नशे में धुत LSA ने किया हंगामा, सस्पेंड: पशुओं का इलाज करने से किया मना, नहीं दी दवा; ग्रामीणों से बदसलूकी भी की
अलवर जिले के बगड़ राजपूत स्थित पशु उप स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात लाइव स्टॉक असिस्टेंट लोकेश चंद को ड्यूटी पर नशे की हालत में लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। नशे में धुत होने के कारण उन्होंने बीमार पशुओं का इलाज करने और दवा देने से इनकार कर दिया तथा इलाज के लिए आए पशुपालकों और किसानों के साथ अभद्र व्यवहार किया। विभाग ने मामले की जांच के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया और निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय बीकानेर तय किया है।
अलवर। राजस्थान के अलवर जिले के बगड़ राजपूत गांव स्थित पशु उप स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात लाइव स्टॉक असिस्टेंट (LSA) लोकेश चंद को ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
घटना का विवरण
सूत्रों के अनुसार, लोकेश चंद नशे में धुत अवस्था में ड्यूटी पर पहुंचे थे। उन्होंने न केवल अपनी जिम्मेदारियों की अनदेखी की, बल्कि बीमार पशुओं का इलाज करने और दवा देने से भी साफ मना कर दिया। इलाज के लिए केंद्र पर पहुंचे पशुपालक और किसानों के साथ उन्होंने अभद्र व्यवहार और बदसलूकी भी की, जिससे ग्रामीणों में काफी नाराजगी फैल गई।
घटना के दौरान नशे की वजह से लोकेश चंद खड़े रहने में भी मुश्किल महसूस कर रहे थे और उन्होंने केंद्र पर हंगामा मचा दिया। इसकी शिकायत ग्रामीणों द्वारा विभाग के अधिकारियों तक पहुंचाई गई। कुछ रिपोर्ट्स में इस घटना का वीडियो भी वायरल होने की बात कही गई है, जिसमें नशे में LSA का व्यवहार स्पष्ट दिख रहा है।
विभाग की कार्रवाई
मामले के सामने आने के बाद पशुपालन विभाग ने इसे बेहद गंभीरता से लिया। जांच में सभी आरोप सही पाए जाने के बाद लोकेश चंद को सस्पेंड करने का फैसला लिया गया। विभागीय अधिकारियों ने कहा कि ऐसे कर्मचारी की हरकत से पूरे विभाग की छवि खराब होती है। इसलिए तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
निलंबन अवधि के दौरान लोकेश चंद का मुख्यालय बीकानेर स्थित अतिरिक्त निदेशक (क्षेत्र) कार्यालय तय किया गया है। विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ड्यूटी पर लापरवाही, अनुशासनहीनता और नशे की हालत में काम करना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पृष्ठभूमि और प्रभाव
पशु उप स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण सुविधा है, जहां बीमार पशुओं का प्राथमिक उपचार और दवा उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे केंद्र पर तैनात कर्मचारी की इस तरह की लापरवाही से किसानों और पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा, जिससे न केवल पशुओं का समय पर इलाज रुक गया बल्कि विभाग के प्रति लोगों का विश्वास भी प्रभावित हुआ।