Rajya Sabha Election 2026: BJP से सतीश पूनिया और अलका गुर्जर ने भरा नामांकन, CM भजनलाल-वसुंधरा राजे रहे साथ

राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन के अंतिम दिन भाजपा उम्मीदवार डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका गुर्जर ने नामांकन दाखिल किया।

Jun 8, 2026 - 16:07
Rajya Sabha Election 2026: BJP से सतीश पूनिया और अलका गुर्जर ने भरा नामांकन, CM भजनलाल-वसुंधरा राजे रहे साथ

जयपुर। राजस्थान से राज्यसभा की तीन रिक्त हो रही सीटों पर होने वाले द्विवार्षिक चुनाव को लेकर सोमवार को राजधानी जयपुर में राजनीतिक गतिविधियां चरम पर रहीं। नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन भारतीय जनता पार्टी के दोनों अधिकृत प्रत्याशी डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका गुर्जर ने विधानसभा सचिवालय पहुंचकर निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपने नामांकन पत्र दाखिल किए। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी एवं वर्तमान राज्यसभा सांसद नीरज डांगी पहले ही अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं।

विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के गणित को देखते हुए भाजपा की दो और कांग्रेस की एक सीट पर जीत लगभग तय मानी जा रही है। ऐसे में तीनों उम्मीदवारों का निर्विरोध राज्यसभा पहुंचना लगभग निश्चित माना जा रहा है।

नामांकन के दौरान दिखी भाजपा की एकजुटता

राज्यसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया केवल एक संवैधानिक औपचारिकता नहीं रही, बल्कि भाजपा के लिए यह संगठनात्मक शक्ति और राजनीतिक एकजुटता का प्रदर्शन करने का अवसर भी बन गई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दोनों उम्मीदवारों के नामांकन के दौरान विधानसभा में मौजूद रहे और उन्होंने प्रत्याशियों को अग्रिम शुभकामनाएं दीं।

विधानसभा परिसर में भाजपा के मंत्रियों, विधायकों, संगठन पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं की बड़ी मौजूदगी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी के भीतर टिकट वितरण और नेतृत्व के फैसलों को लेकर किसी प्रकार का मतभेद नहीं है।

सतीश पूनिया के नामांकन में जुटा भाजपा का शीर्ष नेतृत्व

राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और जाट समुदाय के प्रमुख नेता डॉ. सतीश पूनिया जब नामांकन दाखिल करने पहुंचे तो उनके साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

डॉ. पूनिया की उम्मीदवारी को भाजपा की दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। संगठन में वर्षों तक सक्रिय भूमिका निभाने वाले पूनिया को राज्यसभा भेजकर पार्टी ने जाट समाज को बड़ा राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है।

आमेर विधानसभा सीट से पिछला चुनाव बेहद कम अंतर से हारने के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा कायम रखा। हरियाणा भाजपा के प्रभारी के रूप में उनकी भूमिका और संगठन में सक्रिय योगदान को देखते हुए उन्हें राज्यसभा का टिकट दिया गया है।

नामांकन के बाद डॉ. सतीश पूनिया ने भाजपा नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे सदैव स्वयं को एक साधारण कार्यकर्ता मानते हैं और राज्यसभा में राजस्थान, किसानों और आम जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने का प्रयास करेंगे।

अलका गुर्जर के नामांकन ने खींचा राजनीतिक ध्यान

राज्यसभा चुनाव के दौरान सबसे अधिक चर्चा डॉ. अलका गुर्जर के नामांकन को लेकर रही। भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव और दिल्ली की सह-प्रभारी डॉ. अलका गुर्जर के नामांकन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे विशेष रूप से मौजूद रहीं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार वसुंधरा राजे की उपस्थिति केवल औपचारिकता नहीं बल्कि भाजपा के भीतर संतुलन और सामंजस्य का संकेत भी मानी जा रही है। इससे यह संदेश गया कि पार्टी के सभी प्रमुख चेहरे राज्यसभा चुनाव में एकजुट होकर खड़े हैं।

अलका गुर्जर के साथ उनके पति एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. नाथू सिंह गुर्जर भी मौजूद रहे। उनकी उम्मीदवारी के माध्यम से भाजपा ने पूर्वी राजस्थान के प्रभावशाली गुर्जर समुदाय के साथ-साथ महिला नेतृत्व को भी मजबूत प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है।

वर्ष 2013 में बांदीकुई से विधायक रह चुकीं अलका गुर्जर लंबे समय से राष्ट्रीय संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। राज्यसभा में उनकी संभावित एंट्री को भाजपा की महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

कांग्रेस की ओर से नीरज डांगी मैदान में

राज्यसभा चुनाव के तीसरे उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस ने अपने निवर्तमान सांसद नीरज डांगी पर भरोसा जताया है। नीरज डांगी पहले ही अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं।

उनके नामांकन के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कांग्रेस ने भी इस अवसर पर संगठनात्मक एकता का प्रदर्शन करने की कोशिश की।

तीन सीटें, तीन उम्मीदवार; चुनाव की जरूरत नहीं

राजस्थान से इस बार राज्यसभा की तीन सीटें रिक्त हो रही हैं। विधानसभा में मौजूदा विधायकों की संख्या के आधार पर भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलना पहले से तय माना जा रहा था।

यही कारण रहा कि किसी भी दल ने अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने का जोखिम नहीं लिया। न तो निर्दलीय उम्मीदवारों की सक्रियता दिखाई दी और न ही क्रॉस वोटिंग या राजनीतिक खरीद-फरोख्त जैसी किसी स्थिति की संभावना बनी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद डॉ. सतीश पूनिया, डॉ. अलका गुर्जर और नीरज डांगी के निर्विरोध निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।

सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधने की रणनीति

राज्यसभा चुनाव के जरिए भाजपा ने एक साथ कई सामाजिक समीकरणों को साधने का प्रयास किया है। जाट समुदाय से सतीश पूनिया और गुर्जर समुदाय से अलका गुर्जर को उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने राजस्थान के दो प्रभावशाली वर्गों को स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है।

वहीं कांग्रेस ने नीरज डांगी को दोबारा मौका देकर अपने अनुभवी नेतृत्व पर भरोसा जताया है। ऐसे में यह चुनाव भले ही निर्विरोध हो, लेकिन इसके राजनीतिक संदेश और सामाजिक प्रभाव आने वाले समय में राजस्थान की राजनीति पर असर डाल सकते हैं।

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