सोनम वांगचुक अरेस्ट केस: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 8 दिसंबर तक टली, पत्नी की याचिका पर केंद्र ने मांगा अतिरिक्त समय
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की हेबियस कॉर्पस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई 8 दिसंबर तक टाल दी। केंद्र सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा। NSA के तहत गिरफ्तार वांगचुक की रिहाई की मांग को लेकर मामला गर्माया हुआ है।
नई दिल्ली, 24 नवंबर 2025: पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई को 8 दिसंबर तक टाल दिया गया है। यह फैसला केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त समय मांगने के बाद लिया गया। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमों ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत उनके पति की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए संवैधानिक अधिकारों के तहत याचिका दायर की थी। यह मामला लद्दाख में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अधिकारों से जुड़े आंदोलन से उपजा है, जो अब राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बन चुका है।
मामले की पृष्ठभूमि; सोनम वांगचुक, जो लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं, को हाल ही में NSA के तहत गिरफ्तार किया गया था। वांगचुक ने लद्दाख में खनन गतिविधियों, पर्यावरण क्षति और स्थानीय समुदायों के अधिकारों के खिलाफ एक शांतिपूर्ण आंदोलन का नेतृत्व किया था। उनका आंदोलन केंद्र सरकार की नीतियों, विशेष रूप से लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद की विकास योजनाओं के खिलाफ था, जिसमें चाइनीज सड़क निर्माण और पारिस्थितिक संतुलन पर खतरा माना जा रहा था।वांगचुक की गिरफ्तारी 28 अगस्त 2024 को हुई थी, जब वे लेह में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए। पुलिस ने आरोप लगाया कि उनका आंदोलन 'राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा' पैदा कर रहा था, जिसके आधार पर NSA लागू किया गया। NSA एक कठोर कानून है, जो बिना मुकदमे के दो साल तक हिरासत की अनुमति देता है। वांगचुक के समर्थक इसे राजनीतिक दमन का मामला मानते हैं, जबकि सरकार इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने का कदम बता रही है। गिरफ्तारी के बाद वांगचुक को लेह जेल में रखा गया, जहां उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना किया।
पत्नी की याचिका: हेबियस कार्पस का सहारा वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमों, जो स्वयं एक पर्यावरण कार्यकर्ता हैं, ने 2 अक्टूबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 32 के तहत हेबियस कार्पस याचिका दायर की। यह याचिका संविधान के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का प्रावधान है। याचिका में मुख्य रूप से ये बिंदु उठाए गए:गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल: NSA के तहत गिरफ्तारी को 'मनमाना और असंवैधानिक' बताया गया, क्योंकि इसमें कोई ठोस सबूत या मुकदमे का उल्लेख नहीं है। हेबियस कार्पस की मांग: अदालत से अपील की गई कि वांगचुक को तुरंत पेश किया जाए और उनकी हिरासत की वैधता जांच की जाए। पर्यावरण और लोकतंत्र का मुद्दा: याचिका में कहा गया कि वांगचुक का आंदोलन शांतिपूर्ण था और यह लोकतांत्रिक अधिकारों का अभ्यास था। गिरफ्तारी से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को झटका लगेगा। स्वास्थ्य और मानवाधिकार: वांगचुक की उम्र (60 वर्ष से अधिक) और जेल की कठिन परिस्थितियों का हवाला देकर तत्काल रिहाई की मांग की गई। याचिका में वकील कॉलम सरोजिनी वर्मा ने पैरवी की, जो पर्यावरण मामलों में सक्रिय हैं। याचिका दायर होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया था, जिससे मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई: टाली गई कार्यवाही सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस जेआर गायकवाड़ और जस्टिस नवनित रवि शर्मा शामिल थे, ने हालिया सुनवाई में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को मौका दिया। मेहता ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की, ताकि सरकार अपना पक्ष विस्तार से रख सके। उन्होंने कहा कि मामला संवेदनशील है और इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलू हैं, इसलिए पूरी जानकारी जुटाने में समय लगेगा।कोर्ट ने सहमति जताते हुए सुनवाई को 8 दिसंबर 2024 तक स्थगित कर दिया। इस दौरान वांगचुक की हिरासत बरकरार रहेगी, लेकिन कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वे याचिका पर शपथ-पत्र जल्द से जल्द दाखिल करें। सुनवाई के दौरान वांगचुक के वकीलों ने तर्क दिया कि देरी से उनके मुवक्किल के स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।केंद्र सरकार का रुखकेंद्र सरकार ने अभी तक अपना विस्तृत जवाब नहीं दिया है, लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मौखिक रूप से कहा कि वांगचुक का आंदोलन 'बाहरी ताकतों' से प्रेरित था, जो लद्दाख की सीमा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। सरकार का दावा है कि NSA का इस्तेमाल उचित था, क्योंकि आंदोलन के दौरान हिंसा की आशंका थी। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह पर्यावरण कार्यकर्ताओं को दबाने की कोशिश है।
व्यापक प्रभाव और प्रतिक्रियाएं; यह मामला न केवल वांगचुक के लिए बल्कि पूरे पर्यावरण आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण है। लद्दाख में चाइनीज घुसपैठ और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर वांगचुक की सक्रियता ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर का चेहरा बना दिया है। गिरफ्तारी के बाद कई पर्यावरण संगठनों, जैसे ग्रीनपीस और लोकल एक्टिविस्ट ग्रुप्स ने विरोध प्रदर्शन किए। बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान, जिन्होंने वांगचुक के साथ 'पहलां' फिल्म बनाई थी, ने भी उनकी रिहाई की मांग की है।मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने NSA के दुरुपयोग पर चिंता जताई है, जबकि विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे 'लोकतंत्र पर हमला' बताया। दूसरी ओर, सरकार समर्थक इसे 'आंतरिक सुरक्षा' का मामला बता रहे हैं।