चूरू के सरकारी डीबी अस्पताल में बच्चों के वार्ड में भीषण आग: धुएं और लपटों के बीच माता-पिता ने बचाई मासूमों की जान, 15 बच्चों को सुरक्षित शिफ्ट किया

राजस्थान के चूरू जिले के राजकीय डीबी अस्पताल की मातृ-शिशु इकाई के पीकू वार्ड में बुधवार सुबह 7:15 बजे बिजली के पैनल बोर्ड में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। नेबुलाइजर मशीन का प्लग लगाते ही आग भड़की, जिससे पूरा वार्ड धुएं और लपटों से भर गया। निमोनिया से पीड़ित 15 मासूम बच्चों को माता-पिता और मेडिकल स्टाफ की मदद से सुरक्षित दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया गया। आग 8 बजे तक बुझा ली गई, कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन अस्पताल की पुरानी लापरवाही (3 साल से फॉल्स सीलिंग ठीक नहीं, पैनल बोर्ड नहीं बदले) उजागर हुई।

Jan 21, 2026 - 13:30
चूरू के सरकारी डीबी अस्पताल में बच्चों के वार्ड में भीषण आग: धुएं और लपटों के बीच माता-पिता ने बचाई मासूमों की जान, 15 बच्चों को सुरक्षित शिफ्ट किया

राजस्थान के चूरू जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे बड़ी सुविधा माने जाने वाले डीबी अस्पताल (राजकीय डीबी अस्पताल) में बुधवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। अस्पताल की मातृ-शिशु इकाई के पीकू (PICU) वार्ड में अचानक आग लग गई, जिससे पूरा वार्ड कुछ ही मिनटों में घने धुएं और लपटों से भर गया। इस दौरान वार्ड में भर्ती 15 मासूम बच्चे फंस गए, जिनमें से अधिकांश निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे और उनकी सांस लेने में कठिनाई हो रही थी। 

घटना कैसे हुई?

सूत्रों के अनुसार, हादसा सुबह करीब 7:15 बजे हुआ। वार्ड में भर्ती एक बच्चे की मां ने नेबुलाइजर मशीन को चालू करने के लिए प्लग लगाया। जैसे ही प्लग लगा, बिजली के पैनल बोर्ड में शॉर्ट सर्किट हो गया और तुरंत आग भड़क उठी। आग तेजी से फैली और कुछ ही पलों में पूरा वार्ड धुएं से पट गया। धुआं इतना घना था कि नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों को सांस लेने में भारी दिक्कत होने लगी। माता-पिता घबराहट में अपने बच्चों को गोद में उठाकर भागे, जबकि डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया।

बच्चों को बचाने की कोशिश

मौके पर मौजूद मेडिकल स्टाफ और परिजनों की संयुक्त मदद से सभी 15 बच्चों को सुरक्षित रूप से पास के दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। किसी भी बच्चे या स्टाफ को आग से कोई गंभीर चोट नहीं आई, हालांकि धुएं के कारण कुछ बच्चों को सांस संबंधी परेशानी हुई। करीब 8 बजे तक अग्निशमन यंत्रों की मदद से आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। अस्पताल स्टाफ ने बताया कि यदि आग और फैलती तो ऑक्सीजन लाइनों के माध्यम से पूरे अस्पताल में भयानक हादसा हो सकता था।

डॉक्टरों और स्टाफ का बयान

वार्ड में ड्यूटी पर मौजूद डॉ. सिद्धार्थ ने बताया कि रात की ड्यूटी के दौरान स्टाफ के साथ मिलकर सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। वार्ड को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा है और सभी बच्चे अब स्थिर हैं। उन्होंने इस घटना को नियंत्रित करने के लिए स्टाफ और परिजनों के सहयोग की सराहना की।

पहले से चली आ रही लापरवाही

यह घटना अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को भी उजागर करती है। अस्पताल स्टाफ ने पहले भी कई बार बिजली के पैनल बोर्ड में शॉर्ट सर्किट की घटनाओं की शिकायत की थी और दो पैनल बोर्ड बदलने की मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा, लगभग 3 साल पहले पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (PICU) की फॉल सीलिंग गिर गई थी, जिसे आज तक ठीक नहीं करवाया गया है। स्टाफ का कहना है कि ऐसी छोटी-छोटी समस्याओं पर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाता, जिससे बड़े हादसे होने का खतरा बना रहता है।

अधिकारियों का दौरा

आग लगने की सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर अभिषेक सुराणा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और आवश्यक निर्देश दिए। अस्पताल प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि बच्चों का इलाज जारी रहेगा और वार्ड को जल्द ही पूरी तरह बहाल कर दिया जाएगा।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.