TMC में बड़ी टूट: 20 सांसदों ने छोड़ा ममता का साथ, NDA के समर्थन का ऐलान; राज्यसभा सांसद ने भी दिया इस्तीफा

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर राजनीतिक संकट गहराता नजर आ रहा है। 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने NDA को समर्थन देने का दावा किया है।

Jun 8, 2026 - 17:43
TMC में बड़ी टूट: 20 सांसदों ने छोड़ा ममता का साथ, NDA के समर्थन का ऐलान; राज्यसभा सांसद ने भी दिया इस्तीफा

नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में सियासी भूचाल थमता नजर नहीं आ रहा है। विधानसभा चुनाव में झटके के बाद अब पार्टी के भीतर बगावत खुलकर सामने आ गई है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, लोकसभा में TMC के 28 सांसदों में से 20 सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का फैसला किया है। इस घटनाक्रम को मुख्यमंत्री और पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर NDA के साथ जाने की इच्छा जताई है। सांसदों का दावा है कि उनके साथ पार्टी के दो-तिहाई से अधिक सांसद हैं, जिससे वे संसदीय नियमों के तहत अलग गुट के रूप में मान्यता पाने की कोशिश कर सकते हैं।

काकोली घोष दस्तीदार ने किया बड़ा दावा

टीएमसी की पूर्व नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सोमवार को दावा किया कि 20 सांसदों ने NDA का समर्थन करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला सभी सांसदों के बीच विचार-विमर्श के बाद लिया गया है और इसे जनता के जनादेश के अनुरूप माना जा रहा है।

काकोली घोष ने यह भी कहा कि वह अभी भी लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) हैं और सांसदों के इस फैसले को औपचारिक रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

भूपेंद्र यादव के घर हुई अहम बैठक

सोमवार को केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रभारी भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित आवास पर बागी सांसदों की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी भी पहुंचे।

बैठक में काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, अबू ताहिर, अरूप चक्रवर्ती, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, असित मल, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया और प्रसून बनर्जी सहित कई सांसद मौजूद रहे। इस बैठक ने राजनीतिक गलियारों में टीएमसी की संभावित टूट को लेकर चर्चाओं को और तेज कर दिया।

देर रात हुई गुप्त बैठक

सूत्रों के अनुसार रविवार देर रात दिल्ली में एक अज्ञात स्थान पर करीब 20 सांसदों की अनौपचारिक बैठक भी हुई थी। इस बैठक में पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर चर्चा की गई।

सोशल मीडिया पर सामने आई एक तस्वीर में कई सांसद एक साथ बैठक करते दिखाई दिए। बताया गया कि बैठक के दौरान फोटो खींचने को लेकर भी कुछ देर विवाद हुआ था।

सुखेंदु शेखर रे ने छोड़ी पार्टी

राज्यसभा सांसद और टीएमसी के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रे ने भी सोमवार को पार्टी और सांसद पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी। अपने इस्तीफे में उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि लंबे समय से पार्टी में निर्णय लेने की प्रक्रिया केंद्रीकृत हो गई थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में लोकतांत्रिक संवाद की कमी रही और यही स्थिति चुनावी हार का एक बड़ा कारण बनी। राज्यसभा सभापति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

पहले ही बगावत कर चुके हैं 58 विधायक

टीएमसी में संकट की शुरुआत 3 जून को हुई थी, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा के 80 में से 58 विधायकों ने अलग गुट बनाकर ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया था। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता भी दे दी।

हालांकि टीएमसी ने इस फैसले को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है और मामले की सुनवाई का इंतजार किया जा रहा है।

INDIA गठबंधन की बैठक में थीं ममता

दिलचस्प बात यह रही कि जिस समय दिल्ली में टीएमसी के भीतर उठापटक जारी थी, उसी दौरान ममता बनर्जी INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल थीं। इस बैठक में विपक्षी गठबंधन के 23 दलों के नेता मौजूद थे और केंद्र सरकार के खिलाफ साझा रणनीति पर चर्चा कर रहे थे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सांसदों और विधायकों की यह बगावत औपचारिक रूप से मान्यता प्राप्त कर लेती है, तो यह टीएमसी के 28 साल के इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक टूट साबित हो सकती है।

ममता बनर्जी के सामने बढ़ी चुनौती

एक ओर विधानसभा में बड़ी संख्या में विधायकों की नाराजगी और दूसरी ओर सांसदों के बगावती तेवर ने ममता बनर्जी की राजनीतिक चुनौती को और बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष, चुनाव आयोग और न्यायालयों के स्तर पर होने वाले फैसले इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।

फिलहाल बंगाल की राजनीति में मचे इस सियासी भूचाल ने राष्ट्रीय राजनीति का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और सभी की नजरें अब टीएमसी के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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