Pachpadra Refinery: एक दशक पहले ‘काले सोने’ ने भरी थी झोली, अब फिर क्यों बढ़ीं उम्मीदें? जानिए कैसे बदलेगी राजस्थान की तस्वीर
कभी इस ‘काले सोने’ ने राजस्थान को हजारों करोड़ की कमाई कराई थी, फिर अचानक सब धीमा पड़ गया। अब बाड़मेर की धरती से फिर बड़ी हलचल है। पचपदरा रिफाइनरी शुरू होने से आखिर क्या बदलने वाला है? पूरी जानकारी जानिए।
राजस्थान को अक्सर पर्यटन, खनिज संपदा और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले डेढ़ दशक में बाड़मेर की धरती से निकलने वाले कच्चे तेल ने राज्य की अर्थव्यवस्था को नई पहचान दी है। रेगिस्तान की रेत के नीचे छिपा यह ‘काला सोना’ राजस्थान सरकार के लिए बड़ी कमाई का जरिया बन चुका है।
साल 2008-09 में पेट्रोलियम सेक्टर से राजस्थान सरकार को केवल 8.20 करोड़ रुपए का राजस्व मिला था। उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था कि यही सेक्टर आने वाले वर्षों में राज्य के खजाने को हजारों करोड़ रुपए से भर देगा।
2009 में शुरू हुआ खेल, बाड़मेर बना तेल राजधानी
साल 2009 राजस्थान के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जब बाड़मेर-सांचौर बेसिन से व्यावसायिक स्तर पर कच्चे तेल का उत्पादन शुरू हुआ। इसके बाद राजस्थान की आय में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली।
तेल उत्पादन अपने चरम पर तब पहुंचा जब बाड़मेर से प्रतिदिन करीब 1 लाख 75 हजार बैरल कच्चे तेल का उत्पादन होने लगा। इसका सीधा असर राज्य के राजस्व पर पड़ा।
2013-14 में बना रिकॉर्ड
राजस्थान सरकार ने पेट्रोलियम सेक्टर से अब तक का सबसे बड़ा राजस्व 5953.11 करोड़ रुपए अर्जित किया। यह आज तक का रिकॉर्ड बना हुआ है।
फिर क्यों आई गिरावट?
तेल की इस सुनहरी कहानी में उतार-चढ़ाव भी खूब आए।
1. अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट
साल 2015 से 2021 के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई।
2. डॉलर-रुपया असंतुलन
डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत में उतार-चढ़ाव ने भी राजस्व को प्रभावित किया।
3. कोरोना महामारी का असर
साल 2020-21 में कोविड महामारी के कारण दुनियाभर में तेल की मांग घट गई। इसका असर राजस्थान पर भी पड़ा और राजस्व घटकर 1904.79 करोड़ रुपए रह गया।
फिर पटरी पर लौटा राजस्थान
महामारी के बाद हालात सुधरने लगे और 2022-23 में राजस्थान ने फिर से 4889.17 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल किया।
हालांकि 2024-25 में यह आंकड़ा घटकर 2688.91 करोड़ रुपए रह गया।
वहीं सरकार ने 2025-26 के लिए 3200 करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा था, जिसमें से दिसंबर 2025 तक 1533.74 करोड़ रुपए राजस्व प्राप्त हो चुका है।
अब पचपदरा रिफाइनरी से बदलेगी तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि अब राजस्थान की आर्थिक तस्वीर एक बार फिर बदलने वाली है और इसकी सबसे बड़ी वजह है HPCL Rajasthan Refinery Limited की पचपदरा रिफाइनरी।
प्रधानमंत्री Narendra Modi इसका उद्घाटन 21 अप्रैल को करने वाले थे, लेकिन 20 अप्रैल को CDU यूनिट में लगी आग के कारण कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा।
फिलहाल एचपीसीएल का दावा है कि मई के अंत तक ट्रायल प्रोडक्शन शुरू हो सकता है।
रिफाइनरी से कैसे बढ़ेगी राजस्थान की कमाई?
1. वैट और GST से मोटी कमाई
अब तक राजस्थान केवल कच्चा तेल निकालता था और उसे दूसरे राज्यों में रिफाइनिंग के लिए भेजा जाता था।
अब राज्य में ही पेट्रोल, डीजल और गैस तैयार होगी, जिससे VAT और CGST का बड़ा हिस्सा राजस्थान को मिलेगा।
2. पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री का हब बनेगा बाड़मेर
रिफाइनरी के साथ बनने वाला पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स प्लास्टिक, केमिकल और अन्य उद्योगों को आकर्षित करेगा।
3. रोजगार और निवेश
रिफाइनरी के आसपास नए उद्योग स्थापित होंगे, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और सरकार को अतिरिक्त टैक्स प्राप्त होगा।
4. इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
सड़क, रेल, बिजली और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं में बड़े स्तर पर सुधार होगा।
राजस्व का सफर (करोड़ रुपए में)
| वित्तीय वर्ष | राजस्व |
|---|---|
| 2013-14 | 5953.11 |
| 2015-16 | 2341.43 |
| 2020-21 | 1904.79 |
| 2022-23 | 4889.17 |
| 2024-25 | 2688.91 |
| 2025-26* | 1533.74 |
(दिसंबर 2025 तक)
राजस्थान की नई आर्थिक उम्मीद
बाड़मेर का तेल पहले भी राजस्थान की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जा चुका है। अब पचपदरा रिफाइनरी उस सफलता को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में है।
अगर सब कुछ तय समय पर हुआ, तो आने वाले वर्षों में बाड़मेर सिर्फ तेल उत्पादन का केंद्र नहीं बल्कि देश का बड़ा पेट्रोकेमिकल हब बन सकता है।
रेगिस्तान की इस धरती से निकल रहा काला सोना आने वाले समय में राजस्थान की किस्मत फिर चमका सकता है।
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