जैसलमेर में बड़ा खुलासा: 5-10 हजार रुपये में ISI को बेच रहा था भारतीय सेना की गोपनीय जानकारी, 19 महीने से कर रहा था जासूसी
जैसलमेर के झबराराम ने 19 महीने तक हनीट्रैप और 5-10 हजार के लालच में भारतीय सेना की सीक्रेट जानकारी ISI को बेची! मोबाइल चैट से पकड़ा गया, कोर्ट ने 5 दिन रिमांड पर भेजा। सरहद पर बड़ा खतरा बेनकाब!
जयपुर/जैसलमेर, 31 जनवरी 2026: राजस्थान की सीमावर्ती जिले जैसलमेर में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने वाले एक युवक की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों को बड़ा सुराग दिया है। आरोपी झबराराम (28 वर्ष), जो पोकरण क्षेत्र के सांकड़ा (या नेहड़ान/नेवार गांव) का निवासी है, पिछले करीब 19 महीने से भारतीय सेना की संवेदनशील और गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान को भेज रहा था। बदले में उसे 5 से 10 हजार रुपये प्रति टास्क के हिसाब से छोटे-छोटे पेमेंट किए जाते थे।
राजस्थान इंटेलिजेंस ने शुक्रवार (30 जनवरी 2026) को आरोपी को जैसलमेर से गिरफ्तार किया। शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे उसे जयपुर की अदालत (एसीजेएम कोर्ट) में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने उसे 5 दिन की पुलिस रिमांड (कस्टडी) पर भेज दिया। रिमांड की अवधि 4 फरवरी तक है। इस दौरान इंटेलिजेंस टीम आरोपी से गहन पूछताछ कर और अधिक महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने की उम्मीद कर रही है।
गिरफ्तारी और जांच के प्रमुख खुलासे
एडीजी (इंटेलिजेंस) प्रफुल्ल कुमार के अनुसार, झबराराम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से पाकिस्तानी ISI के हैंडलर्स से लगातार संपर्क में था। उसके मोबाइल फोन में ISI हैंडलर्स के साथ चैट्स और अन्य सबूत मिले हैं, जो उसकी जासूसी गतिविधियों की पुष्टि करते हैं।
आरोपी को हनीट्रैप (पाकिस्तानी महिला एजेंट के जरिए फंसाया गया) और आर्थिक लालच में फंसाकर जाल में डाला गया।ISI हैंडलर्स द्वारा अलग-अलग टास्क दिए जाते थे, जिसमें भारतीय सेना की गुप्त सूचनाएं मांगी जाती थीं।सूचनाएं भेजने पर उसके बैंक अकाउंट में बार-बार छोटी राशि (5-10 हजार रुपये) ट्रांसफर की जाती थी।उसने अपने नाम से जारी सिम कार्ड का OTP पाक हैंडलर्स को देकर व्हाट्सएप एक्टिवेट करवाया, जिसका इस्तेमाल देश-विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।कुछ रिपोर्ट्स में आरोपी को ई-मित्र संचालक बताया गया है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि लंबित है। जांच में पता चला है कि वह कई हैंडलर्स से जुड़ा हो सकता है, और आगे की पूछताछ से बड़ा नेटवर्क उजागर होने की संभावना है।
पाकिस्तानी जासूस क्या-क्या जानकारी मांगते हैं?
सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जासूसों से ISI मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकार की सूचनाएं और सबूत मांगती है, जो युद्ध या तनाव के समय दुश्मन देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं:सेना की मूवमेंट और ठिकाने: सैनिकों की आवाजाही, तैनाती, सैन्य संरचना, फेंसिंग, बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) की लोकेशन, फोटो और विस्तृत जानकारी।इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण: सैन्य सड़कों, ब्रिज (अंडरब्रिज/ओवरब्रिज), सैन्य ठिकानों का नेटवर्क, तथा सीमा के पास हो रहे किसी भी निर्माण (बिल्डिंग, सड़क आदि) की डिटेल।सिविलियन और एडमिन सुविधाएं: आर्मी एरिया में स्थित स्कूल, हॉस्टल, एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग्स की फोटो और लोकेशन।अन्य महत्वपूर्ण डिटेल: मोबाइल टावरों की लोकेशन, फोटो, तथा अन्य छोटी-छोटी लेकिन रणनीतिक रूप से उपयोगी जानकारियां।एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसी हर छोटी जानकारी दुश्मन देश के लिए मूल्यवान होती है, खासकर युद्ध या बॉर्डर टेंशन के दौरान। राजस्थान जैसे सरहदी इलाकों में बीएसएफ, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मुखबिरों की सूचना पर ऐसे कई जासूसों को पकड़ चुकी हैं।