बाड़मेर के आईएएस ने अपने गांव में धोती कुर्ता पहन कर शादी की... शादी में आए दोस्तों को भी पहनाया यहीं परिवेश
राजस्थान के बालोतरा के नव चयनित आईएएस जितेंद्र कुमार प्रजापत ने पारंपरिक वेशभूषा में बिना दहेज शादी कर समाज को दिया मजबूत संदेश।
राजस्थान के बालोतरा क्षेत्र से एक ऐसी प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जो आज के समय में समाज के लिए एक मिसाल बनती जा रही है। नव चयनित आईएएस अधिकारी जितेंद्र कुमार प्रजापत (रैंक 287) ने 21 अप्रैल को सादगी, परंपरा और सामाजिक मूल्यों को अपनाते हुए शादी रचाई।
इस शादी की खास बात यह रही कि पूरा समारोह पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ। दूल्हे ने धोती-कुर्ता और साफा पहनकर अपनी संस्कृति को गर्व के साथ प्रस्तुत किया। खास बात यह भी रही कि उनके सभी दोस्तों ने भी धोती-कुर्ता पहनकर इस समारोह में शिरकत की और एकदम पारंपरिक अंदाज़ में फंक्शन को अटेंड किया। हर तरफ देसी पहनावे और संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी, जिसने इस शादी को और भी खास बना दिया।
शादी की सभी रस्में पूरी तरह पारंपरिक तरीके से निभाई गईं—बिना किसी दिखावे और आधुनिक शोर-शराबे के। सादगी, संस्कार और परंपरा का ऐसा सुंदर संगम देखने को मिला, जो आज के दौर में बहुत कम देखने को मिलता है। यही वजह रही कि यह शादी राजस्थान से लेकर दिल्ली तक चर्चा का विषय बन गई।
लेकिन इस शादी की सबसे बड़ी और प्रेरणादायक बात रही — दहेज प्रथा का पूरी तरह से बहिष्कार।
जितेंद्र प्रजापत और उनके परिवार ने लड़की पक्ष से किसी भी प्रकार का दहेज लेने से साफ इंकार कर दिया।
परिवार का कहना है कि दहेज की वजह से आज भी कई परिवार आर्थिक दबाव में आ जाते हैं, कई रिश्ते टूट जाते हैं और समाज में असमानता बढ़ती है। ऐसे में उन्होंने यह कदम उठाकर समाज को एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की है।
परिवार ने यह भी संदेश दिया कि—
“बेटा-बेटी एक समान हैं, बेटियों को पढ़ाओ और देश को आगे बढ़ाओ।”
इस शादी ने खासतौर पर युवा पीढ़ी और पढ़े-लिखे वर्ग को यह सोचने पर मजबूर किया है कि बदलाव की शुरुआत खुद से ही करनी होती है। आईएएस जैसे प्रतिष्ठित पद पर चयनित होकर भी सादगी और संस्कारों को प्राथमिकता देना, समाज के लिए एक सशक्त उदाहरण है।
आज जब दिखावे और खर्चीली शादियों का दौर है, ऐसे में यह शादी साबित करती है कि असली खुशी परंपरा, सम्मान और सही सोच में होती है।