दौसा में सड़क पर सजी शादी का मंडप: घुमंतू गाड़िया लोहार समाज की बेटी की विदाई ने खड़े किए गंभीर सवाल

दौसा जिले के बांदीकुई में गाड़िया लोहार समाज की बेटी आरती की शादी सड़क किनारे टेंट लगाकर हुई, जहां दूल्हा सोनू सड़क के डिवाइडर पर बैठा रहा। घुमंतू जीवन और स्थायी आवास की कमी के कारण यह मजबूरी बनी। विदाई के समय दुल्हन सड़क से रोते हुए विदा हुई, जो परिवार के बजाय सरकारी योजनाओं की विफलता पर आंसू थे। समाज ने स्थायी मकान, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं की मांग की, जो विकास की पहुंच पर सवाल उठाती है।

Mar 12, 2026 - 12:28
दौसा में सड़क पर सजी शादी का मंडप: घुमंतू गाड़िया लोहार समाज की बेटी की विदाई ने खड़े किए गंभीर सवाल

राजस्थान के दौसा जिले के बांदीकुई में एक ऐसी शादी की तस्वीर सामने आई है, जिसने न केवल दिल को छू लिया बल्कि सरकारी योजनाओं, सामाजिक न्याय और विकास की पहुंच पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां घुमंतू गाड़िया लोहार समाज की एक बेटी आरती की शादी सड़क किनारे टेंट लगाकर संपन्न हुई। यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि इस समाज के लिए यह मजबूरी बन चुकी है, क्योंकि उनके पास स्थायी आवास नहीं है।

शादी का अनोखा और दर्दभरा मंजर

बांदीकुई के उपखंड (ब्लॉक) कार्यालय के ठीक सामने सड़क किनारे मंडप सजाया गया। दूल्हा सोनू (लालसोट से आया) शेरवानी पहनकर सड़क के डिवाइडर पर बैठा रहा, जबकि दुल्हन आरती टेंट के अंदर सजी-धजी बैठी रस्में निभा रही थी। पूरे रीति-रिवाजों के साथ फेरे लिए गए, लेकिन जगह थी सड़क। स्थानीय लोगों और पड़ोसियों ने आकर आशीर्वाद दिया, माहौल में खुशी थी, लेकिन विदाई के समय भावुकता चरम पर पहुंच गई।

आरती की विदाई सड़क से हुई, घर से नहीं। वह रो पड़ी, और उसका रोना सिर्फ बिदाई का नहीं था, बल्कि इस बात का था कि उसकी विदाई उसके अपने घर से नहीं, बल्कि खुले आसमान तले सड़क पर हो रही थी। परिवार के सदस्यों की आंखों में आंसू थे, क्योंकि यह मजबूरी सरकार की अनदेखी का नतीजा लग रही थी।

गाड़िया लोहार समाज की पृष्ठभूमि और मजबूरी

गाड़िया लोहार समाज खुद को महाराणा प्रताप के वंशज मानता है। ये लोग परंपरागत रूप से लोहार का काम करते हैं और घुमंतू जीवन जीते आए हैं। गाड़ी (बैलगाड़ी) पर अपना सामान लेकर घूमते हैं, इसी से इनका नाम गाड़िया लोहार पड़ा। आजादी के बाद भी ये समाज मुख्यधारा से जुड़ नहीं पाया। कई परिवार आज भी सड़क किनारे, टेंटों या अस्थायी झोपड़ियों में रहते हैं।

स्थायी मकान, भूखंड या सरकारी आवास योजना का लाभ न मिलने से शादी-ब्याह जैसे सामाजिक आयोजन भी सड़क पर ही करने पड़ते हैं। दूल्हे सोनू ने भी कहा कि अगर ससुराल में रहने के लिए मकान होता, तो शादी सड़क पर नहीं करनी पड़ती। परिवार ने सरकार से मांग की है कि आरती जैसी किसी अन्य बहन को सड़क से विदा न होना पड़े। उन्होंने स्थायी आवास, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं की मांग की है।

विकास की बड़ी विडंबना

सरकार का दावा है कि विकास अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है, प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY), अन्य कल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं। लेकिन दौसा के इस ब्लॉक कार्यालय के सामने ही यह घटना बताती है कि विकास अभी कई जगहों पर नहीं पहुंच पाया। जहां सरकारी दफ्तर है, वहीं सड़क पर शादी हो रही है, और कोई अधिकारी या प्रतिनिधि मदद के लिए नहीं पहुंचा—यह सिस्टम की विफलता को उजागर करता है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.