TMC Crisis: सुष्मिता देव के इस्तीफे से ममता को बड़ा झटका, क्या पार्टी को बगावत से बचाने के लिए कांग्रेस का हाथ थामेंगी दीदी?
तृणमूल कांग्रेस (TMC) टूटने की कगार पर पहुंच गई है। राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव के इस्तीफे और असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात के बाद राजनीति गर्मा गई है। जानिए 58 विधायकों और 20 सांसदों के इस 'गुप्त प्लान' के पीछे की पूरी कहानी...
कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ममता बनर्जी को एक के बाद एक कई बड़े झटके लग रहे हैं। अब पार्टी की बेहद सीनियर नेता और ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सुष्मिता ने सुबह सीधे ममता बनर्जी को पत्र लिखकर राज्यसभा सदस्यता और टीएमसी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ दी।
पहले से ही भयंकर अंदरूनी कलह से जूझ रही टीएमसी के लिए इसे इस साल का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि, टीएमसी की तरफ से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पार्टी के सूत्रों ने इसे सुष्मिता का 'व्यक्तिगत फैसला' बताया है।
क्या बीजेपी में शामिल होंगी सुष्मिता देव?
सुष्मिता देव के इस्तीफे के क्रोनोलॉजी को देखें तो खेल बहुत बड़ा नजर आता है। इस्तीफा सौंपने के तुरंत बाद सुष्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि वे जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकती हैं।
आपको बता दें कि सुष्मिता देव का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है:
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2014: वे कांग्रेस के टिकट पर असम की सिलचर सीट से जीतकर लोकसभा सांसद बनी थीं।
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2021: उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोड़कर टीएमसी जॉइन की थी, जहां उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता और महिला विंग की बड़ी जिम्मेदारी मिली।
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राज्यसभा का सफर: टीएमसी ने उन्हें दो बार (अक्टूबर 2021 से अगस्त 2023 और फिर अप्रैल 2024 से अब तक) राज्यसभा भेजा था।
टूटने की कगार पर TMC: 20 सांसद और 58 विधायक बागी!
पार्टी के अंदर मची रार अब बेकाबू हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, चुनाव में मिली हार के बाद से ही टीएमसी के 58 विधायकों ने बगावत के सुर छेड़ दिए थे। अब खबर है कि पार्टी के करीब 20 सांसद भी बागी हो चुके हैं और वे बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने की पूरी तैयारी में हैं। अगर ये सांसद और विधायक पार्टी छोड़ते हैं, तो टीएमसी का अस्तित्व पूरी तरह खतरे में पड़ जाएगा।
आखिरी रास्ता: क्या कांग्रेस में होगा TMC का विलय?
इस चौतरफा घेराबंदी और पार्टी को टूटने से बचाने के लिए क्या ममता बनर्जी कोई बहुत बड़ा सरेंडर करने जा रही हैं? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि टीएमसी का कांग्रेस में विलय (Merger) हो सकता है।
इस चर्चा को हवा तब मिली जब खुद ममता बनर्जी ने दिल्ली जाकर सोनिया गांधी से मुलाकात की और उसके तुरंत बाद टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी राहुल गांधी से मिलने पहुंच गए। अब देखना यह होगा कि क्या ममता बनर्जी अपनी पार्टी को बचाने के लिए कांग्रेस का हाथ थामती हैं, या फिर उनके बागी सांसद और विधायक टीएमसी की लंका ढहा देंगे।