बाघ के सामने 30 मिनट तक थमी रुकी 25 पर्यटकों की सांसें, कैंटर फंसने से बनी डरावनी रात.

जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में टाइगर सफारी के दौरान कैंटर का पहिया कीचड़ में धंस गया। ठीक उसी वक्त सामने बाघ आ गया, जिससे 7 बच्चों समेत 25 पर्यटकों की सांसें 30 मिनट तक अटकी रहीं। वन विभाग ने उन्हें पैदल जंगल से निकाला और वीडियो डिलीट करवाए। विभाग इसे मामूली घटना बता रहा है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

Oct 29, 2025 - 17:24
बाघ के सामने 30 मिनट तक थमी रुकी 25 पर्यटकों की सांसें, कैंटर फंसने से बनी डरावनी रात.

जयपुर, 29 अक्टूबर 2025: गुलाबी नगरी जयपुर का प्रसिद्ध नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, जहां प्रकृति प्रेमी वन्यजीवों की अठखेलियों का मजा लेने आते हैं, आज एक ऐसी घटना का गवाह बना जो किसी फिल्मी सीन से कम न लगे। यहां टाइगर सफारी के दौरान एक कैंटर का पहिया कीचड़ भरी सड़क में धंस गया, और ठीक उसी पल सामने एक शेरनी आ गई। कैंटर में सवार 7 मासूम बच्चों समेत करीब 25 पर्यटकों की सांसें 30 लंबे मिनट तक अटक गईं। पर्यटकों का दावा है कि वन विभाग के कर्मचारियों ने उन्हें पैदल ही जंगल से बाहर निकालवाया, साथ ही घटना का वीडियो भी जबरन डिलीट करवा लिया। यह घटना न सिर्फ पर्यटन सुरक्षा पर सवाल खड़ी कर रही है, बल्कि वन्यजीव सफारी की व्यवस्था पर भी गंभीर उंगली उठा रही है।

घटना की पूरी समयरेखा: कैसे बनी डर की रात?

घटना शाम करीब 4 बजे की बताई जा रही है, जब एक ग्रुप टूरिस्ट्स टाइगर सफारी का आनंद लेने निकले थे। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क, जो अरावली की पहाड़ियों में 720 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है, राजस्थान का एक प्रमुख इको-टूरिज्म स्पॉट है। यहां लायन सफारी, लेपर्ड सफारी, एलीफेंट सफारी के अलावा पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुई टाइगर सफारी पर्यटकों को सबसे ज्यादा आकर्षित करती है। इस सफारी में पुणे और नागपुर से लाए गए बाघ गुलाब, भक्ति और चमेली जैसे बाघों को खुले जंगल जैसी सेटिंग में देखा जा सकता है।पर्यटकों के मुताबिक, कैंटर साफारी ट्रैक पर पहुंचा ही था कि अचानक नरम मिट्टी में पहिया धंस गया। ड्राइवर ने वाहन को बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक करीब 10-15 मीटर की दूरी पर एक बाघ (या शेरनी, जैसा कुछ पर्यटक बता रहे हैं) प्रकट हो गया। बाघ की दहाड़ और करीब आने की आहट से कैंटर में सन्नाटा छा गया। महिलाएं और बच्चे चीख पड़े, जबकि वयस्क पर्यटक मोबाइल से वीडियो बनाने लगे। "हमारी सांसें थम सी गईं। बच्चे डर के मारे रो रहे थे, और हम बस प्रार्थना कर रहे थे कि बाघ न आए," एक पर्यटक ने बताया।लगभग 30 मिनट तक कोई मदद नहीं पहुंची। आखिरकार, वन विभाग की एक दूसरी टीम आई, लेकिन कैंटर को तुरंत बाहर नहीं निकाला जा सका। पर्यटकों को कैंटर से उतारकर पैदल ही ट्रैक से बाहर लाया गया। दूरी करीब 2 किलोमीटर बताई जा रही है, जहां जंगल की घनी झाड़ियां और अंधेरा बढ़ रहा था। पर्यटकों का आरोप है कि इस दौरान स्टाफ ने उनके फोन चेक किए और वीडियो डिलीट करवा लिए, ताकि घटना वायरल न हो। "वे बोले कि वीडियो से पार्क की इमेज खराब होगी, लेकिन हमारी जान की परवाह किसने की?" एक महिला पर्यटक ने गुस्से में कहा।

वन विभाग का पक्ष: सफारी ट्रैक पर कीचड़ की समस्या पुरानी

वन विभाग के अधिकारियों ने घटना की पुष्टि की है, लेकिन इसे " मामूली तकनीकी खराबी" बता रहे हैं। मुख्य वन्यजीव वार्डन पवन उपाध्याय ने बताया, "बारिश के बाद ट्रैक पर कीचड़ जमा हो जाता है, जो कभी-कभी वाहनों को फंसा देता है। हमने तुरंत रेस्क्यू टीम भेजी और सभी पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला। बाघ का करीब आना संयोग था, लेकिन फेंसिंग और गार्ड रूम की वजह से कोई खतरा नहीं था। वीडियो डिलीट करने का कोई आदेश नहीं, शायद स्टाफ ने खुद सलाह दी होगी।" विभाग ने सफारी के लिए 200 रुपये प्रति व्यक्ति का शुल्क निर्धारित किया है, जिसमें 52 रुपये पार्क एंट्री शामिल है।हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब नाहरगढ़ में ऐसी दिक्कतें सामने आई हैं। सितंबर 2025 में भारी बारिश से लायन और टाइगर सफारी 7 दिनों के लिए बंद करनी पड़ी थी, क्योंकि रास्ते खराब हो गए थे और 6 फीट ऊंची घास ने सुरक्षा को चुनौती दी थी। इसी तरह, अगस्त में रणथंभौर नेशनल पार्क में एक समान घटना हुई, जहां गाइड ने पर्यटकों को जंगल में छोड़ दिया था। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के बाद ट्रैक की मरम्मत जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाएं न हों।

पर्यटकों की जुबानी: डर और गुस्सा

घटना के चश्मदीद पर्यटकों ने अपनी आपबीती साझा की। एक 12 वर्षीय बच्चे के पिता ने कहा, "7 बच्चे हमारे साथ थे, स्कूल ट्रिप पर आए थे। बाघ की आंखें चमक रही थीं, हम सोच रहे थे कि अब क्या होगा। पैदल चलाना तो और खतरनाक था।" एक अन्य पर्यटक ने बताया, "कैंटर पुराना था, नए वाहनों का टेंडर लंबे समय से लटका है। विभाग को जिम्मेदार ठहराते हैं हम।" सोशल मीडिया पर भी पर्यटक इसकी शिकायत कर रहे हैं, हालांकि वीडियो न होने से प्रूफ की कमी है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ? सुरक्षा पहले

वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा, "नाहरगढ़ जैसा पार्क संरक्षण के लिए शानदार है, लेकिन पर्यटक सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। कैंटरों को जीपीएस से लैस करना, रेस्क्यू टीम को 10 मिनट के अंदर पहुंचाना और ट्रैक की नियमित जांच जरूरी है। बाघ संरक्षण अच्छा है—राजस्थान में 130 से ज्यादा बाघ हैं—लेकिन ऐसी लापरवाही से पर्यटन प्रभावित होगा।" विभाग ने वादा किया है कि जांच करवाएंगे और सुधार करेंगे।यह घटना जयपुर को देश का पहला '4 सफारी वाला शहर' बनाने के प्रयासों पर ब्रेक लगाती नजर आ रही है।