ममता बनर्जी को बड़ा झटका? TMC के 20 सांसदों ने किया बगावत का दावा, NDA के साथ जाने के संकेत
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बड़ी टूट का दावा सामने आया है। बागी सांसदों का कहना है कि 20 सांसद अलग गुट बनाकर NDA का समर्थन करेंगे। यदि यह दावा औपचारिक रूप लेता है, तो यह ममता बनर्जी और विपक्षी राजनीति के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उथल-पुथल के बीच अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बड़ी बगावत के दावे सामने आए हैं। पार्टी के कुछ सांसदों ने दावा किया है कि TMC के 20 सांसद अलग गुट बनाकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करने जा रहे हैं। यदि यह घटनाक्रम औपचारिक रूप से आगे बढ़ता है, तो इसे ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़े राजनीतिक झटकों में से एक माना जा सकता है।
बागी सांसदों की ओर से दावा किया गया है कि संसद में TMC के 20 सांसदों का समर्थन उनके साथ है और वे स्वयं को 'असली टीएमसी' बता रहे हैं। बागी सांसद डॉ. शर्मिला सरकार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सांसदों का एक बड़ा समूह पार्टी नेतृत्व से अलग रास्ता अपनाने का फैसला कर चुका है और NDA को समर्थन देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
NDA को समर्थन देने का दावा
बागी सांसदों के अनुसार नए गुट की चीफ व्हिप काकोली घोष दस्तीदार होंगी, जबकि शताब्दी रॉय को डिप्टी लीडर की जिम्मेदारी दी जा सकती है। सांसदों का दावा है कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर NDA के साथ गठबंधन करने की इच्छा भी जताई है।
बताया जा रहा है कि बागी सांसद जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अपने गुट को अलग पहचान दिलाने की कोशिश करेंगे। साथ ही वे संसद में खुद को 'असली टीएमसी' के रूप में मान्यता देने की मांग भी कर सकते हैं।
बंद कमरे की बैठक से बढ़ी चर्चाएं
इस घटनाक्रम से पहले कुछ सांसदों की बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की खबरें भी सामने आई थीं। बताया गया कि इस बैठक में पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े कई प्रमुख चेहरे मौजूद थे। इसी बैठक के बाद से TMC में संभावित टूट की अटकलें तेज हो गई थीं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा और धीरे-धीरे यह असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है।
दो-तिहाई सांसदों के समर्थन का दावा
संसद में TMC के कुल 28 सांसद हैं। बागी गुट का दावा है कि उनके साथ 20 सांसद हैं, जो संख्या के लिहाज से दो-तिहाई से अधिक है। राजनीतिक और संसदीय नियमों के अनुसार किसी भी दल में विभाजन या अलग गुट की मान्यता के लिए दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसी आधार पर बागी नेता अपने गुट को वैध राजनीतिक पहचान दिलाने की कोशिश कर सकते हैं।
कौन-कौन हैं बागी गुट में?
बागी गुट के साथ जिन नेताओं के नाम जोड़े जा रहे हैं उनमें काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, शर्मिला सरकार, अबू ताहिर, खलीलुर रहमान, असित मल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया, प्रसून बनर्जी और सुखेंदु शेखर रॉय सहित कई सांसद शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि इन दावों को लेकर पार्टी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया और संसदीय स्तर पर औपचारिक स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।
ममता बनर्जी और विपक्ष के लिए चुनौती
यदि सांसदों के इस दावे को औपचारिक रूप मिलता है, तो यह केवल ममता बनर्जी के लिए ही नहीं बल्कि पूरे विपक्षी खेमे के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। संसद में कांग्रेस के बाद TMC विपक्ष की प्रमुख ताकतों में से एक रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में सांसदों के NDA का समर्थन करने से विपक्षी एकजुटता प्रभावित हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष होने वाली प्रक्रिया और राजनीतिक घटनाक्रम यह तय करेंगे कि यह बगावत केवल दावा बनकर रह जाती है या भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का कारण बनती है।