अंता विधानसभा उपचुनाव: हनुमान बेनीवाल की हेलीकॉप्टर से एंट्री से गरमाया माहौल, नरेश मीणा के समर्थन में मांगरोल में ऐतिहासिक सभा आज
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल आज मांगरोल में हेलीकॉप्टर से पहुंचकर निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा के समर्थन में जनसभा करेंगे, जिससे अंता उपचुनाव का रोमांच बढ़ेगा।
अंता,8 नवंबर 2025: राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर सनसनीखेज मोड़ आ गया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल आज अंता विधानसभा उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा के समर्थन में अपनी ताकत दिखाने जा रहे हैं। बेनीवाल दोपहर 12:15 बजे मांगरोल के कृषि उपज मंडी प्रांगण में आयोजित चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे। जयपुर से हेलीकॉप्टर द्वारा मांगरोल पहुंचने वाले बेनीवाल की इस सभा से न केवल उपचुनाव का रोमांच बढ़ेगा, बल्कि निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा को अप्रत्याशित मजबूती भी मिल सकती है। आरएलपी कार्यालय से जारी प्रेस बयान के अनुसार, यह सभा किसानों, युवाओं और आदिवासी समुदाय के बीच बेनीवाल की मजबूत पकड़ को परखने का एक बड़ा मौका साबित हो सकती है।
उपचुनाव का बैकग्राउंड: कंवरलाल मीणा की सजा से खाली हुई सीट बारां जिले की अंता विधानसभा सीट पर यह उपचुनाव पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा की अयोग्यता के कारण हो रहा है। कंवरलाल मीणा को 2005 के एक पुराने मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई थी, जिसमें उन्होंने उपसरपंच चुनाव के दौरान एसडीएम पर पिस्तौल तान दी थी। इसके अलावा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप था। मई 2025 में विधानसभा ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी, जिसके बाद चुनाव आयोग ने 11 नवंबर को मतदान और 14 नवंबर को मतगणना की तारीख घोषित की। नामांकन प्रक्रिया 14-15 अक्टूबर को पूरी हुई, जिसमें कुल 15 उम्मीदवारों ने पर्चे भरे। हालांकि, मुख्य मुकाबला तीनों प्रमुख दावेदारों—कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया, भाजपा के मोरपाल सुमन और निर्दलीय नरेश मीणा—के बीच है।अंता सीट को वसुंधरा राजे गुट का गढ़ माना जाता है, जहां 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कंवरलाल मीणा के दम पर जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार नरेश मीणा की निर्दलीय उम्मीदवारी ने समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। नरेश मीणा ने कांग्रेस से टिकट की मांग की थी, लेकिन टिकट न मिलने पर 10 अक्टूबर को निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। उनकी यह चालाकी से कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश मानी जा रही है, क्योंकि अंता में मीणा समुदाय के वोटों का अच्छा हिस्सा है।
नरेश मीणा: युवा किसान नेता की उभरती ताकत नरेश मीणा, बारां जिले के कवाई क्षेत्र के निवासी, राजस्थान की राजनीति में एक उभरते हुए युवा चेहरे के रूप में पहचाने जाते हैं। वे पूर्व छात्र नेता हैं और किसान आंदोलनों से जुड़े रहे हैं। 2024 के देवली-उनियारा उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उन्होंने 60,000 से अधिक वोट हासिल कर सबको चौंका दिया था। जुलाई 2025 में समरावता थप्पड़ कांड में जेल से रिहा होने के बाद उनकी लोकप्रियता में और इजाफा हुआ। जेल से बाहर आते ही अंता सीट पर उनकी दावेदारी की चर्चा तेज हो गई। नरेश मीणा को चंद्रशेखर आजाद की भीम आर्मी और समाजवादी पार्टी का भी समर्थन हासिल है, जो आदिवासी और दलित वोटों को एकजुट करने में मददगार साबित हो सकता है।