जंतर-मंतर पर ‘मैं भी अन्ना’ की जगह ‘मैं हूं कॉकरोच’, 5 घंटे का प्रदर्शन: उम्मीद से कम भीड़, क्या मिला कॉकरोच जनता पार्टी को?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का पहला बड़ा प्रदर्शन हुआ। सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह आंदोलन अब जमीन पर उतर आया है, जहां फाउंडर अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री को अल्टीमेटम देते हुए NEET और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा।
नई दिल्ली। सोशल मीडिया से शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन अब जमीन पर उतर आया है। पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके 6 जून को अमेरिका से दिल्ली पहुंचे और सीधे जंतर-मंतर पहुंचकर अपने पहले बड़े प्रदर्शन में शामिल हुए।
एयरपोर्ट से बाहर निकलने में देरी के बाद अभिजीत सुबह करीब 9 बजे जंतर-मंतर पहुंचे, जहां पार्टी का पहला जमीनी प्रोटेस्ट आयोजित किया गया। यह वही ऐतिहासिक स्थल है जहां 2011 में अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था।
“मैं हूं कॉकरोच” नारे के साथ शुरू हुआ आंदोलन
CJP के इस प्रदर्शन में “मैं भी अन्ना” की जगह नया नारा गूंजा — “मैं हूं कॉकरोच”। पार्टी का दावा है कि यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ है।
शुरुआत में करीब 1000 लोग पहुंचे, जो दोपहर तक बढ़कर लगभग 2000 तक पहुंच गए। देश के अलग-अलग राज्यों से लोग शामिल हुए।
सोशल मीडिया ताकत, जमीन पर सीमित भीड़
CJP के इंस्टाग्राम पर 2.2 करोड़ फॉलोअर्स हैं, जिससे इसे एक बड़े डिजिटल मूवमेंट के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन जमीनी प्रदर्शन में अपेक्षित भीड़ नहीं जुट पाई।
इसके बावजूद आंदोलन ने सोशल मीडिया पर NEET और पेपर लीक जैसे मुद्दों को फिर से ट्रेंड में ला दिया।
अभिजीत दीपके बने आंदोलन का चेहरा
मंच से सबसे सक्रिय भूमिका अभिजीत दीपके की रही। उन्होंने सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए इस्तीफे का अल्टीमेटम दिया और चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो अगला प्रदर्शन अगले शनिवार को होगा।
सोनम वांगचुक और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी मंच से संबोधन किया।
कौन हैं अभिजीत दीपके?
30 वर्षीय अभिजीत महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले हैं। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और फिलहाल अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स कर रहे हैं। वे लंबे समय से सोशल मीडिया एक्टिविज्म के जरिए चर्चित रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय: अन्ना आंदोलन जैसा असर नहीं
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन अन्ना हजारे आंदोलन जैसी परिस्थितियों से प्रेरित जरूर है, लेकिन वैसा असर पैदा नहीं कर पा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार—
- स्पष्ट एजेंडा की कमी
- संगठित कैडर का अभाव
- और सीमित जमीनी समर्थन
इसके बड़े कारण माने जा रहे हैं।
आंदोलन के सामने बड़ी चुनौतियां
- सोशल मीडिया फॉलोअर्स को वोट बैंक में बदलना
- मजबूत संगठन और कैडर का अभाव
- एक स्पष्ट राष्ट्रीय एजेंडा की कमी
प्रदर्शन में क्या बोले लोग?
प्रदर्शन में आए लोगों ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए। एक प्रतिभागी ने कहा कि लाखों छात्रों का भविष्य पेपर लीक और सिस्टम की खामियों से प्रभावित हो रहा है।
वहीं एक बुजुर्ग प्रदर्शनकारी ने कहा कि “बच्चों को कॉकरोच कहना गलत है, लेकिन उनके भविष्य से खिलवाड़ भी नहीं होना चाहिए।”
आगे क्या होगा?
अगर CJP अगले शनिवार को फिर से बड़ा प्रदर्शन करने में सफल रहती है, तो यह आंदोलन और मजबूत हो सकता है। लेकिन यदि भीड़ और समर्थन नहीं बढ़ा, तो यह डिजिटल मूवमेंट सोशल मीडिया तक ही सीमित रह सकता है।