशान थे। बच्चे को टोडाभीम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत स्थिर है। अब उसे करौली भेजा जा रहा है और पुलिस माता-पिता की तलाश में जुटी है।
राजस्थान के करौली जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। टोडाभीम थाना क्षेत्र के डोरावली गांव के सरसों के खेत में एक नवजात बच्चे को कागज के सिरिंज वाले कार्टन (डिब्बे) में कपड़े लपेटकर फेंक दिया गया था। बच्चे के रोने की आवाज सुनकर स्थानीय किसान ने उसे बचाया और पुलिस को सूचना दी। बच्चे का जन्म करीब 12 घंटे पहले हुआ था और उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
घटना का विवरण
गुरुवार सुबह करीब 10 बजे डोरावली गांव के निवासी कृष्णगोपाल मीना अपने खेत की ओर जा रहे थे। सड़क से कुछ दूर सरसों के खेत से अचानक नवजात शिशु के रोने की आवाज सुनाई दी। पहले तो उन्हें लगा शायद कोई जानवर है, लेकिन आवाज लगातार आती रही तो वे खेत के अंदर गए और जांच करने पर देखा कि एक कागज का पुराना कार्टन (जिसमें सिरिंज या इंजेक्शन की डिब्बियां आती हैं) पड़ा है। कार्टन के अंदर कपड़े में लिपटा हुआ एक नवजात बच्चा था, जो रो रहा था।
किसान कृष्णगोपाल ने तुरंत अपने गांव वालों को फोन कर सूचना दी। थोड़ी देर में गांव की महिलाएं मौके पर पहुंचीं और बच्चे को संभाला। डोरावली में संचालित 'आमजन रिलीफ एंड गाइडेंस एसोसिएशन' संस्था के सदस्य भी पहुंचे और उन्होंने बच्चे को टोडाभीम के उपजिला अस्पताल पहुंचाया।
बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति
टोडाभीम अस्पताल के डॉक्टर लोकेश मीना ने बताया कि बच्चे का जन्म लगभग 12 से 14 घंटे पहले हुआ है। बच्चे का वजन करीब 2.4 किलोग्राम है। जांच में पाया गया कि उसके सिर पर हल्की चोट के निशान हैं, साथ ही उल्टे हाथ पर खरोंच के निशान मौजूद हैं। संभवतः फेंके जाने या कार्टन में रखते समय यह चोटें लगी हों।
डॉक्टरों ने बच्चे को आवश्यक टीके लगाए हैं और उसकी हालत स्थिर है। प्रारंभिक उपचार के बाद बच्चे को करौली जिला अस्पताल रेफर किया गया है, जहां चाइल्ड लाइन टीम की निगरानी में उसकी देखभाल की जा रही है। टोडाभीम एसडीएम अमन चौधरी भी अस्पताल पहुंचे और बच्चे की स्थिति की जानकारी ली।
पुलिस जांच और माता-पिता की तलाश
डीएसपी मुरारी लाल मीणा ने बताया कि बच्चे के माता-पिता की तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस ने आसपास के गांवों, अस्पतालों और नर्सिंग होम से हाल ही में हुई डिलीवरी के रिकॉर्ड मांगे हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बच्चा किसने और क्यों फेंका। बच्चे के कपड़ों या कार्टन से कोई सुराग मिलने की संभावना तलाशी जा रही है।