स्वर्णनगरी जैसलमेर में रचा गया आस्था, एकता और आध्यात्म का ऐतिहासिक संगम: दादागुरुदेव जिनदत्त सूरि चादर महोत्सव

स्वर्णनगरी जैसलमेर में 6-8 मार्च 2026 को तीन दिवसीय दादागुरुदेव श्री जिनदत्त सूरि चादर महोत्सव संपन्न हुआ। 871 वर्ष पुरानी पवित्र चादर के दर्शन, मोहन भागवत जी की उपस्थिति, सामूहिक इकतीसा पाठ और आचार्य जिनमणिप्रभ सूरि को 'सूरी सम्राट' व 'राष्ट्र रत्न' सम्मान के साथ यह आयोजन जैन-हिंदू एकता व आध्यात्मिक भक्ति का ऐतिहासिक प्रतीक बना। हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

Mar 11, 2026 - 19:12
स्वर्णनगरी जैसलमेर में रचा गया आस्था, एकता और आध्यात्म का ऐतिहासिक संगम: दादागुरुदेव जिनदत्त सूरि चादर महोत्सव

स्वर्णनगरी जैसलमेर की सुनहरी रेत और प्राचीन किले की गोद में 6 से 8 मार्च 2026 तक तीन दिवसीय दादागुरुदेव श्री जिनदत्त सूरि चादर महोत्सव ने आस्था, श्रद्धा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का एक अद्भुत एवं ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किया। गच्छाधिपति पूज्य आचार्य जिनमणिप्रभ सूरि जी महाराज की पावन निश्रा में आयोजित इस विराट आयोजन ने न केवल जैन समाज को एकजुट किया, बल्कि हिंदू-जैन परंपराओं के मिलन का भी सुंदर प्रतीक बना।

महोत्सव का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक पूज्य मोहन भागवत जी की गरिमामय उपस्थिति से हुआ, जिसे जैन और हिंदू संत परंपराओं के बीच सद्भाव एवं एकात्मता का प्रतीक माना गया। अपने उद्बोधन में मोहन भागवत जी ने दादागुरु परंपरा को भारतीय संस्कृति की एकता, समरसता और आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक बताते हुए समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और एकजुटता को मजबूत करने का आह्वान किया। उनकी उपस्थिति ने आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।

तीन दिनों तक चले इस महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु जैसलमेर पहुंचे। जैन संतों, साधु-साध्वियों, खरतरगच्छ और ओसवाल समाज के श्रद्धालुओं के साथ हिंदू संत-महात्माओं की उपस्थिति ने इसे आध्यात्मिक संगम का रूप प्रदान किया। विशेष रूप से श्वेतांबर जैन परंपरा के अनुयायियों की व्यापक भागीदारी ने दादागुरुदेव के प्रति अटूट आस्था और समाज की एकजुटता को रेखांकित किया।

ऐतिहासिक क्षण: 871 वर्ष पुरानी पवित्र चादर के दर्शन

महोत्सव का सबसे मार्मिक और ऐतिहासिक क्षण तब आया जब लगभग 150 वर्षों बाद जैसलमेर किले (सोनार दुर्ग) स्थित पार्श्वनाथ जैन मंदिर के ज्ञान भंडार से 871 वर्ष पुरानी (विक्रम संवत 1211 से संबंधित) दादागुरुदेव श्री जिनदत्त सूरि महाराज की पवित्र चादर (सहित अन्य वस्त्र जैसे चोला पट्टा और मुंहपट्टी) को विधिवत पूजन-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बाहर लाया गया।

जैसलमेर किले से निकला भव्य वरघोड़ा (शोभायात्रा) भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत नजारा प्रस्तुत कर गया। हाथी, घोड़े, ऊंटों की सवारी, लोक कलाकारों की झांकियां, नासिक ढोल की मधुर धुनों और हजारों श्रद्धालुओं द्वारा की गई पुष्पवर्षा के बीच यह दृश्य अविस्मरणीय बन गया।

पवित्र अभिषेक और सामूहिक पाठ

महोत्सव के दौरान अमरसागर, गंगोत्री और मानसरोवर से लाए गए पवित्र जल से चादर का विधिवत अभिषेक किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। साथ ही, विश्व भर में लाखों (कुछ स्रोतों में 1 करोड़ 8 लाख तक) श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक दादागुरु इकतीसा (31 गुणों का पाठ) किया गया, जो आध्यात्मिक एकता का अनुपम उदाहरण साबित हुआ।

पदारोहण और सम्मान समारोह

अंतिम दिन के पदारोहण समारोह में पूज्य अध्यात्म योगी उपाध्याय प्रवर महेंद्रसागर जी को आचार्य पद से तथा शुभद्रा श्री जी को गणिनी पद से अलंकृत किया गया।गच्छाधिपति आचार्य जिनमणिप्रभ सूरि जी महाराज को महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा द्वारा ‘राष्ट्र रत्न’ सम्मान से नवाजा गया, जबकि दादागुरु श्री जिनदत्त सूरी चादर महोत्सव समिति एवं जैसलमेर जैन ट्रस्ट ने उन्हें ‘सूरि सम्राट’ की उपाधि प्रदान की।

पूज्य आचार्य जी का संदेश और अन्य महत्वपूर्ण आयोजन

अपने संबोधन में पूज्य आचार्य श्री ने जैसलमेर को जैन धर्म की ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए यहां जैन इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने के लिए एक विशेष संग्रहालय/विरासत केंद्र की स्थापना पर जोर दिया, ताकि भावी पीढ़ियां इस महान परंपरा से जुड़ सकें।महोत्सव के दौरान नवरचित पुस्तकें "दी यूनिवर्सल ट्रूथ" एवं "गुरुदेव" का विमोचन हुआ। साथ ही, चादर महोत्सव की स्मृति को चिरस्थायी बनाने हेतु विशेष स्मारक डाक टिकट और स्मृति सिक्के (स्मारक टोकन) का अनावरण किया गया, जिसकी उपस्थित संतों और अतिथियों ने सराहना की।

आयोजन के स्वप्नद्रष्टा और व्यवस्थाएं

इस ऐतिहासिक आयोजन के स्वप्नद्रष्टा पूज्य आचार्य श्री जिनमनोज्ञ सागर जी रहे। चादर महोत्सव समिति के चेयरमैन महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, संयोजक तेजराज गोलेच्छा, समायोजक महेंद्र भंसाली, समन्वयक प्रकाशचंद लोढ़ा, राष्ट्रीय सचिव पदम टाटिया सहित सभी पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों और समाजजनों के अथक प्रयासों से यह सफल रहा।करीब 21,000 श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद आयोजन पूर्णतः सुव्यवस्थित, अनुशासित और गरिमामय रहा। आवास, भोजन, परिवहन और अन्य सुविधाओं की उत्तम व्यवस्था की गई, जिसकी हर ओर प्रशंसा हुई।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.