ईरान का बड़ा ऐलान: "एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे" – होर्मुज स्ट्रेट से जहाज गुजरने की शर्त: इजराइल-अमेरिका के राजदूतों को निकालो!

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ऐलान किया है कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति केवल उन अरब या यूरोपीय देशों को दी जाएगी जो अपने यहां से अमेरिका और इजराइल के राजदूतों को तुरंत निकाल देंगे। ईरान ने कहा कि युद्ध जारी रहने तक "एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे" और अमेरिका-इजराइल के सहयोगी देशों को तेल निर्यात नहीं होगा। यह शर्त वैश्विक तेल आपूर्ति (20% हिस्सा) को प्रभावित कर रही है, जिससे तेल कीमतें प्रभावित हो रही हैं। ट्रंप ने जवाब में ईरान को 20 गुना ज्यादा हमलों की चेतावनी दी है।

Mar 10, 2026 - 15:38
ईरान का बड़ा ऐलान: "एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे" – होर्मुज स्ट्रेट से जहाज गुजरने की शर्त: इजराइल-अमेरिका के राजदूतों को निकालो!

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग अब अपने 11वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। इस युद्ध ने वैश्विक स्तर पर तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, खासकर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर। ईरान ने अब होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर एक कड़ी शर्त रख दी है, जिससे दुनिया के तेल व्यापार पर गहरा असर पड़ सकता है।

ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने घोषणा की है कि वह "एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देगा" जब तक अमेरिका और इजराइल के हमले जारी रहेंगे। IRGC ने स्पष्ट कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति केवल उन अरब या यूरोपीय देशों को दी जाएगी, जो अपने देश से अमेरिका और इजराइल के राजदूतों को तुरंत निकाल देंगे। इस शर्त को पूरा करने वाले देशों को स्ट्रेट से "पूर्ण स्वतंत्रता और अधिकार" मिलेगा।

यह रणनीति ईरान की तरफ से एक राजनीतिक दबाव बनाने का तरीका माना जा रहा है, ताकि अमेरिका के सहयोगी देशों को इजराइल और अमेरिका से दूरी बनाने के लिए मजबूर किया जा सके। ईरान ने यह भी दोहराया है कि युद्ध की स्थिति में क्षेत्र से तेल निर्यात "शत्रु पक्ष" (अमेरिका और उसके सहयोगियों) की तरफ नहीं होने दिया जाएगा।

होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। यहां से प्रतिदिन दुनिया के लगभग 20% तेल की आपूर्ति गुजरती है। युद्ध शुरू होने के बाद से इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है – सामान्य 60 जहाजों प्रतिदिन के मुकाबले अब सिर्फ कुछ ही जहाज गुजर पा रहे हैं। इससे वैश्विक तेल कीमतें आसमान छू रही हैं।

ईरान ने पहले भी इस स्ट्रेट को बंद करने की धमकी दी थी और कुछ जहाजों पर हमले भी किए हैं। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान अमेरिका के सहयोगी देशों के जहाजों पर "सुरक्षा शुल्क" (security tax या toll) लगाने की योजना पर भी विचार कर रहा है, लेकिन मुख्य फोकस अब राजनयिक संबंध तोड़ने की शर्त पर है।

अमेरिका की प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही रोकता है, तो अमेरिका ईरान पर "20 गुना ज्यादा जोरदार" हमले करेगा। ट्रम्प ने यह भी दावा किया है कि युद्ध "जल्द ही खत्म" हो जाएगा और अमेरिका नौसेना जरूरत पड़ने पर टैंकरों को एस्कॉर्ट करेगी।

ईरानी महिला फुटबॉल टीम की 5 खिलाड़ियों को ऑस्ट्रेलिया ने दी शरण

इस जंग के बीच एक अलग लेकिन जुड़ी हुई खबर भी सामने आई है। एशियन कप फुटबॉल टूर्नामेंट में ईरान की महिला टीम ने दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच से पहले राष्ट्रगान नहीं गाया था, जिसे ईरान में विरोध प्रदर्शन के रूप में देखा गया। टीम के इस कदम पर घरेलू स्तर पर "देशद्रोह" का आरोप लगा और सख्त सजा की मांग हुई।

इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने टीम की पांच खिलाड़ियों – फतेमेह पसंदिदेह, जहरा घनबारी, जहरा सरबली, अतेफे रमजानजादेह और मोना हमौदी – को मानवीय आधार पर वीजा देकर शरण प्रदान कर दी है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कहा है कि बाकी खिलाड़ी भी चाहें तो रह सकती हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी कहा था कि अमेरिका भी इन खिलाड़ियों को शरण देने के लिए तैयार है।यह घटनाक्रम ईरान में जारी आंतरिक असंतोष और युद्ध के प्रभाव को दर्शाता है, जहां खेल और राजनीति एक-दूसरे से जुड़ गए हैं।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.