राठौड़ बोले- गहलोत की हर सांस में राजनीति, पूनिया ने बताया तिकड़मबाज; शेखावत बोले- पायलट को आगे बढ़ा रही कांग्रेस

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सचिन पायलट को लेकर दिए गए बयान पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

Jun 8, 2026 - 17:39
राठौड़ बोले- गहलोत की हर सांस में राजनीति, पूनिया ने बताया तिकड़मबाज; शेखावत बोले- पायलट को आगे बढ़ा रही कांग्रेस

जयपुर। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर अशोक गहलोत और सचिन पायलट को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान किसी से छिपी नहीं है और गहलोत अब अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं।

सोमवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा उम्मीदवार सतीश पूनिया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ तथा केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देते हुए अशोक गहलोत को निशाने पर लिया। वहीं भाजपा नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भी सोशल मीडिया के जरिए गहलोत पर टिप्पणी की।

राजेंद्र राठौड़ बोले- गहलोत की हर सांस में राजनीति

पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस के अंदर की कलह अब किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ए टीम और बी टीम लगातार एक-दूसरे पर राजनीतिक हमले कर रही हैं।

राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत लंबे समय तक कांग्रेस आलाकमान के करीबी रहे, लेकिन अब उन्हें पार्टी नेतृत्व में पहले जैसी अहमियत नहीं मिल रही है। ऐसे में वे लगातार बयान देकर खुद को चर्चा में बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राजस्थान में अशोक गहलोत ऐसे नेता हैं, जो सांस भी लेते हैं तो उसके पीछे भी कोई न कोई राजनीति होती है। हालांकि राठौड़ ने यह भी माना कि तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके किसी भी नेता को पूरी तरह अप्रासंगिक नहीं कहा जा सकता।

सतीश पूनिया का हमला

भाजपा नेता सतीश पूनिया ने अशोक गहलोत को अपने ही बनाए राजनीतिक जाल में फंसा हुआ नेता बताया। उन्होंने कहा कि गहलोत ने लंबी राजनीतिक पारी जरूर खेली है, लेकिन उनकी पहचान तिकड़मबाजी, एडजस्टमेंट और मैनेजमेंट की राजनीति करने वाले नेता के रूप में रही है।

पूनिया ने कहा कि कांग्रेस संगठन और सरकार को जिस तरह चलाया गया, उसके परिणाम सबके सामने हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस राजस्थान में लगातार सत्ता क्यों नहीं दोहरा सकी और संगठन की स्थिति इतनी कमजोर क्यों हुई।

उन्होंने कहा कि आज यदि अशोक गहलोत राजनीतिक असहजता महसूस कर रहे हैं तो इसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं।

शेखावत बोले- सचिन पायलट की चर्चा से बेचैनी

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि कांग्रेस में सचिन पायलट को नई जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चाएं चल रही हैं और इसी वजह से अशोक गहलोत की बेचैनी बढ़ गई है।

शेखावत ने कहा कि जब-जब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन या संगठनात्मक बदलाव की चर्चा होती है, तब-तब गहलोत की प्रतिक्रिया सामने आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत वर्षों तक राजस्थान कांग्रेस की राजनीति के केंद्र में रहे हैं और अब उन्हें उस स्थिति के खत्म होने का डर सता रहा है।

शेखावत ने यह भी कहा कि गहलोत ने पहले उनके बारे में टिप्पणी करते हुए राजनीतिक लाइन लंबी करने की बात कही थी, लेकिन कांग्रेस का इतिहास गवाह है कि जो भी नेता आगे बढ़ने की कोशिश करता था, उसे रोकने का प्रयास किया जाता था।

"मैं किसी एक परिवार का सेवक नहीं"

गजेंद्र सिंह शेखावत ने गहलोत के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्हें डरा हुआ बताया गया था। शेखावत ने कहा कि वे वीर दुर्गादास राठौड़ की परंपरा के अनुयायी हैं और डर उनके स्वभाव में नहीं है।

उन्होंने कहा कि गहलोत को खुद अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता सता रही है। शेखावत ने यह भी कहा कि वे किसी एक परिवार के सेवक नहीं हैं और उन्हें किसी राजनीतिक प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है।

आचार्य प्रमोद कृष्णम का भी हमला

भाजपा नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अशोक गहलोत को निशाने पर लेते हुए लिखा कि राजनीति में समय बदलता रहता है। उन्होंने संकेतों में कहा कि सचिन पायलट भविष्य के नेता हैं, जबकि गहलोत अतीत का हिस्सा बन चुके हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता और नेतृत्व को लेकर किए गए प्रयास नियति के फैसलों को नहीं बदल सकते।

राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति फिर चर्चा में

भाजपा नेताओं की इन प्रतिक्रियाओं के बाद राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। पिछले कई वर्षों से अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच नेतृत्व को लेकर मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस संगठन में संभावित बदलाव और आगामी राजनीतिक समीकरणों के बीच इस तरह की बयानबाजी आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति को और अधिक गर्मा सकती है।

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