हरदोई: प्रेमी संग फरार हुई चार बच्चों की मां, पति को कहां - "तुम जहर खा कर मर जाओ,मुझे फर्क नहीं पड़ता"

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद में एक दिल दहलाने वाली घटना में, चार बच्चों की मां अपने प्रेमी हाकिम के साथ फरार हो गई। पत्नी की बेवफाई और ताने- "जहर खा लो, मुझे फर्क नहीं पड़ता" से आहत 45 वर्षीय मजदूर सर्वेश ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। स्थानीय लोगों ने पुलिस थाने पर प्रदर्शन कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना परिवार, विश्वासघात और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को उजागर करती है।

Basanti Parmar
Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
August 1, 2025 • 7:11 PM  64
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हरदोई: प्रेमी संग फरार हुई चार बच्चों की मां, पति को कहां - "तुम जहर खा कर मर जाओ,मुझे फर्क नहीं पड़ता"
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1 Aug 2025
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हरदोई: प्रेमी संग फरार हुई चार बच्चों की मां, पति को कहां - "तुम जहर खा कर मर जाओ,मुझे फर्क नहीं पड़ता"

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक चार बच्चों की मां अपनी बेवफाई और बेरुखी भरे तानों से अपने पति को इस कदर तोड़ दिया कि उसने जहर खाकर अपनी जान दे दी। यह कहानी न केवल एक परिवार के टूटने की है, बल्कि प्रेम, विश्वासघात और सामाजिक संवेदनशीलता का दर्दनाक चेहरा भी सामने लाती है।

घटना का विवरण

शाहाबाद के मोहल्ला हाथा में रहने वाला 45 वर्षीय सर्वेश उर्फ लाली एक मेहनती मजदूर था, जो अपने चार बच्चों और पत्नी का पालन-पोषण अपनी मेहनत की कमाई से करता था। उसकी 20 साल की शादीशुदा जिंदगी उस वक्त बिखर गई, जब उसकी पत्नी ने मोहल्ले के ही एक युवक, हाकिम, जो दूसरे समुदाय से ताल्लुक रखता था, के साथ नाजायज रिश्ता बना लिया।कुछ समय पहले सर्वेश की पत्नी पहली बार हाकिम के साथ घर छोड़कर चली गई थी। सर्वेश ने सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों को देखते हुए अपनी पत्नी को समझा-बुझाकर वापस घर लाया। पत्नी ने वादा किया था कि वह अब हाकिम से कोई संपर्क नहीं रखेगी। लेकिन यह वादा जल्द ही टूट गया। तीन दिन पहले जब सर्वेश ने अपनी पत्नी को फिर से हाकिम से बात करते हुए पकड़ा, तो दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इस दौरान पत्नी ने सर्वेश को ताने मारते हुए कहा, "जहर खा लो, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।" यह सुनकर सर्वेश अंदर से पूरी तरह टूट गया।

पति की आत्महत्या

पत्नी के कटु शब्दों और बेवफाई से आहत सर्वेश ने बुधवार को जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर उसकी बेटी और स्थानीय लोगों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। लेकिन इलाज के दौरान सर्वेश ने दम तोड़ दिया। मरने से पहले सर्वेश ने डॉक्टरों और पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि पत्नी की बेवफाई और तानों ने उसे यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया। सर्वेश की बेटी ने भी इस बात की पुष्टि की कि उसकी मां दूसरी बार हाकिम के साथ भाग गई थी और पिता को जहर खाने के लिए उकसाया था।

सामुदायिक आक्रोश और पुलिस कार्रवाई

इस घटना ने स्थानीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया। खास तौर पर हाकिम के दूसरे समुदाय से होने के कारण मामला और संवेदनशील हो गया। गुस्साए स्थानीय लोग बड़ी संख्या में शाहाबाद पुलिस थाने पहुंचे और फरार पत्नी और हाकिम के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। लोगों ने दोनों को जेल भेजने की मांग की और इस मामले को सामाजिक सम्मान और पारिवारिक मूल्यों से जोड़कर देखा।पुलिस ने सर्वेश की बेटी और अन्य गवाहों के बयानों के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। शाहाबाद थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है और फरार पत्नी व हाकिम की तलाश की जा रही है। पुलिस ने यह भी आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस मामले की पूरी सच्चाई सामने लाई जाएगी और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

एक टूटा परिवार

सर्वेश की मौत ने उसके चार बच्चों को अनाथ छोड़ दिया। परिवार का इकलौता कमाने वाला अब इस दुनिया में नहीं है। सर्वेश की बेटी ने अपनी मां की बेवफाई और तानों को पिता की मौत का कारण बताया। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए त्रासदी है, बल्कि समाज में रिश्तों की नाजुकता और विश्वासघात के दुष्परिणामों को भी उजागर करती है।

सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलू

यह घटना कई सवाल खड़े करती है। आखिर क्यों एक महिला, जो चार बच्चों की मां और 20 साल से शादीशुदा थी, ने अपने परिवार को छोड़कर ऐसा कदम उठाया? क्या सामाजिक दबाव, व्यक्तिगत असंतोष या अन्य परिस्थितियां इसके लिए जिम्मेदार थीं? सर्वेश जैसे मेहनती और जिम्मेदार पति को अपनी पत्नी के तानों और बेवफाई ने इतना तोड़ दिया कि उसने अपनी जान दे दी। यह घटना मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक रिश्तों में संवाद की कमी जैसे गंभीर मुद्दों पर भी प्रकाश डालती है।

हरदोई की यह घटना एक दुखद और चेतावनी भरी कहानी है। यह हमें रिश्तों में विश्वास, संवाद और संवेदनशीलता की अहमियत को समझने के लिए मजबूर करती है। सर्वेश की मौत ने न केवल उसके परिवार को तोड़ दिया, बल्कि समाज को भी यह सोचने पर मजबूर किया कि आखिर ऐसी परिस्थितियां क्यों पैदा होती हैं और इन्हें रोकने के लिए क्या किया जा सकता है। पुलिस की जांच और दोषियों पर कार्रवाई का इंतजार अब पूरे क्षेत्र को है, ताकि सर्वेश के परिवार को न्याय मिल सके। 

 

Basanti Parmar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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