ईरान-इजराइल युद्ध के बीच अनिल अग्रवाल की बड़ी मांग: 'तेल, गैस और खनन को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित किया जाए' – आयात निर्भरता खत्म करने की जरूरत

ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने तेल, गैस और खनन क्षेत्र को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत 90% कच्चा तेल, 66% LPG और 50% LNG आयात करता है, जिससे सालाना 176 अरब डॉलर का आयात बिल आता है। वैश्विक अस्थिरता में आयात निर्भरता खत्म करने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाना, प्रक्रियाएं सरल करना और पर्यावरण स्वीकृतियों में लचीलापन जरूरी है। यह बाड़मेर तेल क्षेत्र के लिए भी नई उम्मीदें जगाता है।

Mar 5, 2026 - 12:17
ईरान-इजराइल युद्ध के बीच अनिल अग्रवाल की बड़ी मांग: 'तेल, गैस और खनन को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित किया जाए' – आयात निर्भरता खत्म करने की जरूरत

ईरान और इजराइल के बीच चल रहे तनाव तथा मध्य पूर्व में बढ़ती अस्थिरता के बीच वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने भारत सरकार से एक मजबूत और तत्काल अपील की है। उन्होंने तेल, गैस और खनन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित करने की मांग की है, ताकि देश विदेशी आयात पर अपनी भारी निर्भरता को कम कर सके और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम उठा सके।

अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने पोस्ट में चेतावनी दी कि आज की दुनिया में कोई भी देश स्थायी मित्र या साझेदार नहीं रहता। संकट के समय हर देश अपने हितों को सर्वोपरि मानता है। ऐसे में संसाधनों से भरपूर क्षेत्रों (जैसे ईरान) में किसी भी बड़े भू-राजनीतिक संकट का सीधा असर भारत पर पड़ता है, क्योंकि देश तेल, गैस और खनिजों के लिए बड़े पैमाने पर विदेशों पर निर्भर है।

भारत की आयात निर्भरता की चौंकाने वाली स्थिति

अनिल अग्रवाल ने आंकड़ों के जरिए स्थिति स्पष्ट की:भारत अपनी कुल आवश्यकता का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है, जो देश की परिवहन व्यवस्था का आधार है।घरेलू रसोई गैस (LPG) का करीब 66% हिस्सा विदेशों से आता है।तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का लगभग 50% आयात होता है, जिसका उपयोग स्वच्छ और कम उत्सर्जन वाले सार्वजनिक परिवहन में किया जाता है।तेल और गैस भारत के कुल आयात व्यय का सबसे बड़ा हिस्सा हैं, जो हर साल करीब 176 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाता है। तेल, गैस और सोना मिलकर देश के कुल आयात का लगभग 30% हिस्सा बनाते हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है – सरकारी खर्च और कर्ज बढ़ता है, रुपया कमजोर होता है, महंगाई बढ़ती है और इसका बोझ आम जनता पर आता है।

राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित करने की मांग और सुझाव

अग्रवाल ने सरकार से अपील की कि तेल, गैस और खनन क्षेत्र को तुरंत राष्ट्रीय प्राथमिकता का दर्जा दिया जाए। इसके लिए उन्होंने निम्नलिखित सुझाव दिए:अनुमति और प्रक्रियाओं को सरल बनाना।अनुमतियों में होने वाली देरी को कम करना।जन-सुनवाई और पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियों की प्रक्रिया में लचीलापन लाना।भरोसे पर आधारित व्यवस्था अपनाना, जहां कंपनियां नियमों के पालन का आश्वासन दें और बाद में जांच से पुष्टि हो।आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए सोच-समझकर जोखिम लेने से पीछे नहीं हटना चाहिए।उनका मानना है कि "भारत अब इंतजार नहीं कर सकता" और घरेलू उत्पादन को तेजी से बढ़ाने की जरूरत है।

बाड़मेर तेल क्षेत्र को नई उम्मीदें

यह बयान ऐसे समय में आया है जब राजस्थान के बाड़मेर जिले में वेदांता की कंपनी केयर्न ऑयल एंड गैस पिछले दो दशकों से भारत के सबसे बड़े थल-आधारित तेल क्षेत्र से उत्पादन कर रही है। मंगला, ऐश्वर्या और भाग्यम जैसे प्रमुख क्षेत्रों से निकलने वाला कच्चा तेल देश की ऊर्जा जरूरतों में महत्वपूर्ण योगदान देता है। अनिल अग्रवाल की यह मांग और बाड़मेर में बड़े निवेश की योजनाएं मिलकर भारत के ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती हैं। घरेलू उत्पादन बढ़ाने से न केवल आयात बिल कम होगा, बल्कि वैश्विक संकटों में ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.