NDPS केस में सबूत नष्ट होने पर हाईकोर्ट सख्त, ट्रायल कोर्ट को अभियोजन के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष के निर्देश

एनडीपीएस केस में अहम सीसीटीवी फुटेज पेश न करने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि इस चूक को अभियोजन के खिलाफ ‘प्रतिकूल निष्कर्ष’ माना जाए।

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TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Editor
March 11, 2026 • 3:46 PM  13
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NDPS केस में सबूत नष्ट होने पर हाईकोर्ट सख्त, ट्रायल कोर्ट को अभियोजन के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष के निर्देश
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NDPS केस में सबूत नष्ट होने पर हाईकोर्ट सख्त, ट्रायल कोर्ट को अभियोजन के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष के निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में अहम सबूत सुरक्षित नहीं रखने को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने अपने रिपोर्टेबल फैसले में ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि अगर महत्वपूर्ण सीसीटीवी फुटेज जानबूझकर पेश नहीं किए गए हैं, तो इसे अभियोजन पक्ष के खिलाफ ‘प्रतिकूल निष्कर्ष’ के रूप में माना जाए।

यह आदेश हनुमानगढ़ जंक्शन के सुआशिया निवासी सावित्री देवी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया कि उनके 38 वर्षीय बेटे को झूठे एनडीपीएस केस में फंसाया गया है, जबकि उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

पुलिस का दावा और आरोपी पक्ष के तर्क

पुलिस के अनुसार 20 दिसंबर 2022 को गश्त के दौरान बीकानेर-सूरतगढ़ नेशनल हाईवे पर हिंडोर टोल प्लाजा के पास जोधपुर नंबर की एक स्विफ्ट कार और एक बोलेरो पिकअप को रोका गया था। पुलिस का दावा है कि स्विफ्ट कार से 76 किलो पोस्त बरामद हुआ, जिसके आधार पर श्रीगंगानगर के राजियासर थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि बोलेरो पिकअप से कोई बरामदगी नहीं हुई और स्विफ्ट कार से बताई गई जब्ती पूरी तरह मनगढ़ंत है। उनका कहना था कि पुलिस और कार सवारों के बीच साइड मिरर टूटने को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद झूठा केस बनाया गया।

CCTV फुटेज को लेकर उठा विवाद

आरोपी पक्ष ने सच्चाई सामने लाने के लिए टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज अदालत में पेश करने की मांग की थी। 4 जनवरी 2023 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सूरतगढ़ की अदालत में धारा 91 के तहत आवेदन देकर सुबह 8:45 बजे से दोपहर 1 बजे तक के फुटेज मांगे गए थे। ट्रायल कोर्ट ने भी टोल प्रबंधन को फुटेज पेश करने के निर्देश दिए थे।

हालांकि, अभियोजन पक्ष की ओर से बार-बार समय लिया गया और बाद में टोल प्लाजा प्रबंधन ने बताया कि सीसीटीवी डाटा डिलीट हो चुका है। आरोपी पक्ष ने अपने खर्च पर डाटा रिकवर कराने की पेशकश भी की, लेकिन अभियोजन ने इसका विरोध किया।

कोर्ट की टिप्पणी और ‘सर्वश्रेष्ठ साक्ष्य’ का सिद्धांत

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इस मामले में सीसीटीवी फुटेज बेहद अहम साक्ष्य हो सकते थे। इनसे यह स्पष्ट हो सकता था कि दोनों वाहन टोल प्लाजा पर कब पहुंचे, पुलिसकर्मियों की गतिविधियां क्या थीं और तलाशी की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।

कोर्ट ने ‘सर्वश्रेष्ठ साक्ष्य नियम’ का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धाराओं के अनुसार अदालत में सबसे प्रत्यक्ष और महत्वपूर्ण साक्ष्य पेश किए जाने चाहिए।

ट्रायल कोर्ट को प्रतिकूल निष्कर्ष निकालने के निर्देश

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में कई ऐसी परिस्थितियां सामने आई हैं जो अभियोजन पक्ष के खिलाफ जाती हैं। अदालत ने पाया कि पुलिस को शुरू से ही सीसीटीवी फुटेज की जानकारी थी, समय रहते फुटेज की मांग भी की गई थी और ट्रायल कोर्ट ने उन्हें पेश करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसके बावजूद फुटेज सुरक्षित नहीं किए गए और डाटा डिलीट होने दिया गया।

इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि मामले की सुनवाई के दौरान इसे अभियोजन पक्ष के खिलाफ ‘प्रतिकूल निष्कर्ष’ के रूप में माना जाए। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मामले के अंतिम निर्णय पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रही है और ट्रायल कोर्ट साक्ष्यों के आधार पर मामले के गुण-दोष पर फैसला करेगा।

TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Editor

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