बिहाणी-बैरवा विवाद में नया मोड़: तस्वीरों ने बदल दी पूरी कहानी!

श्रीगंगानगर में विधायक-इंजीनियर विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। वायरल तस्वीरों और आरोपों के बीच मामला अब हाई-लेवल जांच में पहुंच गया है।

May 2, 2026 - 19:04
बिहाणी-बैरवा विवाद में नया मोड़: तस्वीरों ने बदल दी पूरी कहानी!

राजस्थान के श्रीगंगानगर में विधायक और इंजीनियर के बीच शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक तूफान में बदल चुका है। शुरुआत में यह मामला सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप और ‘तू-तू, मैं-मैं’ तक सीमित लग रहा था, लेकिन अब यह विवाद “तस्वीरों की जंग” बन गया है, जिसने पूरे प्रदेश की सियासत को हिला दिया है।

मामले में भाजपा विधायक जयदीप बिहाणी और RUIDP के अधिकारियों के बीच टकराव सामने आया है। शुरुआती रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अधिकारियों ने विधायक पर हमला किया, उनका चश्मा तोड़ा और उन्हें चोट पहुंचाई। यह खबर सामने आते ही राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई थी और विपक्ष ने इसे कानून-व्यवस्था पर सवाल के रूप में उठाया।

लेकिन जैसे ही नई तस्वीरें और वीडियो सामने आए, कहानी ने एक नया मोड़ ले लिया। एईएन जगनलाल बैरवा के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान और फटी हुई शर्ट ने पूरे मामले को उलझा दिया है। अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर घटना के दौरान वास्तविकता क्या थी और किस पक्ष की बात ज्यादा मजबूत है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस घटना को “अराजकता का प्रतीक” बताया है, जबकि नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने तीखा हमला करते हुए कहा कि जब सत्ताधारी दल के विधायक ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा पर क्या भरोसा किया जाए।

दूसरी ओर, विधायक जयदीप बिहाणी अपने आरोपों पर कायम हैं। उनका कहना है कि 550 करोड़ की जल परियोजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और जब उन्होंने इस पर सवाल उठाए, तो अधिकारियों ने उनके साथ बदसलूकी की। उन्होंने यह भी दावा किया कि भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए वे पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

वहीं इंजीनियर पक्ष के सामने आए चोट के निशान और आरोपों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि फोन छीने गए और बहस के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया था, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए अब IAS रवि जैन की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल जांच कमेटी गठित की गई है। कमेटी ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर लिए हैं और जल्द ही अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा है या सत्ता और प्रशासन के बीच टकराव का परिणाम? क्या तस्वीरों में दिख रही सच्चाई असली कहानी बयान कर रही है या फिर यह पूरा मामला किसी बड़े विवाद की परतें खोलने वाला है?

जवाब अब जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल श्रीगंगानगर की यह “तस्वीरों की जंग” पूरे राजस्थान की सियासत में चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

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