जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी को 'राष्ट्र रत्न' सम्मान, महेंद्रसागरजी बने आचार्य: जैसलमेर में भव्य चादर महोत्सव का ऐतिहासिक समापन

जैसलमेर में आयोजित तीन दिवसीय भव्य दादागुरु श्री जिनदत्त सूरि चादर महोत्सव का समापन ऐतिहासिक ढंग से हुआ। गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी को 'राष्ट्र रत्न' सम्मान और 'सूरि सम्राट' उपाधि से नवाजा गया। उपाध्याय श्री महेंद्रसागरजी को आचार्य पद प्रदान किया गया, जबकि साध्वी शुभ्रदा श्रीजी को गणिनी पद मिला। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने फोन पर शुभकामनाएं दीं। धार्मिक पुस्तकों का विमोचन हुआ और आगामी चातुर्मास कार्यक्रम घोषित किया गया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यह आयोजन आस्था का प्रतीक बना।

Mar 8, 2026 - 18:15
जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी को 'राष्ट्र रत्न' सम्मान, महेंद्रसागरजी बने आचार्य: जैसलमेर में भव्य चादर महोत्सव का ऐतिहासिक समापन

स्वर्णनगरी जैसलमेर की पावन धरा पर 6 से 8 मार्च 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय दादागुरु श्री जिनदत्त सूरि चादर महोत्सव आज अपने भव्य और भावपूर्ण समापन के साथ इतिहास रच गया। यह महोत्सव जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ परंपरा की एक महत्वपूर्ण घटना साबित हुआ, जिसमें आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में आयोजित इस उत्सव में कई ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुए, जिनमें गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी महाराज को 'राष्ट्र रत्न' की उपाधि से सम्मानित किया जाना और उपाध्याय प्रवर श्री महेंद्रसागरजी को आचार्य पद प्रदान करना प्रमुख रहे।

राष्ट्र रत्न सम्मान और सूरि सम्राट उपाधि से अलंकृत हुए आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी

महोत्सव के अंतिम दिन एक भावुक और गौरवपूर्ण क्षण तब आया जब महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी महाराज को 'राष्ट्र रत्न' की प्रतिष्ठित उपाधि से सम्मानित किया। सम्मान पत्र प्रदान करते हुए मंत्री ने उनके आध्यात्मिक योगदान और जैन समाज के उत्थान में भूमिका की सराहना की।इसके साथ ही दादागुरु श्री जिनदत्त सूरि चादर महोत्सव समिति, जैसलमेर जैन ट्रस्ट तथा अन्य जुड़ी समितियों की ओर से उन्हें 'सूरि सम्राट' की उपाधि भी प्रदान की गई। यह सम्मान जैन समाज के लिए अत्यंत गौरव का विषय माना जा रहा है, क्योंकि आचार्य श्री खरतरगच्छ के युगदिवाकर और अवंति तीर्थ उद्धारक के रूप में विख्यात हैं।

उपाध्याय श्री महेंद्रसागरजी को आचार्य पद की दीक्षा

महोत्सव का सबसे ऐतिहासिक पल तब सामने आया जब पूज्य अध्यात्म योगी उपाध्याय प्रवर श्री महेंद्रसागरजी महाराज को आचार्य पद से अलंकृत किया गया। यह पद गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी द्वारा विधिवत रूप से प्रदान किया गया।इस अवसर पर देश-विदेश से आए साधु-साध्वी भगवंतों, संत-महात्माओं तथा हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। जयघोष और अभिनंदन की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने इसे चादर महोत्सव का सबसे यादगार क्षण बताया। साथ ही साध्वी शुभ्रदा श्रीजी को गणिनी पद प्रदान किया गया, जिससे खरतरगच्छ परंपरा में नई ऊर्जा का संचार हुआ।

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े की शुभकामनाएं और धार्मिक पुस्तकों का विमोचन

राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े ने दूरभाष के माध्यम से महोत्सव में अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं जैसलमेर आकर इस भव्य आयोजन में शामिल होना चाहते थे, लेकिन अपरिहार्य कारणों से संभव नहीं हो सका। राज्यपाल ने आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी को 'राष्ट्र रत्न' सम्मान मिलने पर विशेष बधाई दी और कहा कि ऐसे आयोजन राजस्थान में धर्म और अध्यात्म की भावना को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम में दो महत्वपूर्ण धार्मिक पुस्तकों का विमोचन भी हुआ:पूज्य उपाध्याय मनितप्रभ सागरजी द्वारा लिखित "द यूनिवर्सल ट्रूथ", डॉ. विद्युत्प्रभा श्रीजी की पुस्तक "गुरुदेव", चातुर्मास कार्यक्रम की घोषणा और समापन की विशेषताएं, महोत्सव के समापन पर साधु-साध्वियों के आगामी चातुर्मास प्रवास कार्यक्रम की घोषणा की गई, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया।अंत में सभी श्रद्धालुओं को चादर अभिषेक जल और वासक्षेप का वितरण किया गया। यह महोत्सव गच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी की पावन निश्रा में संपन्न हुआ, जबकि इसकी प्रेरणा स्रोत पूज्य आचार्य श्री जिनमनोज्ञ सागरजी रहे।

आयोजन समिति के प्रमुख

चेयरमैन: महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा,संयोजक: जीतो के पूर्व चेयरमैन तेजराज गोलेछा,राष्ट्रीय सचिव: पदम टाटिया,समन्वयक: प्रकाश चंद लोढ़ा,समायोजक: महेंद्र भंसाली। 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.