आरजीएचएस घोटाले में भरतपुर के 7 पुलिसकर्मियों का निलंबन: चार महिला कांस्टेबल शामिल
राजस्थान की RGHS योजना में घोटाले के आरोप में भरतपुर जिले के 7 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है, जिनमें 4 महिला कॉन्स्टेबल शामिल हैं। डीजीपी के आदेश पर एसपी दिगंत आनंद ने कार्रवाई की। निलंबित कर्मियों के नाम: अंजू कुमारी, सत्यवती, योगेश कुमारी, मिथलेश, प्रहलाद, जितेंद्र सिंह और मनोज कुमार। मामले की जांच एडिशनल एसपी कर रहे हैं, लेकिन घोटाले का तरीका अभी स्पष्ट नहीं है।
राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में अनियमितताओं और घोटाले की शिकायतों के बाद भरतपुर जिले में बड़ी कार्रवाई हुई है। भरतपुर पुलिस लाइन में तैनात 7 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, जिनमें 4 महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। यह कार्रवाई राजस्थान पुलिस के डीजीपी के आदेश पर भरतपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) दिगंत आनंद द्वारा की गई है।
निलंबित पुलिसकर्मियों के नाम शिकायत के आधार पर निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों में शामिल हैं: अंजू कुमारी (महिला कांस्टेबल) सत्यवती (महिला कांस्टेबल) योगेश कुमारी (महिला कांस्टेबल) मिथलेश (महिला कांस्टेबल) कांस्टेबल प्रहलाद,जितेंद्र सिंह, कांस्टेबल मनोज कुमार। ये सभी पुलिसकर्मी भरतपुर जिले में विभिन्न थानों या यूनिट्स में तैनात थे।
क्या है RGHS योजना? RGHS (Rajasthan Government Health Scheme) राजस्थान सरकार द्वारा 2021 में शुरू की गई एक कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम है। यह योजना राज्य के सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स, विधायकों, पूर्व विधायकों, मंत्रियों और उनके आश्रितों को कवर करती है। योजना के तहत ओपीडी, आईपीडी, सर्जरी, दवाइयां, जांच और अन्य मेडिकल सुविधाएं कैशलेस उपलब्ध कराई जाती हैं। एम्पैनल्ड अस्पतालों और फार्मेसी स्टोर्स पर RGHS कार्ड से लाभार्थी इलाज करवा सकते हैं। योजना का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आई हैं।
घोटाले का तरीका और शिकायत एसपी दिगंत आनंद के अनुसार, राजस्थान सरकार को सूचना मिली थी कि कुछ पुलिसकर्मियों ने RGHS योजना में गड़बड़ी की है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि घोटाला किस प्रकार का था। RGHS में आमतौर पर सामने आने वाले घोटालों के पैटर्न को देखते हुए, संभावना है कि इसमें शामिल पुलिसकर्मी फर्जी प्रिस्क्रिप्शन, फेक बिलिंग, दवाइयों की जगह घरेलू सामान या कैश लेना, अनावश्यक पंचकर्म/शिरोधारा जैसी महंगी आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट क्लेम करना या मेडिकल स्टोर्स से मिलीभगत शामिल हो सकती है। राज्य स्तर पर RGHS में अनियमितताओं की जांच चल रही है, जिसमें वित्त विभाग की ऑडिट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किया जा रहा है। हाल के महीनों में राज्यभर में कई डॉक्टर, कर्मचारी, अस्पताल और फार्मेसी स्टोर्स पर कार्रवाई हुई है, जिसमें पुलिस विभाग के कर्मचारी भी शामिल रहे हैं।
जांच और आगे की कार्रवाई निलंबन के बाद मामले की जांच एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। जांच पूरी होने पर दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है। राज्य सरकार ने RGHS में पारदर्शिता लाने के लिए नई एसओपी जारी करने और एंटी-फ्रॉड सेल गठित करने की घोषणा की है। यह घटना RGHS योजना में व्याप्त अनियमितताओं को उजागर करती है, जहां लाभार्थी कर्मचारियों, डॉक्टरों और फार्मेसी संचालकों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। सरकार द्वारा सख्त कदम उठाए जा रहे हैं ताकि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे।