बाड़मेर: पति-पत्नी की अनोखी विदाई, चार घंटे के अंतराल पर ली अंतिम सांस – जिले में पहली ऐसी घटना

बाड़मेर के महाबार गांव में 88 वर्षीय हीरों देवी की मौत के चार घंटे बाद पति जुगता राम ने भी दम तोड़ा; दोनों की अंतिम यात्रा एक साथ निकली, जिले में पहली ऐसी घटना।

Nov 8, 2025 - 16:03
बाड़मेर: पति-पत्नी की अनोखी विदाई, चार घंटे के अंतराल पर ली अंतिम सांस – जिले में पहली ऐसी घटना

बाड़मेर, 8 नवंबर 2025:

राजस्थान के बाड़मेर जिले के महाबार गांव में एक ऐसी घटना घटी है, जो पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है। यहां सफेद आंकड़ा मंदिर के सामने रहने वाले एक बुजुर्ग दंपति ने जीवन भर का साथ निभाते हुए मौत को भी एक साथ गले लगाया। चार घंटे के बेहद छोटे अंतराल में पत्नी ने अंतिम सांस ली और उसके सदमे से पति भी दुनिया छोड़ चले। यह घटना जिले के इतिहास में पहली बार हुई है, जहां पति-पत्नी का ऐसा अनोखा संयोग देखने को मिला। पूरा गांव मातम में डूब गया है, और लोग इसे सच्चे प्रेम का प्रतीक बता रहे हैं।

घटना का पूरा विवरण;  मामला महाबार गांव के एक साधारण परिवार से जुड़ा है। बुजुर्ग पत्नी हीरों देवी (उम्र लगभग 88 वर्ष) और उनके पति जुगता राम (उम्र लगभग 90 वर्ष) दशकों से एक-दूसरे के बिना अधूरे थे। दोनों सफेद आंकड़ा मंदिर के सामने एक छोटे से घर में रहते थे, जहां वे शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे थे। परिवार के सदस्यों के अनुसार, हीरों देवी लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं, लेकिन उनका इरादा हमेशा मजबूत रहा।7 नवंबर 2025 को शाम करीब 6:00 बजे हीरों देवी ने अंतिम सांस ली। परिवार के लोग बताते हैं कि उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, और डॉक्टरों की सलाह पर घर पर ही इलाज चल रहा था। हीरों देवी की मौत की खबर जैसे ही जुगता राम तक पहुंची, वे गहरे सदमे में चले गए। बुजुर्ग पति अपनी जीवनसंगिनी के बिना कुछ पल भी सहन न कर सके। मात्र चार घंटे बाद, रात करीब 10:00 बजे जुगता राम ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। परिवार के अनुसार, जुगता राम ने हीरों देवी की मौत के बाद कुछ भी खाया-पिया नहीं और चुपचाप लेट गए। डॉक्टरों ने बताया कि यह सदमे के कारण दिल का दौरा पड़ने जैसा था, जो उनकी उम्र को देखते हुए स्वाभाविक था।पति-पत्नी के बीच ठीक चार घंटे का अंतराल रहा – पत्नी ने पहले सांस त्यागी और पति ने उसके ठीक बाद। यह संयोग इतना भावुक है कि गांव वाले इसे 'अनोखी विदाई' ही कह रहे हैं। परिवार के एक सदस्य ने बताया, "दादा-दादी का रिश्ता ऐसा था कि वे एक-दूसरे की सांस थे। हीरों दादी के जाने के बाद दादाजी ने कहा भी था कि अब वे भी चलेंगे। और सच में, वे चले गए।"

अंतिम यात्रा: एक साथ निकली श्रद्धांजलि दंपति की अंतिम इच्छा के अनुसार, उनकी विदाई भी एक साथ हुई। 8 नवंबर 2025 को सुबह करीब 10:30 बजे दोनों के पार्थिव शरीर को एक साथ गांव के श्मशान घाट ले जाया गया। गांव के सैकड़ों लोग इस अंतिम यात्रा में शामिल हुए। सफेद आंकड़ा मंदिर के सामने से शुरू हुई यह यात्रा भावुक दृश्य पैदा कर गई। महिलाएं रो-रोकर अपनी आहें भर रही थीं, जबकि पुरुष चुपचाप श्रद्धा सभा में शामिल हुए। पंडितों ने वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया। गांव के सरपंच ने बताया कि यह घटना पूरे बाड़मेर जिले के लिए एक उदाहरण है, जहां प्रेम की ऐसी मिसालें कम ही देखने को मिलती हैं।

परिवार और गांव पर पड़ा गहरा असर; महाबार गांव, जो बाड़मेर जिले के दूरस्थ इलाकों में बसा है, इस घटना से स्तब्ध है। दंपति के दो बेटे और कई पोते-पोतियां हैं, जो अब इस आघात से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। परिवार के एक बेटे ने कहा, "माता-पिता का साथ इतना गहरा था कि वे कभी अलग न होते। अब घर सूना लगता है।" गांव में बुजुर्गों ने इसे 'ईश्वरीय लीला' बताया, जबकि युवा इसे सच्चे वैवाहिक बंधन की मिसाल मान रहे हैं।बाड़मेर जिले के प्रशासन ने परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। जिला कलेक्टर ने शोक संदेश जारी कर कहा, "ऐसी घटनाएं हमें जीवन के मूल्यों की याद दिलाती हैं। जिला प्रशासन परिवार के साथ खड़ा है।" स्थानीय अस्पताल के डॉक्टरों ने भी पुष्टि की कि दोनों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, और इसमें कोई संदिग्ध परिस्थिति नहीं है।

 

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.