“मुफ्त की रेवड़ियां बंद हों” – विधानसभा में रविंद्र सिंह भाटी ने उठाया करोड़ों के खर्च का मुद्दा

राजस्थान विधानसभा में रविंद्र सिंह भाटी ने किसी सरकार या पार्टी पर आरोप लगाए बिना नीतिगत सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि राज्य को मुफ्त वितरण की बजाय रोजगार, शिक्षा और दीर्घकालिक विकास पर अधिक ध्यान देना चाहिए। भाटी ने वित्तीय अनुशासन और युवाओं के लिए अवसर सृजन को प्राथमिकता देने की सलाह दी, जिसके बाद सदन में इस विषय पर चर्चा हुई।

Mar 1, 2026 - 15:04
“मुफ्त की रेवड़ियां बंद हों” – विधानसभा में रविंद्र सिंह भाटी ने उठाया करोड़ों के खर्च का मुद्दा

राजस्थान विधानसभा में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने मुफ्त योजनाओं और सब्सिडी आधारित मॉडल को लेकर एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने सदन में कहा कि राज्य को दीर्घकालिक विकास, रोजगार सृजन और वित्तीय संतुलन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।भाटी ने किसी सरकार, पार्टी या विशेष योजना पर आरोप नहीं लगाया, बल्कि व्यापक नीति दिशा पर चर्चा की आवश्यकता जताई। उनका कहना था कि संसाधनों का उपयोग इस तरह होना चाहिए जिससे युवाओं को स्थायी अवसर मिलें और राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत हो।

रिपोर्ट: पिछले वर्षों में कितना हुआ खर्च?

(निम्न आंकड़े सार्वजनिक बजट दस्तावेज़ों और घोषणाओं के आधार पर संकलित विश्लेषण हैं।)स्मार्टफोन वितरण योजना – अनुमानित बजट प्रावधान ₹12,000–13,000 करोड़, बिजली सब्सिडी – सालाना ₹13,000–15,000 करोड़ तक का भार, सामाजिक सुरक्षा पेंशन – वार्षिक व्यय ₹10,000 करोड़ से अधिक, अन्य राहत व सब्सिडी योजनाएं – हजारों करोड़ का अतिरिक्त प्रभाव, विश्लेषण के अनुसार, पिछले लगभग एक दशक में विभिन्न सामाजिक सुरक्षा और सब्सिडी योजनाओं पर कुल मिलाकर ₹1 लाख करोड़ से अधिक का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वित्तीय प्रभाव पड़ा है।

बहस का केंद्र

भाटी द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि —क्या सामाजिक सुरक्षा और विकास मॉडल के बीच बेहतर संतुलन की जरूरत है?क्या भविष्य की आर्थिक नीति में रोजगार और उद्योग पर अधिक फोकस होना चाहिए?

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.