बाड़मेर में किसानों का उग्र आंदोलन: 200 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ कलेक्ट्रेट घेराव को निकले हजारों किसान, डीजे पर नाचते-गाते चल रही रैली, बोले – “आज प्रशासन को झुकाएंगे”
बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी क्षेत्र के हजारों किसान 200 से ज्यादा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ फसल बीमा क्लेम, तीन साल का बकाया आदान अनुदान, जंगली जानवरों की समस्या, बिजली और भूमाफिया के मुद्दे पर जिला कलेक्ट्रेट घेराव करने निकले। प्रशासन ने दो बार रोका लेकिन किसान नहीं माने। डीजे पर नाचते-गाते किसानों ने साफ कहा – “आज प्रशासन को झुकाए बिना नहीं लौटेंगे”।
बाड़मेर। जिले के गुड़ामालानी क्षेत्र के किसान लंबे समय से चली आ रही अनदेखी से आक्रोशित हैं। सोमवार (9 दिसंबर 2025) को किसानों ने अपने अल्टीमेटम की आखिरी तारीख पर बड़ा ऐलान कर दिया था कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो जिला मुख्यालय का घेराव करेंगे। ठीक वही हुआ। सुबह से ही गुड़ामालानी के अहिंसा सर्किल तहसील गेट के सामने सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां जमा होने लगीं। दोपहर तक यह संख्या 200 के पार पहुंच गई और किसान डीजे की धुन पर नाचते-गाते बाड़मेर कलेक्ट्रेट की ओर कूच कर गए।रास्ते में प्रशासन ने दो बार रैली को रोकने की कोशिश की, लेकिन किसान नहीं माने। उनका साफ कहना था, “आज हम प्रशासन को झुकाए बिना नहीं लौटेंगे।”
किसानों की प्रमुख मांगें 2022 से 2024 तक का बकाया आदान अनुदान (खाद-बीज सब्सिडी) तुरंत जारी किया जाए।फसल बीमा क्लेम का भुगतान हो। किसानों ने आरोप लगाया कि उन्होंने हजारों करोड़ रुपये प्रीमियम के रूप में जमा किए, लेकिन बीमा कंपनियां सर्वे ठीक से नहीं करतीं और प्रशासन उनका साथ देता है।जंगली सुअरों और नीलगायों से फसल सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।24 घंटे बिजली की व्यवस्था हो, क्योंकि सिंचाई के अभाव में फसलें सूख रही हैं।गुड़ामालानी कृषि विज्ञान केंद्र की 125 बीघा जमीन पर भूमाफिया का कब्जा हटवाया जाए। किसानों का कहना है कि 2012 में यह जमीन केंद्र को आवंटित की गई थी, लेकिन प्रशासन-माफिया मिलीभगत से उस पर अवैध कब्जा हो गया।सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे, बीच में कोई बिचौलिया न रहे।
क्या हुआ था 5 दिसंबर को? 5 दिसंबर को किसान संघ के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने गुड़ामालानी एसडीएम को ज्ञापन सौंपा था। उस समय एसडीएम ने बातचीत की और आश्वासन दिया। किसानों ने 9 दिसंबर तक का समय दिया और साफ कहा था कि अगर समाधान नहीं हुआ तो 200 ट्रैक्टरों के साथ कलेक्ट्रेट घेराव करेंगे।प्रशासन की ओर से जिला स्तर पर एक-दो फोन जरूर आए, जिसमें कहा गया कि “प्रतिनिधि मंडल आकर बात कर ले”, लेकिन किसानों ने साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था,“हम अकेले नहीं आएंगे। प्रशासन को किसानों के बीच आकर बात करनी होगी और वहीं समाधान करना होगा।”
रैली की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें सैकड़ों ट्रैक्टरों की कतार, डीजे पर बजते गाने और नाचते-गाते किसान दिख रहे हैं। कई ट्रैक्टरों पर बैनर लगे हैं,
“किसान नहीं झुकेगा… प्रशासन झुकेगा”, “बीमा क्लेम दो… अनुदान दो… नहीं तो कुर्सी छोड़ो”।
प्रशासन की तैयारी प्रशासन ने कलेक्ट्रेट के आसपास भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। बैरिकेडिंग की जा रही है। लेकिन अभी तक कोई बड़ी टकराव की खबर नहीं है। किसान शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं, पर उनका इरादा दृढ़ है कि बिना लिखित आश्वासन और तुरंत कार्रवाई के वे वापस नहीं लौटेंगे।यह आंदोलन राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में किसानों की लंबे समय से दबी कुंठा का बयान कर रहा है। आने वाले कुछ घंटों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन बातचीत के लिए आगे आता है या मामला और तूल पकड़ता है।