झुंझुनूं में साधु फतेहनाथ की आत्महत्या: सुसाइड नोट और वीडियो में लगाए गंभीर आरोप
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में पपुराना आश्रम में 30 वर्षीय साधु फतेहनाथ ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौत से पहले उन्होंने एक वीडियो और 8 पेज का सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें परिवार के सदस्यों और बगड़ योग आश्रम के विक्रमनाथ, भानी नाथ सहित सात लोगों पर लंबे समय से मारपीट व मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए। फतेहनाथ ने गुरु चंद्रनाथ के वचनों के झूठे होने का जिक्र करते हुए केंद्र-राज्य सरकार और योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। खेतड़ी थाना क्षेत्र के पपुराना गांव की पहाड़ी पर स्थित आश्रम में एक 30 वर्षीय साधु फतेहनाथ ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना सोमवार रात करीब 8 बजे की बताई जा रही है। आत्महत्या से पहले साधु ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया और आठ पेज का विस्तृत सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उन्होंने लंबे समय से चली आ रही प्रताड़ना के लिए सात लोगों को जिम्मेदार ठहराया है।
साधु की पहचान और पृष्ठभूमि मृतक साधु की पहचान फतेहनाथ (उम्र 30 वर्ष) पुत्र गिरधारी लाल, निवासी नागला नाथुसर के रूप में हुई है। वे 2021 से पपुराना की पहाड़ी पर स्थित आश्रम में धूणा लगाकर अकेले रह रहे थे। सुसाइड नोट और वीडियो में फतेहनाथ ने अपना बचपन का नाम फतेहचंद बताया। उनके अनुसार, जब वे मात्र छह महीने के थे, तभी उनके पिता गिरधारी लाल का निधन हो गया। इसके बाद उनकी बड़ी बुआ उन्हें कंचनपुर ले आईं, जहां बुआ के बेटे लक्ष्मण ने उन्हें लगातार परेशान किया। पैतृक जमीन और गहनों को लेकर भी उन्हें प्रताड़ित किया गया।
आश्रम जीवन और प्रताड़ना की शुरुआत फतेहनाथ ने 29 अप्रैल 2012 को बगड़ स्थित चंद्रनाथ योग आश्रम में प्रवेश किया। 31 मार्च 2013 को उन्हें भगवा वस्त्र प्रदान किए गए। आश्रम में विक्रम नाथ महाराज उन्हें लगातार परेशान करते थे। फतेहनाथ ने इसकी शिकायत अपने गुरु चंद्रनाथ महाराज से की, लेकिन गुरु ने केवल "जल्द समझा देने" की बात कही। विक्रम नाथ का कहना था कि "तम चढ़ाए हुए नहीं हो, इसलिए तुझे चिरा नहीं लगने देंगे।"इस प्रताड़ना से तंग आकर फतेहनाथ कुछ समय के लिए आश्रम से बाहर रहने लगे। दो महीने बाद गुरु के कहने पर वे वापस लौटे, लेकिन फिर से परेशान किए जाने पर 2021 में वे पपुराना आश्रम में अलग रहने लगे। सुसाइड नोट में उन्होंने 2022 की एक घटना का भी जिक्र किया, जब बगड़ आश्रम में गुरु से मिलने गए तो विक्रमनाथ और अन्य लोगों ने खाना खाते समय उनके साथ मारपीट की।
सुसाइड नोट में लगाए आरोप आठ पेज के सुसाइड नोट में फतेहनाथ ने स्पष्ट लिखा है कि "बाबा चंद्रनाथ के वचन झूठे हो गए।" उनके गुरु पर इन लोगों का दबाव था, जिससे उनकी जिंदगी बर्बाद हो गई। उन्होंने अपनी मौत के लिए निम्नलिखित सात लोगों को जिम्मेदार ठहराया:लक्ष्मण राम (कंचनपुर)मीरा देवी (चौकड़ी)अमृता देवी (गुरारा)सुरेश (नांगल नाथुसर)विक्रमनाथ (योग आश्रम बगड़)भानी नाथ (योग आश्रम बगड़)साध्वी ओमनाथ। फतेहनाथ ने लिखा कि बगड़ आश्रम में कई अन्य लोगों के साथ भी अन्याय हुआ है और इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने न्याय की गुहार केंद्र सरकार, राज्य सरकार और नाथ संप्रदाय के प्रमुख महंत योगी आदित्यनाथ से लगाई है।इसके अलावा, उन्होंने अपनी पैतृक संपत्ति के बारे में इच्छा जताई:अपनी हिस्से की जमीन सीताराम गौशाला (कुआं रींगस) के नाम करने की मांग।घर की जमीन पर शिवालय बनवाने की इच्छा।बहन अमृता देवी को अपनी हिस्से की जमीन न देने की स्पष्ट बात।
घटना कैसे हुई? सोमवार रात करीब 8 बजे जब कुछ ग्रामीण आश्रम के बाहर से गुजरे, तो उन्हें कमरे का दरवाजा खुला दिखा। पास जाकर देखा तो फतेहनाथ फांसी के फंदे पर लटके हुए थे। ग्रामीणों ने तुरंत खेतड़ी थाने में सूचना दी। थानाधिकारी मोहनलाल पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। शव को कब्जे में लेकर राजकीय उप जिला अस्पताल की मोर्च्यूरी में रखवाया गया। पुलिस ने सुसाइड नोट, वीडियो और अन्य सबूतों को जब्त कर लिया है।
पुलिस जांच पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जा रही है। आरोपियों से पूछताछ और आश्रम से जुड़े अन्य लोगों के बयान लिए जा रहे हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन प्राथमिक जांच में यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है।