हाल ही में नरेश मीणा का एक विवादित बयान भी सुर्खियों में रहा। 27 अक्टूबर को जारी एक वीडियो में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया को चेतावनी देते हुए कहा, "तेरी तीन पीढ़ियां भी..."। इस बयान से सियासी माहौल और गरम हो गया, जिसकी आलोचना भाजपा और कांग्रेस दोनों ने की। लेकिन नरेश मीणा की आक्रामक शैली उनके समर्थकों को पसंद आ रही है। वे स्थानीय मुद्दों जैसे किसानों की कर्जमाफी, बेरोजगारी और आदिवासी अधिकारों पर जोर दे रहे हैं।
हनुमान बेनीवाल का समर्थन: सियासी गठजोड़ की नई मिसाल हनुमान बेनीवाल और नरेश मीणा के बीच की केमिस्ट्री राजस्थान की सियासत में नई नहीं है। बेनीवाल ने पहले भी कई मौकों पर मीणा का समर्थन किया है, खासकर झालावाड़ स्कूल हादसे के दौरान जब मीणा एसएमएस अस्पताल में अनशन पर थे। बेनीवाल, जो किसान नेता के रूप में जानी जाती हैं, अपनी सभा में केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर निशाना साध सकती हैं। वे किसान आंदोलन, युवाओं की बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों को उठाकर मतदाताओं को नरेश मीणा के पक्ष में एकजुट करने की कोशिश करेंगी। आरएलपी की यह 'नो एंट्री' रणनीति—यानी खुद प्रत्याशी न उतारकर निर्दलीय को समर्थन—उपचुनाव को त्रिकोणीय मुकाबले में बदल सकती है।आज की सभा में बेनीवाल के अलावा आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा, उत्तर प्रदेश के मेरठ विधायक अतुल प्रधान और मध्य प्रदेश की पूर्व विधायक ममता मीणा भी संबोधित करेंगी। नरेश मीणा ने खुद एक वीडियो में कहा, "अंता का उपचुनाव तो ट्रेलर है। आज मांगरोल में हनुमान बेनीवाल का हेलीकॉप्टर फुर्र-फुर्र उड़ेगा तो दोनों पार्टियों के कान बहरे हो जाएंगे।" आरएलपी कार्यकर्ताओं ने सुबह 11 बजे से सभा स्थल पर पहुंचने का आह्वान किया है।
अन्य दलों की रणनीति: कांग्रेस-भाजपा में हलचल कांग्रेस ने प्रमोद जैन भाया को फिर से मैदान में उतारा है, जो 2008 और 2018 में इस सीट से विधायक रह चुके हैं। भाया को संगठन की मजबूत पकड़ का फायदा मिल सकता है। पार्टी ने 56 नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी हैं और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट 5 नवंबर को रोड शो कर चुके हैं। वहीं, भाजपा अभी भी अपने प्रत्याशी मोरपाल सुमन पर दांव लगा रही है, लेकिन नरेश मीणा की मौजूदगी से उनके वोटों में सेंध लगने का खतरा है। राजस्थान में भाजपा सरकार बनने के बाद यह आठवां उपचुनाव है, जिसमें भाजपा ने अब तक सात में से पांच जीते हैं। लेकिन अंता जैसे हॉट सीट पर नरेश मीणा की चुनौती से सभी दलों की टेंशन बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मीणा के वोटों से मुकाबला उलट-पुलट हो सकता है।
उम्मीदें और प्रभाव: क्या बदलेगा सियासी समीकरण?
हनुमान बेनीवाल की सभा से नरेश मीणा को न केवल आरएलपी के जाट वोट मिल सकते हैं, बल्कि किसान और युवा वर्ग भी प्रभावित हो सकता है। यदि मीणा मजबूत प्रदर्शन करते हैं, तो यह 2028 के विधानसभा चुनावों के लिए एक संकेत होगा। अंता के करीब 2.5 लाख मतदाता इस उपचुनाव को सरकार के जनमत परीक्षण के रूप में देख रहे हैं। सभा के बाद बेनीवाल का अगला कदम क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, मांगरोल की धरती पर आज राजनीतिक इतिहास रचा जा सकता है।