आख़िर दो-तीन दिन से लगातार मानवेन्द्र सिंह जसोल का कौन कर रहा है पीछा? जानिए क्या है पूरा मामला
पूर्व सांसद मानवेन्द्र सिंह जसोल के पीछे दो दिनों से लग रही संदिग्ध स्कॉर्पियो ने पूरे राजस्थान में सनसनी फैला दी है। क्या यह सिर्फ पीछा था या किसी बड़ी साजिश की शुरुआत...
राजस्थान में इस वक्त एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ राजनीतिक हलकों में बल्कि पुलिस प्रशासन में भी हड़कंप मचा दिया है। एक हाई-प्रोफाइल नेता, आधी रात का पीछा और एक संदिग्ध स्कॉर्पियो—ये कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी जरूर लगती है, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा गंभीर है। पूर्व सांसद और कर्नल मानवेन्द्र सिंह जसोल ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि पिछले दो दिनों से एक संदिग्ध गाड़ी लगातार उनका पीछा कर रही है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब मानवेन्द्र सिंह जसोल एक कार्यक्रम से लौट रहे थे। जैसे ही उनकी गाड़ी जोधपुर के झालामंड सर्किल के पास पहुंची, तभी गुजरात नंबर (GJ02) की एक सफेद स्कॉर्पियो अचानक उनके पीछे लग गई। शुरुआत में यह एक सामान्य घटना लग सकती थी, लेकिन कुछ ही देर में इस गाड़ी की हरकतें बेहद संदिग्ध हो गईं। स्कॉर्पियो ने एक-दो नहीं, बल्कि तीन बार उनकी गाड़ी को ओवरटेक किया, कभी आगे आकर धीमी हो गई तो कभी पीछे जाकर फिर से पास आने लगी। इस तरह की मूवमेंट साफ तौर पर ‘रेकी’ यानी निगरानी की ओर इशारा कर रही थी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। जानकारी सामने आई है कि कुछ दिन पहले सिणधरी-सिवाना इलाके में भी इसी तरह की एक संदिग्ध गाड़ी ने चार बार इसी अंदाज में रेकी की थी। यानी यह कोई एक दिन की घटना नहीं, बल्कि लगातार चल रही गतिविधि का हिस्सा हो सकता है। इससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि कोई अज्ञात लोग सुनियोजित तरीके से मानवेन्द्र सिंह जसोल की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।
इतना ही नहीं, इस संदिग्ध गाड़ी की पहचान को लेकर भी कई अहम सुराग सामने आए हैं। स्कॉर्पियो पर गुजरात का नंबर प्लेट था और उसके पीछे “श्रीराम” लिखा हुआ था। हालांकि यह पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है कि गाड़ी में कौन लोग सवार थे और उनका मकसद क्या था, लेकिन जिस तरह से बार-बार पास आकर उनकी गाड़ी की मूवमेंट को ट्रैक किया गया, वह इसे एक गंभीर सुरक्षा खतरे की ओर इशारा करता है।
मामला तब और ज्यादा गंभीर हो गया जब यह पीछा सड़क तक सीमित नहीं रहा, बल्कि घर तक पहुंच गया। आज सुबह मानवेन्द्र सिंह जसोल के निवास के बाहर भी एक संदिग्ध गाड़ी खड़ी देखी गई। जैसे ही सुरक्षाकर्मियों ने उस गाड़ी की ओर ध्यान दिया और उसका पीछा करने की कोशिश की, वह तेज रफ्तार से वहां से फरार हो गई। इस घटना ने साफ कर दिया कि मामला केवल रास्ते में पीछा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी निजी सुरक्षा तक में सेंध लगाने की कोशिश हो रही है।
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि बाड़मेर कंट्रोल रूम से इस संदिग्ध गाड़ी की सूचना मिलने के बावजूद बालोतरा पुलिस ने शुरुआत में इसे गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि बाद में बाड़मेर एसपी की सक्रियता के चलते स्थिति को संभालने की कोशिश की गई और संभावित खतरे को टाल दिया गया, लेकिन शुरुआती लापरवाही ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल जरूर खोल दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह सब किसके इशारे पर हो रहा है। क्या यह किसी गैंगस्टर का प्लान है, या फिर कोई राजनीतिक साजिश रची जा रही है? या फिर यह केवल डर पैदा करने की कोशिश है? इन सभी सवालों के जवाब अभी जांच के दायरे में हैं। इस बीच मानवेन्द्र सिंह जसोल ने इस पूरे मामले की जानकारी मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को दे दी है, जिससे यह मामला अब राज्य स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है।
फिलहाल पुलिस संदिग्ध स्कॉर्पियो की पहचान और उसके पीछे छिपे लोगों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हुई है। लेकिन जिस तरह से लगातार दो दिनों तक रेकी की गई, पहले भी इसी तरह की घटनाएं सामने आईं और फिर घर तक संदिग्ध गाड़ी पहुंच गई—ये सब संकेत देते हैं कि मामला साधारण नहीं है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पुलिस समय रहते इस रहस्य से पर्दा उठा पाएगी या फिर किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा है।