ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत ने दिखाई एयर डिफेंस की मजबूत ताकत: पोकरण में उच्च-तीव्रता अभ्यास, L-70 गनों से ड्रोन मार गिराए
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारतीय सेना ने राजस्थान के पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में दक्षिणी कमान की एयर डिफेंस ब्रिगेड द्वारा उच्च-तीव्रता अभ्यास किया। आधुनिक रडार और L-70 एंटी-एयरक्राफ्ट गनों से दुश्मन के काल्पनिक ड्रोन को इलेक्ट्रॉनिक जामिंग के बाद आसमान में ही मार गिराया गया। यह अभ्यास ड्रोन और स्वार्म हमलों से निपटने की तैयारी दर्शाता है, जिसमें BEL द्वारा अपग्रेड L-70 गन की सटीकता और तेज फायरिंग क्षमता का प्रदर्शन हुआ। सेना ने मिशन रेडी रणनीति के तहत हवाई खतरों को सेकंडों में खत्म करने की क्षमता साबित की।
ईरान और अमेरिका (साथ ही इजराइल) के बीच चल रहे बढ़ते सैन्य संघर्ष और मिसाइल-ड्रोन हमलों के वैश्विक तनाव के बीच भारतीय सेना ने अपनी हवाई सुरक्षा क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है। राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना की दक्षिणी कमान के अंतर्गत एयर डिफेंस ब्रिगेड ने हाल ही में एक उच्च-तीव्रता (high-intensity) फील्ड फायरिंग युद्धाभ्यास किया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आधुनिक हवाई खतरों—खासकर ड्रोन और स्वार्म ड्रोन हमलों—से निपटने की तैयारियों का परीक्षण करना था।
अभ्यास का संदर्भ और महत्व
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक लड़ाकू विमानों और मिसाइलों के अलावा अब सस्ते लेकिन घातक ड्रोन और स्वार्म (समूह में हमला करने वाले) ड्रोन सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं। ईरान-अमेरिका संघर्ष में ईरान द्वारा बड़े पैमाने पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल देखा जा रहा है, जिससे दुनिया भर की सेनाएं अपनी एंटी-ड्रोन और एयर डिफेंस क्षमताओं को मजबूत कर रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में भारतीय सेना ने यह अभ्यास किया, जो "मिशन रेडी" रणनीति का हिस्सा है। सेना के अधिकारी इसे महज शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि वास्तविक युद्ध स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता का प्रमाण मानते हैं।
अभ्यास में क्या हुआ?
अभ्यास के दौरान काल्पनिक दुश्मन के ड्रोन को भारतीय हवाई क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश करते हुए दिखाया गया। एयर डिफेंस यूनिट्स ने तुरंत सक्रिय होकर:पहले इलेक्ट्रॉनिक जामिंग (electronic jamming) से ड्रोन के नियंत्रण को बाधित किया।फिर आधुनिक रडार से लक्ष्य की सटीक लोकेशन ट्रैक की।अंत में एंटी-एयरक्राफ्ट गनों से सटीक फायरिंग कर ड्रोन को आसमान में ही नष्ट कर दिया।यह पूरी प्रक्रिया कुछ ही सेकंडों में पूरी हुई, जिससे साबित हुआ कि भारतीय सेना किसी भी हवाई खतरे को पलक झपकते ही पहचानकर समाप्त कर सकती है। उन्नत रडार सिस्टम ने कई किलोमीटर दूर से छोटे ड्रोन की भी पहचान की, जबकि हाई-टेक कंप्यूटर कंसोल और कंट्रोल रूम में विशेषज्ञों ने लक्ष्य की पहचान कर कमांड जारी की।
इस्तेमाल हुई प्रमुख प्रणालियां
अभ्यास में भारतीय सेना की एयर डिफेंस की कई उन्नत प्रणालियों का सफल प्रदर्शन हुआ:L-70 एंटी-एयरक्राफ्ट गन: यह अभ्यास की मुख्य हथियार रही। मूल रूप से स्वीडन की बोफोर्स कंपनी द्वारा विकसित, लेकिन भारत में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा आधुनिक अपग्रेड की गई। L-70 अब ड्रोन किलर के रूप में विशेष रूप से प्रभावी है।
प्रमुख विशेषताएं:फायरिंग दर: प्रति मिनट 240-330 राउंड।प्रभावी रेंज: 3.5 से 4 किलोमीटर।आधुनिक सेंसर: थर्मल इमेजर, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, लेजर रेंज फाइंडर।रडार समन्वय: फ्लाई-कैचर रडार और वीडियो ट्रैकिंग से कई दिशाओं से लक्ष्यों को ट्रैक कर सकती है।रात में भी सटीक निशानेबाजी की क्षमता।भारतीय सेना में सैकड़ों L-70 गन तैनात हैं, खासकर अग्रिम मोर्चों पर।आधुनिक रडार सिस्टम: छोटे और कम ऊंचाई वाले ड्रोन को भी कई किलोमीटर दूर से ट्रैक करने में सक्षम। ये एक साथ कई लक्ष्यों की निगरानी करते हैं और तुरंत अलर्ट जारी करते हैं।हाई-टेक कंट्रोल सिस्टम: लक्ष्य पहचान के बाद मिसाइल या गन को त्वरित कमांड, जिससे हवा में ही खतरा समाप्त हो जाता है।
सेना की रणनीति और भविष्य
सेना का कहना है कि हाल के वर्षों में यूक्रेन-रूस, मध्य पूर्व संघर्षों और अन्य क्षेत्रों में ड्रोन हमलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एयर डिफेंस को लगातार मजबूत किया जा रहा है। यह अभ्यास पोकरण की तपती रेत में वास्तविक युद्ध जैसे वातावरण में किया गया, जो भारतीय सेना की "मिशन रेडी" स्थिति को दर्शाता है।